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गुरुवार, 16 जनवरी 2020

सेवा बस्ती में RSS ने मनाया मकर संक्रांति

मकर संक्रांति के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक 
संघ ने सेवा बस्ती में दलित, पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जनजातिओं और 2008 के भीषण कोशी बाढ़ के बाद अपना घर-बाड़, जमीन संपति को छोड़कर पुनर्वास में निवास कर रहे। उन सभी अभावग्रस्त समाज के बीच समरसता उत्सव के रूप में मकर संक्रांति को मनाया। इस अवसर पर आरएसएस के सुपौल जिले के सहसंचालक मान्यवर संतोष अग्रवाल जी उपस्थित रहे। जिले के कार्यवाह श्रीमान आदित्य झा जी, सेवा प्रमुख राजेन्द्र जी, सहसेवा प्रमुख रामनरेश कौशिकी जी, जिला बौद्धिक प्रमुख बालकृष्ण जी, जिला महाविद्यालयिन प्रमुख संजीव कुमार सोनू, नगर कार्यवाह श्रीमान विकास जी, संपर्क प्रमुख मणिकांत श्रवण जी, व्यवस्था प्रमुख रजनीश जी, बाल प्रमुख विवेक जी और नगर के स्वयंसेवक बन्धु उपस्थित रहें। मकर सक्रांति उत्सव संघ के छः प्रमुख उत्सवों में एक है। संघ इसे समरसता उत्सव के तौर पर अपने स्थापना के बाद से ही मानता आ रहा है। मुख्यरूप से संघ इसे अस्पृश्यता के विरूद्ध सामाजिक क्रंति के रूप में मानता है। ऐसे वंचित समाज जिसे समाज ने वर्षों के अछूत कह के उनका मानभंग किया, उनका तिरस्कार किया हो, संघ ऐसे वंचितों के बीच मकर संक्रांति जैसे कई कार्यक्रम एवम उत्सवों का आयोजन करता है। संघ के सभी स्वयंसेवक चाहे वो किसी भी वर्ग के हो, सहज समर्पित और उत्साहपूर्वक बिना किसी पूर्वाग्रह के इसमें भाग लेते है। अब तो संघ के प्रयास से समाज के सज्जन पुरुष भी ऐसे उत्सवों, कार्यक्रमों के माध्यम से सेवा को स्वीकार करके उनके तरफ हाथ बढ़ाना शुरू किया। इसके पीछे संघ के स्वयंसेवक तपस्या रही है। शाखा के माध्यम से पहले खेल-खेल में संघ के स्वयंसेवक पक्का हिन्दू बने। जिनका ध्येय हिन्दू धर्म, हिन्दू राष्ट्र और हिन्दू समाज का सर्वांगीण विकास रहा है। उन स्वयंसेवकों ने अपने आचरण व्यवहार कृतत्व से समाज में एक विमर्श को जन्म दिया। जिसने आज इस समाज विरोधी अस्पृश्यता को बहुत हद तक समाप्त कर दिया है। इस बार भी संघ के सुपौल नगर के स्वयंसेवकों ने मकर संक्रांति उत्सव के लिए ऐसे ही बस्ती का चयन किया जहां वंचित समाज की बहुलता थी,अमठो ख़रेल पुर्नवास और झकराही। झकराही में यह कार्यक्रम सुबह 8:30 से प्रारंभ हुआ और अमठो में 2:00 बजे से। अमठो में जिले से सेवा प्रमुख राजेन्द्र जी ने कहां कि मकर संक्रांति पर्व हिन्दू समाज की मूर्खता नहीं, दुनिया को अपने महान धर्म की ज्ञान शक्ति, वैज्ञानिकता का एक परिचय है। सूर्य मकर राशि में प्रवेश कर रहा। यह बात हजारों वर्ष पहले भारतीय मनीषियों ने बताया दिया था, जबकि कुछ वर्ष पहले दुनिया को यह ज्ञान हुआ। उन्होंने ये भी कहा इस पर्व को हिन्दू समाज दुनिया के चाहे किसी भी कोने में निवास करता हो बड़े हर्षोल्लास से मनाता है। तिल और गुड़ हमारे समाज के सामाजिक एकता बंधुत्व का परिचय है। यह परिचय है, सम्पूर्ण हिन्दू एक है। लाख विविधता के बावजूद एकता के सूत में ऐसा बँधा है जिसके बंधन को हजार वर्षों तक विदेशी शक्तियों ने काटने का प्रयास किया, किन्तु असफल रहा। हम सामज से शिक्षित लोग, सज्जन लोग आज ऐसे बस्तियों में जहाँ राम और रोटी एक साथ रहते है, नहीं पहुंचे, उनको गले नहीं लगाए तो वो उदासीन हो जाएंगे फिर समाज बांटने की संभावनाएं बढ़ सकती है। क्यों कि आज विदेशी ताकते ऐसे लोगों के बीच धन बल छल से हिन्दू समाज से अलग करने में लगी है। इसलिए हमनें और शक्ति से इनके बीच अपना विस्तार करना होगा। इससे संपर्क करना होगा। उन्होंने ने ये भी कहा आज के उत्सव से ग्रामीणों में संघ को लेकर एक आशा का स्वरूप का दिखा है हम इसे हर सम्भव पूरा करेंगे। 
भारत माता की जय!

रविवार, 15 दिसंबर 2019

CAB को लेकर साजिश; मीडिया डरी हुई


Jitesh kumar

Image result for CONGRESS पहले जिहादियों, बंगलादेशी और अब कांग्रेसियों का डर| सभी प्रकार के संवैधानिक प्रकिया के बावजूद महामहीम राष्ट्रिपति के हस्ताक्षर होने के उपरांत नागरिकता संशोधन बिल पास हुआ है| राज्यसभा में विधेयक के पक्ष में 125 जबकि विपक्ष में 99 वोट पड़े है| गृहमंत्री अमित साह ने राज्यसभा में विधेयक को पेश किया, जिस पर 6 घंटे बहस के बाद अमित साह ने सदन में विधेयक से संबंधित जवाब दिये| इसके बावजूद राज्यस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार पार्टी के हाईकमान का आदेश मानेंगे| क्या सोनीया गाँधी और राहुल गाँधी का निर्णय देश के संविधान से बड़ा है? इतने बड़े संविधान विरोधी मुद्दे को मीडिया दबा रही है, कारण क्या हो सकता है दलाली या डर? कुछ मीडिया संस्थानों को छोड़कर किसी ने CAB के बारे में सही जानकारी जनता को नहीं दिया है ये मीडिया घराने डिबेट के नाम पर देश को गुमराह कर रहें है| कानून की जानकारी रखने वाले बुद्दिजीवी, प्रोफ़ेसर, वकील, जज से इसके बारे में वास्तविक जानकारी साझा करनी चाहिए जिससे बिल के बारे में जनता को ठीक जानकारी मिले| किन्तु TRP और राजनितिक के चक्कर में डिबेट के नाम पर देश में मतभेद के बीज बोये जा रहे है| किसी ख़ास घटना पर मीडिया का हो-हल्ला और किसी घटना पर चुप्पी?


