बेगुसराय बिहार| बेगुसराय की सीट लोकसभा 2019 हाई प्रोफाइल संसदीय
क्षेत्र है| इसकी वजह बीजेपी से प्रखर हिंदूवादी और कदावर नेता श्री गिरिराज सिंह के विरुद्ध जेएनयू के वामपंथी और छात्र संघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार का मैंदान में उतरना है| बेगुसराय के ही रहने वाले कन्हैया कुमार तीन साल पूर्व जेएनयू में 9 फ़रवरी 2016 यूनिवर्सिटी के परिसर में वामपंथी और कश्मीरी छात्रों के सहयोग से आतंकी अफजल गुरु के बरसी और देशविरोधी विरुद्ध नारे लगाने के आरोपी है| भारत के टुकड़े करने वाले नारों से लोकप्रियता और देश के नजर में उभरने वाले कन्हैया कुमार से परिचित तो सभी है| जहाँ देश के विकास और एकाजुटता का पक्ष हो| वहां कन्हैया जैसे देशद्रोह के आरोपी को कितना बेगुसराय की जनता ताबजुम देती है यह तो आने वाले परिणाम ही बताएँगे| बेगूसराय राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की भूमि है, यहाँ के लोगों में दिनकर की खून है, यही कारण है कि राष्ट्रवादी दल यहाँ अपराजय है| फिरभी बीते 30 वर्षों में माओवाद के विचारकों का यहाँ के कुछ प्रखंडों में दबदबा है| इसी दबदबा के बल पर कन्हैया कुमार चुनाव में खड़े हुए है| 1962 चीन के युद्ध में इसी दल ने भारतीय सैनिकों को रक्त देने से इनकार कर दिया और अपना समर्थन चीनी सैनिकों के प्रति दिखाई, तभी से देश भर में इनके समर्थक नगण्य हो गए और चन राज्यों के जिलों के प्रखंडों में यह दल सिमट गया | एक समय बिहार में वाम विचार बहुसंख्यक थे| आज यह नक्सलवाद और लुट-पाट करने वाले लोगों में तबदील हो गए है|
क्षेत्र है| इसकी वजह बीजेपी से प्रखर हिंदूवादी और कदावर नेता श्री गिरिराज सिंह के विरुद्ध जेएनयू के वामपंथी और छात्र संघ के पूर्व नेता कन्हैया कुमार का मैंदान में उतरना है| बेगुसराय के ही रहने वाले कन्हैया कुमार तीन साल पूर्व जेएनयू में 9 फ़रवरी 2016 यूनिवर्सिटी के परिसर में वामपंथी और कश्मीरी छात्रों के सहयोग से आतंकी अफजल गुरु के बरसी और देशविरोधी विरुद्ध नारे लगाने के आरोपी है| भारत के टुकड़े करने वाले नारों से लोकप्रियता और देश के नजर में उभरने वाले कन्हैया कुमार से परिचित तो सभी है| जहाँ देश के विकास और एकाजुटता का पक्ष हो| वहां कन्हैया जैसे देशद्रोह के आरोपी को कितना बेगुसराय की जनता ताबजुम देती है यह तो आने वाले परिणाम ही बताएँगे| बेगूसराय राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर की भूमि है, यहाँ के लोगों में दिनकर की खून है, यही कारण है कि राष्ट्रवादी दल यहाँ अपराजय है| फिरभी बीते 30 वर्षों में माओवाद के विचारकों का यहाँ के कुछ प्रखंडों में दबदबा है| इसी दबदबा के बल पर कन्हैया कुमार चुनाव में खड़े हुए है| 1962 चीन के युद्ध में इसी दल ने भारतीय सैनिकों को रक्त देने से इनकार कर दिया और अपना समर्थन चीनी सैनिकों के प्रति दिखाई, तभी से देश भर में इनके समर्थक नगण्य हो गए और चन राज्यों के जिलों के प्रखंडों में यह दल सिमट गया | एक समय बिहार में वाम विचार बहुसंख्यक थे| आज यह नक्सलवाद और लुट-पाट करने वाले लोगों में तबदील हो गए है|
बिहार ही नहीं समूचे भारत में वामविचार अपनी आखरी सांस फुक रही मालूम पड़ती है तो वही गिरिराज सिंह की चमक-धमक और बिहार के प्रति उनका बेबाकी से बोलना भविष्य में उन्हें बिहार के प्रतिनिधि के रूप में देखता है| गिरिराज सिंह बेगुसराय चुनाव में उतर कर यह सन्देश दिए है कि वो केवल राजनेता नहीं, प्रखर राष्ट्रवादी नेता भी है| जिसके लिए उनकों पूरा भारत जानता है ठीक वही अंदाज में बेगुसराय में धारा 124 क देशद्रोही के आरोपी कन्हैया के विरुद्ध खड़े है|
कुछ कानून जानने वाले का कहना है कन्हैया कुमार पर जेएनयू कांड के बाद 1200 पेज की जो पटियाला कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की है, इससे कन्हैया बचने के लिए राजनीति आशय की लालच में चुनाव में उतारे है ताकि इन पर लगे मामले ढीला हो जाये| अब तो वक्त का इन्तजार करना होगा| बेगुसराय की जनता तय करेगी कि जेएनयू से यह देशद्रोह का आरोपी भविष्य में जेल में होगा या सदन में|

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