गुरुवार, 4 अप्रैल 2019

अपना धर्म जानता हूँ

कई लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे सलाह दी कि तुम्हारे आलेख सिर्फ
कांग्रेस के ही विरुद्ध प्रकाशित होते रहते है| ऐसे में तुम्हारे तथ्य पर भी विश्वास नहीं है,| इसलिए सभी पार्टियाँ की समानरूप से आलोचना करों| कोई राजनीति पार्टी दूध का धुला नहीं है| ऐसे में तो क्रांति का ही रास्ता बचाता है| आलोचना ऐसे राजनीति के लिए प्रयाप्त नहीं है| जहाँ सभी दल आपस में अपने वैचारिक विभिन्नता से बावजूद देश के लिए समर्पित हो तो ठीक है, किन्तु सभी विचार देश और देश की जनता के विरुद्ध मैदान में उतर जाए तो एक नई सोच के साथ जनता को दूसरी पार्टी बनाने की दरकार है| उससे भी कोई समाधान नहीं, वजह देश की जनता उपनिवेशिकवाद और गैर-भारतीय परिवेश से साथ ही,गैर-भारतीय संस्कृति, समाज, और वेश-भूषा में जीना पसंद कर रही है| देश की युवा सशक्त के बजाये निर्बलता का परिचय बनी हुई है, सरकार आश्रित हो गई है| प्रचंड युवा सशक्ति वाला देश भारत, आज अपने ही तरुण निक्क्मों के कारण पिछड़ गया है| स्वार्थी और धन के नशा में दुनिया के विकसित देश के यहाँ मजदूरी करता है| ऐसे में देश की चिंता से ज्यादा अपने स्वार्थ और खुद के भविष्य की खुशिहाली के लिए जिन्दा है| 
तभी तो देश की 70 प्रतिशत जनता आभाव में जीवनयापन करने को मजबूर है और कुछ घराने दुनिया के सभी भोग का आनंद उठा रहे है| देश और राजनीति की बात छोड़ों मित्रों, तुम देश के बारे कभी सोचे हो? नहीं, तुम कभी निक्ष्पक्ष्ता से देश के लिए जीने वाले का पक्ष लिए हो नहीं| फिर यह ज्ञान मुझे क्यों? जिसका असर तुम पर भी नहीं है| महाभारत में भगवान श्री कृष्ण ने कहा था "जो धर्म और राष्ट्र के लिए जीता है, उसके लिए पक्षपात करना पड़े तो करना चाहिए|" इसलिए हाँ, मैं भी पक्षपाती हूँ| क्यों कि मैंने देखा है कुछ राजनीति पार्टियों के रैली में भारत के टुकडे के नारे लगते, भारत के राष्ट्रध्वज को जलते, शत्रु देश की ध्वज को लहराते| मैंने देश है किसी पार्टी में रैली में भारत माता की जयकार लगते, वंदेमातरम् के नारे लगते. इसलिए मुझे मालूम है, कौन सा पक्ष में मुझे बोलना, लिखना और सहयोग करना है क्योकि मैं अपना धर्म जनता हूँ| 

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