शनिवार, 16 नवंबर 2019

साध्वी प्रज्ञा का जीवन

जितेश कुमार
बीते लोकसभा चुनाव, 2019 में मैं भोपाल था। तब मैंने लोकसभा चुनाव में सोशल मीडिया, मीडिया संपर्क तथा कई नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से चुनाव प्रचार को करीब से देखा, उसमें भाग लिया। साध्वी प्रज्ञा दीदी के चुनाव प्रचार में  उनके साथ प्रचार में शामिल रहा। मैं देख रहा था कि वैसे तो भोपाल भारत का भौगोलिक केंद्र पहले से ही था परंतु साध्वी प्रज्ञा के चुनाव में उतरने से भोपाल भारतीय लोकतंत्र के निर्णायक जनादेश का केंद्र बिंदु बन गया है।   
भगवा आतंक तथा हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों के जनक, आतंकी को अफजल जी, मौलाना जी पुकारने वाले, उसकी हत्या पर आंसू बहाने वाले कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव दिग्विजय सिंह चुनावी मैदान में जैसे उतरे। साध्वी प्रज्ञा ने राजनीति में उतरने में देर नहीं की। जिस प्रकार वर्ष 2008 में मालेगांव धमाका में उनको फंसाया गया और घोर यातनाएं दी गई।
इन सबके पीछे दिग्विजय सिंह का हाथ रहा था। ऐसे में साध्वी प्रज्ञा लोकसभा क्षेत्र भोपाल से भाजपा की प्रत्याशी के रूप में चुनाव में खड़ी हुई तो देश-दुनियां के मीडिया, नेता, यहां तक की आम जनता ने इसे चुनाव मात्र नहीं समझा, यह तो धर्म युद्ध था। हिंदुओं को आतंकी कहने वाले दिग्गी के सामने सनातनधर्म की सन्याशनी चुनाव लड़ रही थी और यह तय था कि साध्वी प्रज्ञा के राजनीति में उतरने से केवल भोपाल ही नहीं अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष में राजनीति का परिष्करण एवं परिमार्जन होने जा रहा था। 
भिंड जिले की लहार तहसील की रहने वाली प्रज्ञा सिंह ठाकुर का जन्म 2 फरवरी, 1970 को मध्यप्रदेश के दतिया जिले में हुआ था। उनके पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे। यही कारण था कि बाल्यकाल से ही प्रज्ञा का रुझान राष्ट्र और समाज कार्य की ओर रहा। सामाजिक संवेदनशीलता उन्हें अपने सामाजिक दायित्व के प्रति सजग, सचेत और संकल्पित करती रहीं। वह किसी न किसी रूप में समाज को अपना योगदान देती रहीं। अल्पआयु से ही उनकी लेखनी से कविताएं और गीत फूटने लगे। उनकी रचनाओं के केंद्र में राष्ट्र ही रहता था। सनातनी मूल्यों ने उनके व्यक्तित्व का श्रृंगार किया। वे वास्तव में अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति हैं। वर्ष 1987 में जब वह नवमीं कक्षा में थी तब उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की सदस्यता प्राप्त की लगभग 15 वर्षों तक सक्रिय रहीं। प्रारंभिक सदस्यता के बाद साध्वी शीघ्र ही नगर इकाई की प्रमुख बन गई फिर जिला इकाई और उसके पश्चात पूर्णकालिक के रूप में विदिशा और भिंड की विस्तारक रही। बाद में भोपाल और उज्जैन से संगठन मंत्री रही। उनके कार्यों को देखते हुये। कुछ ही वर्षों में उन्हें अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में स्थान मिला। दुर्गा वाहिनी में भी उनकी सक्रिय भूमिका रहीं। इसी दौरान उन्होंने उज्जैन में वर्ष 1996 में प्रज्ञा उत्क्रांत सामाजिक संस्थान की स्थापना की और इसके माध्यम से परिवारिक विवादों में मध्यस्थता करते हुए समस्याओं का निराकरण किया। भारतीय संस्कृति में दृढ़ आस्था होने के कारण वो समझने और समझाने लगी कि वर्तमान परिवारिक विघटन और विखंडन के मुख्य कारण व कारण क्या है? उनकी सेवा कार्य का शनै: शनै: विस्तार होता गया। उसमें नये आयाम जुड़ते गये। वर्ष 1998 में उन्होंने भिंड जिले में जय वंदेमातरम सामाजिक संस्थान की स्थापना की और उसकी राष्ट्रीय अध्यक्षा रहीं। खेल में उनकी रुचि बचपन से ही प्रगाढ़ रही। कालांतर में वे कबड्डी की स्टेट प्लेयर बनी और आत्मरक्षा के आशय से उन्होंने कराटे की शिक्षा प्राप्त की और ब्लैकबेल्ट बनी। उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए भी काम किया। गृहनगर लहार में छात्राओं के लिए अलग से सेंटर कॉलेज और महाविद्यालय बने इसके लिए उन्होंने वर्ष 1990 में सफल जनान्दोलन किया और सरकार से स्वीकृति प्राप्त कर उन्हें खुलवाया। 
राष्ट्रीय सेविका समिति की सदस्यता के रूप में उन्होंने चुनाव संबंधित कार्य में भी अपना कौशल दिखाया। वर्ष 2002 के गुजरात विधानसभा चुनाव में उनकी सक्रिय भूमिका को सराहा गया। उन्होंने संकल्प लिया और अपने समिति संसाधनों से वे सश्रम सेवा कार्य में जुट गई। सेवा से मिलने वाले आनंद की अनुभूति व्यसनादि से अधिक मादक होती है। समय के साथ सेवा ही सेवक का स्वभाव बन जाता है। सेवा की यात्रा में स्वत्: दुर्लभ मनीष संत मिलने लगते हैं और सेवा कार्य के आयाम विकसित होने लगते हैं। वर्ष 2007 में ऐसा ही हुआ अवसर था अर्धकुंभ का और स्नान प्रयागराज। जूनागढ़ अखाड़े के महामंडलेश्वर परमपूज्य स्वामी अवधेशानंदगिरी जी महाराज से उन्होंने संन्यास की दीक्षा ली और पूर्ण रूप से सन्यासी जीवन में प्रवर्त हो गई और साध्वी प्रज्ञा बन गई। 
संघ के प्रभाव तथा अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के अनुभवों से साध्वी का आत्मविश्वास और दृढ़ होता गया। उन्हें लगने लगा कि राष्ट्रहित में अच्छा कार्य करने की आवश्यकता तो है ही साथ ही  असीम संभावनाएं भी है और वे उस पथ पर बढ़ चली। कभी सामूहिक रक्तदान, कभी गौसेवा के प्रकल्प तो कभी महिला सुरक्षा के उपकरण। वे धीरे-धीरे आयुर्वेद, योग, ध्यान और अध्यात्म के रहस्य व उनसे मिलने वाली चमत्कारिक लाभों से भी समाज को जोड़ने का प्रयास करने लगी। 
साध्वी प्रज्ञा एक प्रखर वक्ता थी जब वह राष्ट्रवाद और समाज की कुरीतियों पर अपना मंतव्य मंच से व्यक्त करती थी। तो वहां बैठे लोगों के हृदय में क्रांति की ज्वाला भड़क उठती थी। धीरे-धीरे साध्वी प्रज्ञा हिंदुत्व और राष्ट्रवाद के साथ-साथ महिला की भी ब्रांड एमेस्टर बन गई। और यह बात कुछ तथाकथित ढोंगी लोगों को रास नहीं आया। 
यही कारण था कि वर्ष 2008 में एक प्रायोजित षड्यंत्र के तहत मालेगांव मस्जिद में हुये बम विस्फोट में उनका नाम जोड़ा गया। कुछ कुत्सित राजनीतिज्ञों ने अपने आकाओं के निर्देश पर राष्ट्रद्रोह का बिगुल फूंक दिया। उस ह्रदय विदारक कालखंड की यातनाएं एवं प्रताड़नाओं के स्मरण से ही आंसू टपकने लगते हैं। साध्वी प्रज्ञा को तुरंत स्पष्ट हो गया कि देश और सनातन धर्म के शत्रुओं ने उन्हें मोहरा बनाया है। स्वतंत्र भारत के इतिहास में शांति प्रिय हिंदू समाज पर सबसे बड़ा हमला बोला गया था। गद्दार, हिंदू समाज पर लांछन लगा रहे थे। गद्दारों के सरगना ने तो भगवा आतंक और हिंदू आतंकवाद जैसे अपशब्दों से भारत भूमि और हिंदू धर्म को अपूर्णक्षति पहुंचाने का अक्षम्य अपराध किया था। साध्वी प्रज्ञा को तोड़ने के लिए उन्हें जेल में भयंकर यातनाएं दी गई। ज्ञात भारत के इतिहास में जिस प्रकार से जेल में साध्वी प्रज्ञा को यातनाएँ दी गई, इसका कोई दूसरा इतिहास नहीं। जेल में कई पुलिसकर्मी एकसाथ मिलकर उनको बेल्ट और जूते से तब तक मरते रहते थे जब तक वो बेहोश नहीं हो जाती थी। होश में लाने के लिए उन पर गर्म पानी फेंका जाता था फिर वही बेल्ट, जूतों यहां तक कि सिगरेट से उनके शरीर को जगह-जगह जलाया जाता था, उनको उठाकर जेल के दीवारों पर फेंका जाता था। उन्होंने बताया कि इसी बीच जेल एक दिन उनसे मिलने ढोंगी सन्यासी जिसकी आजकल अत्र-तत्र, सर्वत्र पिटाई होती रहती है, स्वामी अग्निवेश आये। उन्होंने कहा कि आप मालेगांव बम धमाके में अपना जुर्म कबूल करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख के इशारों पर ऐसा किया यह बयान दे। जेल में आपसे कोई मारपीट नहीं होगी। उल्टे आपको सभी प्रकार से सुख-सुविधा दिया जायेगा। जल्द ही आपकी रिहाई हो जायेगी। परंतु बचपन से ही साध्वी प्रज्ञा में राष्ट्रवाद की भावना कूट-कूट कर भरी थी। वो हिंदुत्व को कैसे लांक्षित कर सकती थी। उन्होंने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया और सहज ही अपने लिए कष्ट के दिन मांग लिए। लेकिन समय ने करवट ली। 2014 के चुनाव ने देश के राजनीति को बदल दिया। नरेंद्र मोदी की सरकार आयी। उस समय गृहमंत्री रहे राजनाथ सिंह ने साध्वी प्रज्ञा पर लगे आरोप की जांच के बाद उनको दोषी नहीं साबित होने के स्थिति में उन्हें छोड़ दिया गया। इस अग्नि परीक्षा से साध्वी प्रज्ञा बेदाग बाहर निकल गई। 
जब भोपाल से दिग्विजय सिंह चुनाव में उतरे तो विरुद्ध में साध्वी प्रज्ञा सामने खड़ी थी। उन्हें अपार जनसमर्थन मिला। साध्वी प्रज्ञा के चुनाव में उतरने से भोपाल लोकसभा सीट ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। चुनाव प्रचार के दौरान भोपाल में मैंने जो दृश्य देखे। सच में यह धर्म और पाप की लड़ाई थी। सौभाग्य से साध्वी प्रज्ञा को प्रचंड बहुमत से विजयी मिली।

