नित्य करू मैं साधना,

जितेश सिंह, छात्र
अबिवाहिविवि, भोपाल
फिर भी स्वार्थ बढ़ता जाए
कौन सा मैं त्याग कर
बन पाऊगा भगत, आजाद!

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जितेश सिंह, छात्र
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