जितेश कुमार
भोपाल
#कांग्रेसघोषणापत्र: 2019 का चुनाव भारत का भविष्य तय करेगा. ऐसा बहुत से जानकर और राजनीतिक विश्लेषक मान रहे थे. उम्मीद था कि कांग्रेस पार्टी भी जनता के सामने नतमस्तक होंगी और तो अपने पार्टी में लोकतंत्र की स्थापना करेंगी.
परिवारवाद की जय के बजाये, भारत की लोकतंत्र की जय कहेगी. मोदी के प्रचंड वेग ने भारत के लोकतंत्र की आस्था को पुनर्जीवित किया है. 2014 के पहले देखा जाए तो आम लोगों में लोकतंत्र के प्रति सिर्फ इतनी जवाबदारी दिखाती थी कि एक बार 5 साल में वोट देने के बाद राजनितिक रूप से उदासीन हो जाते थे. सरकार क्या कर रही है? कौन सी योजना क्रियान्वयन कर रही है? बाकि के राज्य की स्थिति कैसी है? कश्मीर की हालत कैसे है? इस सब प्रश्नों को पहले कोई सोचता था क्या? नहीं, लेकिन 2014 के बाद एक चाय की दुकान पर भी बैठे आम नागरिक सरकार की नीति और योजना की सकारात्मक और नकारात्मक दोनों पहलुओं से अपने बात को हर जगह छोटे-बड़े चौपाल, चौक-चौराहे और यात्राएं के दौरान भी रखता है. यही सही मायने में लोकतंत्र का तकाजा है, 'जो जहाँ है, वही से आवाज़ उठाये'.
हाल में ही कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में धारा 370 कश्मीर से नहीं हटाएंगे के साथ वहां सैन्य शक्ति को कमजोर करेंगे और तो धारा 124 देशद्रोह के क़ानून को भंग करने का वादा किया है. इससे साफ है कि 2019 का चुनाव न्यू इंडिया और विकास के मुद्दे से भटक गया है. अब राष्ट्रीय स्वाभिमान और राष्ट्रवादी विचार का संधर्ष एक ऐसे पारिवारिक राजनीतिक पार्टी से है, जिसे किसी भी परिस्थिति में सत्ता और पॉवर चाहिए. कांग्रेस का घोषणा पत्र एकदम देश के टुकड़े करने की सोच से लबरेज है. ऐसा चुनावी वादा करके किस समुदाय को कांग्रेस अपने पक्ष में करना चाहती है, सभी को मालूम ही है. किंतु आज उस समुदाय की भी अग्नि परीक्षा है, जिसके वोट के लिए कांग्रेस पार्टी को देशद्रोही क़ानून भंग करना पड़े. मुस्लिम समुदाय को कांग्रेस पार्टी वोटबैंक समझती ही थी अब देशद्रोही क़ानून हटाकर क्या साबित कर रही है कि उक्त समुदाय देशद्रोही है.
नौटंकी बंद करें, कांग्रेस. भगवा चोला पहनकर, मंदिर में माथा टेककर, रुद्राक्ष और जेनऊ पहनकर कश्मीरी ब्राह्मण बनाने वाले राहुल गाँधी कश्मीर वापसी कब करेंगे? ये बात तो अपने घोषणा पत्र में लिखा नहीं, कब कश्मीरी ब्राह्मनों न्याय मिलेगा? ये बात को घोषणा पत्र में है, ही नहीं. एक जेनऊधारी हिन्दू और पीड़ित कश्मीरी ब्राम्हण होने के नाते इतना तो उम्मीद था ही राहुल जी आपके घोषणा पत्र में कश्मीर के ब्राह्मनों के प्रति उदारता और उनके घरवापसी के लिए धारा 370 को भंग करेंगे. किन्तु नहीं किया अपने और ऐसे देश को टुकड़े करने वाले क़ानून को संरक्षण देने की वकालत की. ये तो वैसा ही हुआ जैसे कश्मीर में कभी कभी सेना के लिबाज में आतंकी आते है और कश्मीर में तांडव मचाते है. उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात आदि राज्यों में जेनऊधारी हिन्दू और केरल, बंगाल, कर्नाटक जैसे राज्यों में क्रिश्चन बनाने के ढोंग का पर्दाफास हो गया है. पहले तो लोगों को शक था पर अब यकीन के साथ आवाजे उठाये जा रहे है कांग्रेस बदनाम हुई, कुर्ती तेरे लिए.

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