सोमवार, 14 अक्टूबर 2019

गांधी मैदान में आरएसएस ने शरद पूर्णिमा उत्सव मनाया

जितेश कुमार 


संघ का कोई अपना उत्सव नहीं, हिंदू समाज का जो उत्सव है वही संघ का उत्सव है। संघ के स्वयंसेवक समाज के सज्जन व्यक्तियों के साथ सामाजिक, सांस्कृतिक उत्सव मनाते रहते हैं।  इसी निमित्त कल शरद पूर्णिमा के अवसर पर सुपौल के गांधी मैदान
  रात्रि 7:00 से 8:00 बजे तक आरएसएस के स्वयंसेवकों ने शरद पूर्णिमा का उत्सव मनाया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से आरएसएस के जिला सहसंचालक श्रीमान संतोष अग्रवाल और अन्य स्वयंसेवक उपस्थित रहे। 1 घंटे की शाखा में कबड्डी, गणेश छू, महापुरुषों की माला, रामायण और महाभारत के पात्र, राज्य-राजधानी, सांस्कृतिक स्थल के नाम आदि प्रकार के खेल हुए। तत्पश्चात नगर विस्तारक जितेश कुमार ने शरद पूर्णिमा के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व के कुछ बिंदु सबों के बीच रखा। संघ का उद्देश्य भारत के सर्वांगीण विकास करके विश्व गुरु बनाना है। अतः सभी स्वयंसेवकों को अपने मूल्यवान समय का कुछ हिस्सा संघ कार्य के लिए लगाना चाहिए। इस आग्रह के साथ बैद्धिक समाप्त की। उसके बाद शाखा  विकिर और प्रसाद के रूप में खीर भोज के बाद सभी स्वयंसेवक अपने घर लौट गये। कार्यक्रम में जिला सहकार्यवाह रंजन, जिला व्यवस्था प्रमुख  विकास,जिला महाविद्यालयिन प्रमुख संजीव सोनू, नगर कार्यवाह श्रवण, नगर सहकार्यवाह सुमित, नगर शारीरिक प्रमुख मणिकांत श्रवण,अन्य स्वयंसेवक उपस्थित थे।

