जितेश कुमार
कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्रों पर धारा 124 (क) देशद्रोही, धारा 323 जानबूझ कर चोट पहुँचाने, धारा 465 जालसाज़ी, धारा 71 फर्जी दस्तावेज, धारा 143 गैर-कानूनी ढंग से इकठ्ठा होना, धारा 149, धारा 147 उपद्रव करना और 120 आपराधिक साजिश के तहत आरोप दर्ज किये गये है.
घटना के तीन वर्ष बाद दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी, 2019 को पटियाला कोर्ट में 1200 पेज के चार्जसीट दर्ज की. चार्जसीट में कुल 46 लोगों को आरोपी पाया गया है. इसमें 10 लोगों को सीधे तौर पर आरोपी
बनाया है. इनमें कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र शामिल है. करीब 90 लोगों की गवाही दर्ज की गई है. गवाही चश्मदीद छात्रों और सिक्योरिटी गार्ड में तैनात लोगों की है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है और नारेबाज़ी की 13 वीडिओ क्लिप्स भी शामिल की है, इसकी जाँच CFSC ने सही माना है. जैसा की पहले कुछ नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने वीडियो फुटेज को फेंक और एडिटेड बताया था. इसके विपरीत पुलिस के हाथ लगी 13 वीडिओ क्लिप्स जाँच में सही पाए गये है. इसमें देशविरोधी नारे लगाते आरोपियों की आवाज़ और चेहरा पहचाना जा सकता है.
बनाया है. इनमें कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र शामिल है. करीब 90 लोगों की गवाही दर्ज की गई है. गवाही चश्मदीद छात्रों और सिक्योरिटी गार्ड में तैनात लोगों की है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है और नारेबाज़ी की 13 वीडिओ क्लिप्स भी शामिल की है, इसकी जाँच CFSC ने सही माना है. जैसा की पहले कुछ नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने वीडियो फुटेज को फेंक और एडिटेड बताया था. इसके विपरीत पुलिस के हाथ लगी 13 वीडिओ क्लिप्स जाँच में सही पाए गये है. इसमें देशविरोधी नारे लगाते आरोपियों की आवाज़ और चेहरा पहचाना जा सकता है.
आपको बता दे कि 9 फ़रवरी,2016 को JNU में कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य के अगुवाई में देशविरोधी नारे और प्रदर्शन किये गये थे. 9 फ़रवरी का दिन इन देशद्रोहियों के द्वारा इसलिए चुना गया था कि इसी दिन देश के सर्वाच्च सदन पर हमला करने वाले अफ़जल गुरु आतंकी को देश की सर्वाच्च अदालत ने फांसी की सजा दी थी. आतंकी अफ़जल के बरसी के दिन आयोजन रखना ही अपने आप में देशद्रोह का बहुत बड़ा सबूत है. खैर करीब तीन साल बाद पूरी मुस्तैदी से पुलिस ने सबूत जुटाए और वीडिओ फुटेज की जांच करने के बाद 1200 पेज के चार्जसीट दर्ज की है. अब ज्यादा दिन ये देशद्रोही खुली हवा में सांस नहीं ले सकते है. जैसे ही घटना पर सुनवाई शुरू होंगी. आरोपी जेल के अंदर होंगे.
अभी धूम ले मुचलके पर खुब. ससुराल जाने से अब कोइ रोक नहीं सकता है. देखा जाये तो बहुत लोग संदेह करते थे, उनका मानना था कि कन्हैया देशद्रोही है, तो बाहर क्यू है? प्रशाशन और पुलिस मोदी जी के नियंत्रण में है, तो पकड़ों जेल में डालो. उन लोगों को पता होना चाहिए था, भारतीय संविधान में कार्यपालिका सरकार के हाथ में है, न्यायपालिका नहीं. न्याय, भारत में 20-22 साल से पहले संभव नहीं. अभी तो मामला दर्ज है. बिहार के थेथर नेता चाराचोर लालू यादव लगभग 20 साल बाद जेल पहुचे ऐसे ही ये सभी आरोपी शैन: शैन: जेल में होंगे.
सबूत : दिल्ली पुलिस द्वारा कोर्ट को सौपे गये है-
1. घटना की रात (9 फ़रवरी) JNU में कन्हैया थे (गवाही, वहां उपस्थित छात्रों और सिक्युरिटी गार्ड ने दी)
2. उमर खालिद और कन्हैया बात की कॉल रिकॉर्ड
3. SFSC के दौरान 13 वीडिओ फुटेज सही पाये गये है, (इसमें भारत के टुकड़े के नारे लगाते आरोपी दिखे है.)
4. कन्हैया का फ़ोन लोकेशन, घटना स्थल पर पाया गया.
5. 90 लोगों की गवाही, कन्हैया के विरुद्ध.
6. JNU के गार्ड और चौकीदार की गवाही
7. उमर ख़ालिद के हैंड राइटिंग में कार्यक्रम की अनुमति की परफार्मा.
8. कुछ छात्रों के जाली हस्त्ताक्षर.
के साथ और कई तथ्य दिल्ली पुलिस को बरामद हुई है, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट दायर की है.

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