शनिवार, 4 मई 2019

कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान

भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ| इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है| तो मुझे भी संविधान के धारा 19 का प्रयोग करना चाहिए ऐसा मुझे कल सपने में बाबा साहब भीमराव अम्बेडकर ने कहा| उन्होंने कहा- “शांत मत बैठो आने वाली पीढ़ी गलियां देगी| आवाज उठाने वाले इतिहास में अमर हो जाते है और शांत होकर देखने वाले की मृत्यु होती है, इनके 13वीं के बाद स्वयं के घर के लोग ही भूल जाते है|” उन्होंने ने ये भी कहा कि देश और समाज में उठ रही प्रत्येक समसामयिक मुद्दे पर अपनी राय और अपनी बात रखो| कोई नहीं पढ़े और सुने तो भी पागलों की तरह लिखते बोलते रहो| अपने ज्ञान्द्रियों से जो नजर आ रहा है उसे अपनी ह्रदय की सच्चाई से सभी के बीच रखो|
kamalnath
  मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार के लगभग तीन माह बीत गये है| अभी कुछ भी उटपटांग भविष्यवाणी करना ठीक नहीं है| इतना तो कहने कि स्थिति है ही कि बीते तीन महीने की कमलनाथ सरकार से भय का वातावरण निर्मित हुआ है| लेकिन यह भय गुंडों, दरिंदों, बदमाशों, भ्रष्टाचारियों में कतई नहीं है| भोपाल और इंदौर जैसे सुरक्षित शहरों में भी आराजकता और गुंडागर्दी बढे है| अपहरण और बलात्कार के भी मामले पहले से ज्यादा हुए है| लोगों का कहना है कि कर्जमाफ़ी और बेरोजगारी भत्ता के नाम पर मध्यप्रदेश की कांग्रेस की सरकार ने आम जनता को अंगूठा दिखाया है| रोजगार और किसानों की कर्जमाफ़ी के साथ महिला उत्पीडन जैसे विषय विधानसभा चुनाव के केंद्र में थे| ऐसा प्रतीत होता था कमलनाथ युवा जो बेरोजगार है, किसान जो परेशान है और महिलाएं जो असुरक्षित है इनकी सबसे पहले कष्ट हर लेंगे| कर्ज माफ़ी का सिर्फ ढोल पीटा गया है, किसान का कर्ज माफ़ी तो दूर ऐसी स्थिति है कि बोये क्या कटे क्या? पैगम्बर ने कर्जमाफ़ी के नाम पर ऐसा प्रपंच किया है कि बैंक लोन अब देने को तैयार नहीं और किसान कुछ करने की स्थिति में नहीं है? ऐसे में कमलनाथ के गृह क्षेत्र छिंदवाड़ा में किसान की आत्महत्या ने सरकार की धोखाधड़ी की पोल खोल दी है| कर्ज माफ़ी हुई है और स्थिति पहले से बेहतर है तो आत्महत्याएं क्यों नहीं रुक रही है? अपने आप को किसानप्रेमी सरकार की उपाधि देने वाले, सत्ता संभालते ही युरियां खा गये और युरियां मांगने गये किसान को डंडे दिखाये गये| दुकान के पीछे से दुगुना-तिगुना दाम देकर युरियां कुछ किसानों को नसीब हुई है| यह काण्ड मीडिया के माध्यम से लोगों ने देखा है और भुलाया भी नहीं है| दबे-कुचले वर्ग जो कल तक कांग्रेस की हवाहवाई वादे पर मोहीत थे| आज वही लोग भड़के हुए है, ऐसा इसलिए क्योकि हाल में सीबीआई के छापे में जप्त 281 करोड़ की अवैध सम्पति ने प्रदेश की सरकार को कलंकित किया है| सरकार इस कदम से इतना बौखलाये हुये है कि रोज अखबार में खबर छपती है ‘अधिकारीयों को देखेंगे’, कोई कहता है ‘जूता साफ करवाएंगे’ और तो और सरकार ने पार्टी के सदस्यों से ऐसे अधिकारी का लिस्ट भी तैयार करने को कहा है, चुनाव के बाद इनसे निपटा जायेंगा| जनता मौन रूप धारण किये समय के इन्जार में है या कमलनाथ पर भरोसा करके शांत है यह तो वक्त जानता है| फिलहाल तो माहौल तीन महीने की रिपोर्ट से असंतुष्ट और भड़की दिखाती है|
यह तो बात किसान, युवा और मजदूर की है| कर्मचारी, अफसर, शिक्षक और प्रोफेसर के साथ एक बहुत बड़ा बुद्धिजीवी वर्ग ने सरकार के रवैये से नाराजगी जाहिर की है| उनका कहना है कि कमलनाथ ने प्रदेश की स्थति (गरीबी, किसानी, रोजगार, सुरक्षा, शिक्षा और अपने संकल्प पत्र) से मुंह मोड़ लिया है| बदले की राजनीति में हाथ धोकर पड़े हुये है प्रदेश में अपने से विपरीत विचार के विरुद्ध साम, दाम, दंड और भेद किसी भी तरीके से उसे समाप्त करना ही अपना लक्ष्य मान लिया है| प्रशासनिक अधिकारीयों के स्थानांतरण के ताबतोड़ निर्णय के साथ तमाम शैक्षणिक संस्थानों के साथ ही माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी में सरकार के द्वारा और मुख्यमंत्री के इशारे पर जो कुछ बीते महीने हुआ है वह बेहद ओछी और नीचता कर प्रमाण है| प्रदेश सरकार को सोचना चाहिए माखनलाल यूनिवर्सिटी पुरे भारत में ही नहीं समूचे एशियाई देशों में अपने योग्यता से लोकप्रियता और पहचान हासिल की है| ऐसे संस्थानों में इस प्रकार की राजनीतिक उथल-पुथल अशोभनीय है| प्रदेश और देश की जनता इसे ठीक नहीं मानती है कि कोई दल अपने सत्ता के में मद में शिक्षण संस्थाओं को भंडोल करे| पूर्व की सरकार के खामियों की वजह से कुछ अवगुण उत्पन्न हुए है या भ्रष्टाचार के ही मामले प्रकाश में आये है तो वैधानिक जाँच होनी चाहिए ऐसे प्रतिशोध की भावना से जल्दीबाजी में नहीं, माखनलाल यूनिवर्सिटी प्रदेश की शान है ऐसे में इसे कलंकित करने जो प्रयास वर्तमान की कमलनाथ सरकार ने की है| इससे बुद्धिजीवियों में ठीक सन्देश नहीं पहुंचा है| बातचीत में एक विद्वान ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र में सत्ता में विराजमान पार्टी को भी भारतीय संविधान की निहित प्रक्रियाओं का अनुकरण कारण पड़ता है, उन्होंने उदाहरण देते हुये कहा कि एक न्यायधीश किसी व्यक्ति को हत्या करते हुये भी देखता है, फिर भी उसे सीधा फंसी की सजा नहीं सुना सकता है, जज को संविधान में निहित प्रक्रियाओं और आरोपी पक्ष के वकील और स्वयं आरोपी के बयान को सुनना होगा और संपूर्ण प्रक्रियाओं की सत्यता के बाद ही निर्णय लेने के कर्तव्य न्यायधीश को है| फिर दो दिन की कमलनाथ सरकार ने कौन-सी संवैधानिक नैतिकता का पालन करके 20 विद्वानों की नियुक्ति रद्द की है और माननीय कुलपति के पद को अपमानित किया है| इसका जवाब कमलनाथ को देना होंगा| अंत में उन्होंने कि तत्काल मुख्यमंत्री क्षमा मांगे और विद्वानों की नियुक्ति करे| अपने घोषणा और वादे को पूरा करे; ना की सत्ता के मद में तानाशाही और अराजकता उत्पन्न करे| जो बीते दिनों गैर-जिम्मेदाराना और बदले की भावना से कमलनाथ सरकार ने कार्य किये है इससे आम जनता काफी नाराज है ऐसे में अब तक की रिपोर्ट से लगता है इस बार लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान है 


गुरुवार, 2 मई 2019

दो सांस्कृतिक नदियाँ शंखिनी-डंकिनी के हत्यारे थे दिग्गी

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शंखिनी नदी का उद्गम दंतेवाडा के नंदिराज शिखर के बैलाडीला से है इसे छत्तीसगढ़ की सर्वाधिक प्रदूषित नदी माना जाता है दंतेवाडा में यह नदी डंकिनी नदी में मिल जाती है  डंकिनी-शंखिनी के संगम पर प्रशिद्ध दंतेश्वरी मंदिर स्थित है महान मंत्रदृष्टा ऋषि अगस्त्य ने दक्षिण की अपनी यात्रा के दौरान दो नदियों को पार किया था इन नदियों को मां के रूप में प्रतिष्ठित किया गया यह नदियाँ स्थानीय समाज में वर्षों से मां गंगा जितनी ही पूजनीय थी इन नदियों को शंखिनी और डंकिनी के नाम से जाना जाता था  ललिता सहस्त्रनामम ( देवी की 1000 स्तुतियों) में देवी मां को शंखीनिंबा स्वरूपिणी कहा जाता है ( अर्थात वह जो शंखनी का रूप धारण करती है) और डंकिनीश्वरी (  अर्थात वह जो डंकिनी नदी का ही देवी स्वरूप है) यह दोनों नदियां छत्तीसगढ़ में बहती थी और वहां के स्थानीय समुदायों के लिए ना सिर्फ पानी की आपूर्ति का महत्वपूर्ण स्रोत थी बल्कि उनकी आजीविका के तमाम संसाधन भी इन्हीं नदियों से जुड़े थे
बात दिग्विजय सिंह के दुसरे कार्यकाल है जब वो अविभाजित मध्यप्रेश (छत्तीसगढ़ सहित) के मुख्यमंत्री थे उस वकत केंद्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों के तहत आने वाले नेशनल मिनिरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनएमडीसी) ने इस इलाके में खनन से जुड़ी गतिविधियां शुरू की थी  इन्हें बैलाडीला लौह अयस्क खदान, बछेली, किरनदुल और द्रोणिमलै की खदान के नाम से जाना जाता है इन खदानों से बड़े पैमाने पर निकलने वाले मलबे को नदी के किनारे पर फेंका जाता रहा इस पूरे प्रोजेक्ट को तात्कालिक मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (2001-02) की मंजूरी हासिल थी  बतौर मुख्यमंत्री इस राजनेता ने नदियों को बचाने के लिए कोई भी कदम नहीं उठाया था खदानों से निकले विषैले तत्वों की वजह से इन नदियों का पानी धीरे-धीरे जहरीला होता गया स्थानीय निवासियों ने इसे लेकर काफी विरोध प्रदर्शन किया लेकिन राज्य सरकार में उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई जिसके बाद शांत विद्रोह प्रदर्शन हिंसक विद्रोह में तब्दील हो गए और इनकी तापिश आज भी इस इलाके को झुलसा  रही है 
 मौरीन नंदिनी मिश्रा, डाउन अर्थ सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट स्टडी ने 31 दिसंबर 2006 को रिपोर्ट लिखी 
छत्तीसगढ़ में बहने वाली शंखिनी और डंकिनी नदी प्रदूषण की वजह से दम तोड़ रही है स्थिति को सुधारने के लिए कागजों में योजनाएं बनी लेकिन उसमें एक भी अंजाम तक नहीं पहुंची 2010 में केंद्र सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रकोष्ठ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा खदानों के अंधाधुंध दोहन और उससे निकलने वाली जहरीले तत्व और अपशिष्ट पदार्थों को नदियों में बहाने की वजह से यह नदियां बुरी तरह प्रभावित हुई है यही नहीं इनके पानी का उपयोग करने की वजह से बैलाडीला के आसपास की 15000 हेक्टेयर से भी ज्यादा कृषि और वन भूमि भी बर्बाद हो गई है
 इलाके के तकरीबन एक सौ गांवों के लोग अपने रोजमर्रा के जीवन में इन्हीं प्रदूषित और जहरीली हो चुकी शंखिनी-डंकिनी नदी के पानी का इस्तेमाल करते हैं 4 साल बाद तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार ने माना कि शंखिनी डंकिनी नदियों के बहाव क्षेत्र में आने वाले 65 गांव पानी के पूरी तरह प्रदूषित होने की वजह से प्रभावित है यही नहीं सरकार के एसएमडीसी (नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) को आदेश दिया कि वह गांव में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए 200 कुएं खोदे आदेशानुसार काम चलाऊ कुएँ खोदे दिए गए लेकिन किसी भी कुएं को मानक के मुताबिक नहीं खोदा गया लिहाजा वर्तमान में इन में एक भी  कुऐ काम के लायक नहीं बचा है जाहिर सी बात है अधिकारियों में पेयजल को लेकर जरा भी चिंता नहीं थी
 तमाम दूसरे आंदोलन की तरह इन बेचारे गांव वालों के लिए एक भी मेघा पाटकर, अरुंधति, अरुणा राय, प्रिया पिल्लई या हर्ष मंदार सामने नहीं आये इसी तरह दूसरे मानवाधिकार समाजवादी कार्यकर्ता और वकील इन गरीबों की मदद के लिए उनकी आवाज नहीं बने नहीं इन को किसी तरह की फंडिंग ही मिल सकी जाहिर तौर पर ऐसा करने से इनकी रोजी-रोटी जो खतरे में पड़ जाती भाड़ में जाये लोगों की जिंदगी भाड़ में जाए मानवाधिकार अपने को तो रोटी सेंकनी है वह भी सेकुलर रोटी
 छत्तीसगढ़ के इस इलाके में नक्सल समस्या को और गंभीर बनाने में मनमाने तरीके से चलाएंगे इस प्रोजेक्ट का बड़ा हाथ है शिक्षाविद बेला भाटिया भी नक्सल प्रभावित इलाके में सक्रिय मानवाधिकार कार्यकर्ता में से एक हैं बेला प्रदेश और केंद्र की सरकार (दोनों जगहों पर भाजपा का काबिज थी) पर अपने तीखे हमले और आक्षेपों के लिए जानी जाती है बेला का तर्क है कि मानव अधिकारों के हनन और लोगों के शोषण की वजह से छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद जैसी समस्याओं के लिए मुफीद जमीन तैयार हुई बेला के पति ज्यां पाँल द्रेज यूपीए सरकार के वक्त राष्ट्रीय सलाहकार समिति के सदस्य रह चुके हैं इस समिति को काफी प्रभावशाली माना जाता है लेकिन अपनी पत्नी के इस तर्क के बावजूद उन्होंने इस दिशा में कुछ भी नहीं किया दिग्गी राज में कैसे दो सांस्कृतिक नदियाँ बर्बाद हो गई  कैसे वहां के लोगों की कृषि भूमि ही नहीं बल्कि रोजी-रोटी के साधन छीन गए कैसे लोगों को नदियों के जहरीले पानी का उपयोग करने से कई संक्रमण रोग हुए और आज भी जन्मजात उनसे पीढ़ियों में फ़ैल रहे है 
सवाल उठता है दोनों नदियाँ डंकिनी-शंखिनी को उस समाय की शासन जिसके मुखियां दिग्विजय सिंह थे क्यों नहीं बचाया कही इसलिए तो नहीं की दोनों नदियाँ का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है और दिग्विजय ऐसा करते तो उन्होंने जो हिन्दू धर्म से तटस्थता की थी भंग हो जाती देश के सेकुलर नेता उनसे नाराज हो जाते सेकुलरों की सभा में उनकी फजीयत होती दिग्गी के खुद को सेकुलर साबित करने की कीमत ने दो एतिहासिक सांस्कृतिक और छत्तीसगढ़ के बैलाडीला से निकालने वाली गंगा रूपी नदियों को जहरीला किया है गरीबों से पानी तक छीन लिया उनको प्रदूषित जल पानी पीकर मरने के लिए छोड़ दिया कृषिभूमि नष्ट की आर्थिक बाजार ध्वस्त किया और ऐसे वहां की गरीबी शैन: शैन: दिग्विजय की शासन में दूर हुई क्या विकास मॉडल था 

रविवार, 28 अप्रैल 2019

कहानी महिलाओं के सम्मान और कांग्रेस के कुख्यात विख्यात नेतागण की

जितेश कुमार 
कांग्रेस पार्टी महिलाओं को कितना सम्मान देती है इसका प्रमाण कुछ दिन पहले मथुरा की सभा में पूर्व कांग्रेस की प्रवक्ता प्रियंका चतुर्वेदी के साथ की गई उत्कृष्ट व्यावहारिकता से झलकता है दरअसल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अभद्र व्यवहार और उनके खिलाफ पार्टी की ओर से उचित कार्रवाई नहीं किए जाने से नाराज प्रियंका चतुर्वेदी ने कांग्रेस से रिश्ता तोड़ दिया था यह कोई पहली घटना कांग्रेस पार्टी की नहीं है ऐसी घटनायें और अभद्र टिप्पणियों की तो एक लम्बी लिस्ट तैयार है कांग्रेस की महासचिव प्रियंका वाड्रा तक कांग्रेसी
कार्यकर्त्ताअों की अभद्रता की शिकार झेल चुकी है इतना ही नहीं कांग्रस दफ्तर में काम कर रही एक लड़की ने अपने साथ छेड़छाड़  के आरोप लगाये और राहुल गाँधी को पत्र लिखीं, इसके बावजूद राहुल गाँधी चुपी साधे थे इसके बाद लड़की ने पुलिस से गुहार लगाई और बाद में दोषी को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया महिलाओं के प्रति संवेदनहीनता के कई उदहारण प्रकाश में आये है इसके साथ महिलाओं के साथ बलात्कार की भी कई घटना के आरोप में कोंग्रेस के नेताओं पर उंगली उठाये गए है ऐसे में एक बड़ा सवाल है कांग्रेस सरकार में महिलाओं की सुरक्षा कौन करेगा? महिलाओं को अवसर कौन देगा  मध्यप्रदश के मुख्यमंत्री महिलाओं को सजावटी सामान कहते है तो पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के महासचिव दिग्विजय सिंह अपने ही सांसद मीनाक्षी नटराजन को टंच माल कहते है     
राहुल गाँधी ने  10 अक्तूबर 2017 को गुजरात के वड़ोदरा में आरएसएस को घेरने के प्रयास में मंच से अमर्यादित बयान दिया था राहुल गाँधी ने संघ पर आरोप लगते हुए कहा कि क्या संघ की शाखाओं में महिलाएं छोटे कपड़े (शांर्ट्स) पहने दिखती है इस बयान पर देश भर की कई महिलाओं ने आपत्ति जताई थी दूसरी घटना  मुंबई 15 अप्रैल 2018 की है कठुआ और उन्नाव बलात्कार के विरोध में कैंडल मार्च निकला गया था इसमें राहुल गाँधी भी मौजूद थे इस मार्च में कांग्रेस के कार्यकर्त्ताओं ने आज तक के रिपोटर मौसमी सिंह के साथ बदसलूकी की| मौसमी सिंह ने रो-रोकर अपने साथ हुये बदसलूकी की जानकारी दी राहुल गाँधी से लिखित शिकायत की| इसके बावजूद राहुल गाँधी चुप थे प्रियंका चतुर्वदी के मामले में भी राहुल गाँधी चुप रहे यह घटनाएँ राहुल गाँधी की ओछी सोच को प्रकट करता है 
दिग्विजय सिंह घटना 27 जुलाई 2013  को इंदौर की एक सभा में अपने ही दल के सांसद मीनाक्षी नटराजन को टंच माल कह कर संबोधित करते है दिग्वियज की दूसरी शादी अमृता राय से हुई है, इसे लेकर भी कई सवाल राजनीति-पत्रकारिता के गलियारों में विचरण करते रहते है कई पत्रकारों ने पुर्व के अखबारों में यहाँ तक लिखा है कि अमृता राय की पहली पति का नाम आनंद राय था शादी के बावजूद दिग्गी का अमृता राय से मिलना जुलना था बात जब मीडिया तक पहुंची तो अमृता राय ने अपने पहले पति से तलाक लेकर दिग्विजय से शादी की| 
कमलनाथ मुख्यमंत्री मप्र ने हाल में विधानसभा चुनाव में महिलाओं को सजावटी सामान कहा था विरोध के बावजूद वो अपने कथनी पर अड़े रहे   
शशि थरूर अपने एक ट्विट के जरिये छिल्लर के मिस वर्ल्ड बनने पर उन्हें चिल्लर कह कर मजाक उड़ाया था थरूर ने 19 नवंबर, 2017 को ट्विट कर लिखा, ‘हमारी मुद्रा का विमुद्रीकरण करना कितनी बड़ी भूल थी! बीजेपी को इस बात का अहसास होना चाहिए कि भारतीय मुद्रा का विश्व भर में वर्चस्व है, देखिए हमारी चिल्लर भी मिस वर्ल्ड बन गई है आपको बात दे की शशि थरूर पर अपने ही पत्नी सुनंदा पुष्कर को मारने का आरोप भी न्यायलय में चल रहा है 
अभिजित मुखर्जी कांग्रेस पार्टी के युवा नेता भी है और कांग्रेस के सांसद और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी  के बेटे भी 28 दिसम्बर 2012 को दिल्ली निर्भया कांड के बाद महिला प्रदर्शनकारियों का मजाक उड़ाते हुए कहा था ये महिलाएं अब प्रदर्शन कर रही है और रात को मेकअप पोतकर पब जाएँगी हालाकिं इस पर उनकी बहन शर्मिष्ठा मुखर्जी ने ही आपत्ति जताई थी इसके बाद इन्होने माफ़ी मांगी 
दामोदर राउत पूर्व मंत्री रह चुके कांग्रेस पार्टी के दामोदर राउत ने अपने ही दल के प्रवक्ता सुलोचना दास पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए कहा था कि मुझे पता है किसे खुश करके आप कांग्रेस की प्रवक्ता बनी हैं 
संजय निरुपम मुंबई से कांग्रेस के जानेमाने नेता है इन्होने केन्द्रीय मंत्री स्मृति रानी को पैसे के लिए ठुमके लगाने वाली कहा था
रेणुका चौधरी बुलंदशहर में एक एक टीवी बहस के दौरान रेप जैसे जघन्य अपराध पर कहा था कि 'रेप इज कॉमन' आपको पता हो की देश के पीएम नरेन्द्र मोदी भी लोकसभा में जब भाषण दे रहे थे तो भाषण को बाधित करने के लिए जोर-जोर से ठहाका लगाकर हंस रही थी कई बार लोकसभा स्पीकर के कहने पर भी नहीं मानी तो प्रधानमंत्री ने इनको ताड़का कह दिया था जिसके बाद टीवी शो में खूब विवाद हुआ
राजाराम पाल कांग्रेस पार्टी के यूपी के प्रदेश उपाध्यक्ष है ने 4 नवंबर 2016 को मीडिया से मुखातिब होते कहा "पार्टी में दलित महिलाओं से कोई भेदभाव नहीं किया जाता है महिलाओं को हमारे घर के अन्दर ही नहीं, बेडरूम तक आने की इजाजत है यहाँ ऐसी कोई महिला नहीं है, जो हमारे बेडरूम तक न आई हो"   
सुभाष चौधरी हरियाणा कांग्रेस के उपाध्यक्ष है महानुभाव पर अक्टूबर2017 में दिल्ली के तुगलक रोड पुलिस स्टेशन पर रेप का मामला दर्ज है इस मामले पर भी राहुल गाँधी ने चुप्पी साध ली तब राहुल कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे
वीरभद्र सिंह हिमाचल प्रदेश के जघन्य गुड़िया रेप कांड पर बयान देते हुए कहा कि ऐसा कोई देश प्रदेश नहीं जहाँ अपराध नहीं होता है 
अहमद पटेल गुजरात कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे अहमद पटेल पर 2005 में शिकायत दर्ज है सेना की अफसर की पत्नी सुनीता सिंह ने पटेल पर बलात्कार के मामले दर्ज कराये है पीड़िता का कहना था कि वह पति की पिटाई से परेशान होकर घर से भाग गई और दिल्ली महिला आयोग में न्याय की गुहार लगाने आई थी राष्ट्रीय महिला आयोग ने उसे नारी निकेतन भेज दिया जहाँ आयोग की सदस्य यास्मीन अवरार उसे अपने साथ घर ले गई इसी के घर में कांगेस नेता अहमद पटेल ने उनके साथ बलात्कार किया 
शादीलाल बन्ना हरियाणा से कांग्रेस पार्टी से राज्यसभा सांसद  27 सितंबर, 2016 दिल्ली में इनके  खिलाफ रेप का यह मामला दर्ज किया गया पीड़ित महिला पेशे से वकील है
एम विंसेंट केरल से कांग्रेस पार्टी के टिकट से जीते विधायक है इन पर 51 वर्षीय महिला के रेप और आत्महत्या के लिए उसकाने का आरोप है इस आरोप में केरल पुलिस ने इनको गिरफ्तार भी किया है
हेमंत कटारे मप्र से कांग्रेस के विधायक के खिलाफ 2 फरवरी 2018 को अपहरण और दुष्कर्म के दो अलग-अलग मामले दर्ज है कटारे के खिलाफ एक महिला और उसकी बेटी प्रयांशु सिंह द्वारा दो पुलिस थानों में केस दर्ज है
ब्रजेश पांडे बिहार कांगेस के प्रदेश उपाध्यक्ष ब्रजेश पांडे पर एक नाबालिग ने यौन शोषण का आरोप लगाया, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था
फारुख चिश्ती, नफीस चिश्ती और अनवर चिश्ती यूथ कांग्रेस अजमेर से फारुख चिश्ती अध्यक्ष, नफीस चिश्ती उपाध्यक्ष और अनवर चिश्ती संयुक्त सचिव थे 26 साल बाद आरोप दर्ज हुआ आरोप है कि इन तीनों दरिन्दे ने मिलकर स्कूल जाते सैकड़ों हिन्दू बच्चियों का यौनशोषण किया है मामला उजागर होने के बाद 8 बच्चियों ने आत्महत्या कर ली
अभिषेक मनु सिंघवी 2012 में सेक्स सीडी कांड पहली बार सामने आया था सिंघवी एक महिला वकील से शारीरिक संबंध बनाते हुए दिखाई दे रहे थे साथ ही संघवी महिला को वकील को कह रहे थे कि वे उसे जज बना देंगे 
बाबूलाल नागर 2013 राजस्थान से कांग्रेस के पूर्व मंत्री रहे बाबूलाल पर 35 वर्षीय महिला ने यौन शोषण का आरोप लगया महिला ने कहा कि बाबूलाल नागर सरकारी नौकरी देने नाम पर साझा देकर संबंध बनाये थे 
गोपाल कांडा हरियाणा से कांग्रेस पार्टी के मंत्री रहे कांडा पर 2012 में गीतिका गोपाल शर्मा जो कांडा के MLDR एयरलाइन्स में कार्यरत थी ने बलात्कार के आरोप लगाने के बाद 5 अगस्त 2012 को आत्महत्या कर ली 
नारायण दत्त तिवारी कांग्रेस नेता जिनका राजभवन में ही तीन महिलाओं के साथ सेक्स का वीडियो एक तेलगू चौनल ने ब्रॉडकास्ट कर दिया इससे बाद उन्हें राज्यपाल का पद छोड़ना पड़ा नारायण दत्त तिवारी के खिलाफ एक शख्स ने पिता होने का दावा किया था, जो बाद में DNA टेस्ट में न्यायलय ने सही माना और उन्हें उसे पुत्र मानना पड़ा था 
मदरेणा जी कांग्रेस नेता जिन पर भंवरी देवी के अपहरण, बलात्कार और हत्या करने का आरोप लगा 
ऐसे अनेकों प्रकरण जानकारी में आये है, पुष्टि और प्रकाशन आगे .. 








  

शनिवार, 27 अप्रैल 2019

रविश कुमार को भविष्य मालूम है

'भारत के टुकडे' और 'अफजल को घर से घर पैदा' करने वाले कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र ही है. घटना के तीन वर्ष बाद दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी, 2019 को पटियाला कोर्ट में 1200 पेज के चार्जसीट दर्ज की. चार्जसीट में कुल 46 लोगों  आरोपी है. इसमें 10 लोगों को सीधे तौर पर आरोपी है, कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र
शामिल है. करीब 90 लोगों की गवाही दर्ज की गई है. गवाही चश्मदीद छात्रों और सिक्योरिटी गार्ड में तैनात लोगों की है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है और नारेबाज़ी की 13 वीडियो क्लिप्स भी शामिल की है, इसकी जाँच CFSC ने सही माना है. जैसा की पहले कुछ नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने वीडियो फुटेज को फेंक और एडिटेड बताया था. इसके विपरीत पुलिस के हाथ लगी 13 वीडियो क्लिप्स जाँच में सही पाए गये है. इसमें देशविरोधी नारे लगाते आरोपियों की आवाज़ और चेहरा पहचाना जा सकता है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है| चार्जशीट में यह भी लिखा है कि घटना स्थल पर कन्हैया कुमार की मौजूदगी थी| उसके मोबाईल का लोकेशन इस वक्त जेएनयू में ही पाया गया था, इसकी भी पुष्टि चार्जशीट में की गई है|  
अब सवाल उठता है कि कन्हैया बेगुसरय से चुनाव क्यों लड़ रहे है? कारण साफ है सजा होने से बच सके या सजा की अवधी कम हो जाये| जमानत की सुविधा उपलब्ध हो, जैसे आज गाँधी परिवार के लिए है|
कांग्रेस की प्रताड़ना की शिकार  
जेएनयू के देश विरोधी नारे, भारत के टुकडे करने की घटना के ठीक बाद से अब तक कुछ अनुभवी पत्रकार इसमें रविश कुमार भी शामिल है कन्हैया को निर्दोष ऐसे साबित करने में लगे है जैसे न्यायपालिका से इनकी साठ-गाठ हो| क्या मिथ्या प्रचार करना ही रविश कुमार ने अपना धर्म मान लिया है? रविश जिस प्रकार भोपाल से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बारे में बेबाकी से  बोल रहे है वैसे ही कन्हैया के खिलाफ क्यों नहीं? जब की कन्हैया कुमार को किसी प्रकार की वर्तमान सरकार में शारीरिक या मानशिक प्रताड़ना नहीं भुगतनी पड़ी है| इसके विपरीत साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जेल असहनीय और अकल्पनीय प्रताड़ना के गुजरना पड़ा था| बिना चार्जशीट के 9 वर्षों तक जेल में प्रताड़ित किया| उसकी रीढ़ के हड्डी तक टूटी हुई है, हजारों शारीर पर घाव के निशानी है| दो कदम ठीक से चलाना मुश्किल है इसके बड़ा प्रताड़ना का प्रमाण क्या हो सकता है भला| और प्राईम टाइम में झूठा रिपोर्ट दिखाते है जिसे कांग्रेस के शासन में मनावाधिकार ने प्रकाशित किया था| आज साध्वी प्रज्ञा  भोपाल में पुरे देश की बीच है, क्यों नहीं बोलते मानवाधिकार की रिपोर्ट गलत है? क्योंकि वो हिन्दू धर्म की साध्वी है| अगर ऐसा है तो दोगली पत्रकारिता विदेशी और आतंकी से फंडिग लेने वाले पत्रकर की भाषा ऐसे ही होती है| कन्हैया निर्दोष है और साध्वी प्रज्ञा हिन्दूआतंकी यह न्यायालय से पहले ही तय कर लिया जैसे रविश कुमार को भविष्य मालूम हो| 

जनता की अदालत 




गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

साध्वी नहीं, कटघरे में कांग्रेस और मानवाधिकार की रिपोर्ट

जितेश कुमार
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर लगे आरोप का खंडन भी होगा| पहले मानवाधिकार की रिपोर्ट कितना सच है और कितना झूठ? कुछ पत्रकारों ने मानवाधिकार की रिपोर्ट के सहारे यह सवाल उठाये है कि साध्वी प्रज्ञा के साथ कोई मारपीट नहीं की गई| ऐसे प्रश्न पूछने वाले
पत्रकारों को ईश्वर ने आँख दिया है तो भोपाल आकर आखों देखा साक्षात्कार करों| क्यों की पेपर पर चोट के निशान नहीं, शारीर पर होते है| फिर कांग्रेस की सरकार और देश की न्यायपालिका के पूछो किस आरोप और कौन से साबुत के आधार पर साध्वी प्रज्ञा को 9 वर्ष तक जेल ही नहीं बल्कि अमानवीयता के सभी हद टूट जाये ऐसा कुकृत किया गया| क्यों? मीडिया को पता है फिर भी मौन है| यह स्थति ऐसी है, जैसे माँ दुश्मनों के बीच घिरी हो और बेटा दुश्मन की ताकत के घबराकर दुबक गया हो| 
सनातन (हिन्दू धर्म) का 5000 वर्ष के ज्ञात इतिहास में पहली बार साल 2008  में कांगेस की सरकार में हुए मालेगांव विस्फोट के पीछे हिंदू आतंकवाद है, शब्द बोलने का दुस्साहस किया| इससे पहले देश-दुनिया में हुए आतंकी हमला में जब एक विशेष धर्म संप्रदाय के लोग पकड़े जाते रहे थे और अभी भी पकड़े जाते  है| भारत में ही कई मुस्लिम धर्म के आरोपियों को हमले करने के जुर्म में फंसी तक की सजा मिली है कसाब, अफजल और याकूब मेमन जैसे मुस्लिम आतंकी| किन्तु सरकार मीडिया या किसी जाँच एजेंसी ने इसे मुस्लिम आतंकवाद का नाम दिया| उलटे आतंकी को भटके हुए और इसप्रकार के घटना को हमारे बीच ऐसा परोसा की जैसे दोषी जनता ही है| 
गौर करने की बात यह है कि जिस मालेगांव विस्फोट में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को दोषी ठहराया जा रहा है, वह पहली घटना नहीं है| इससे पहले भी 2006 में माले गांव की मस्जिद के बाहर विस्फोट हुआ था| जिसमें कई लोग मारे गए थे| इस विस्फोट की जांच भी महाराष्ट्र पुलिस ने ही की थी| लेकिन उनकी जांच पर जब सवालिया निशान लगाए गए तो सीबीआई को सौंप दी गई| यह वही स्पेशल टास्क फोर्स है, जिसने 1993 के मुंबई बम धमाकों की जांच की थी और इसी जांच के आधार पर इसके लिए लगभग 117 आरोपियों की मुंबई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी| तमाम छानबीन के बाबजूद ना तो साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोई साबुत मिले; ना ही हिन्दू आतंकवाद के खिलाफ| लेकिन सीबीआई कहना था कि जांच से यह जरूर पता चला है कि इस विस्फोट के पीछे भी उन्हीं लोगों का हाथ है जिन्होंने हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत देश के विभिन्न शहरों में विस्फोट को अंजाम दिया है| एक बात और जिस समय मालेगांव में विस्फोट हुआ उसी समय गुजरात के मोडासा में भी विस्फोट हुआ था| खुफिया एजेंसी का तब कहना था कि इन दोनों विस्फोट के पीछे एक ही आतंकवादी संगठन का हाथ है| ऐसा इसलिए कि दोनों हमले एक दिन के अंतर पर हुए थे| दोनों धमाके रात में लगभग 9:30 के आप-पास हुए थे| और दोनों धमाके में विस्फोटक मोटरसाईकिल में छुपाया गया था| लेकिन एनआईए की टीम ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद साफ कर दिया कि मोडासा विस्फोट में प्रज्ञा ठाकुर और अभिनव भारत संगठन का कोई हाथ नहीं है| एनआईए के रिपोर्ट के अनुसार कुछ तथ्य जरुर सामने आये जो इस जाँच की दिशा मोड़ दी| रिपोर्ट में एनआईए ने कहा है कि उनके पास किसी को आरोपी बनाने लायक सबूत नहीं हैं। ब्लास्ट के लिए जिस हीरो होंडा बाइक का उपयोग किया गया था, उसके चेसिस नंबर के सिर्फ दो ही अंक मिले। अधिकारियों ने हीरो होंडा के गुड़गांव वाले प्लांट में संपर्क किया तो पता चला कि 71 बाइक्स में ये दो अंक मिलते हैं। अधिकारियों ने 70 बाइक मालिकों से पूछताछ की, लेकिन 71वां नहीं मिला और ना नहीं कभी एनआईए ने उस बाईक मालिक के नाम साझा किये। एनआईए ने 117 गवाहों की जांच की, लेकिन कोई सुराग हिन्दू आतंकवाद का नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक मोडासा ब्लास्ट में यूज हुई बाइक पर '786' नंबर का स्टिकर लगा था। अब मामला साफ था कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत देश के विभिन्न शहरों में विस्फोट करने वाले हिन्दू नहीं इस्लामिक आतंकी है| कांग्रेस की सरकार के इशारे पर गुजरात में हुए बम धमाके में इस्तेमाल बाईक के मालिक का नाम तो एएनआई ने छुपा ली| किन्तु देश की नज़रों उस बाईक पर लगा 786  नंबर का स्टिकर छुपा नहीं पायी और वह वायरल हो गया| फिर भी किसी प्रकार से कांग्रेस की सरकार जिसमें दिग्विजय सिंह की भूमिका रही है ने हिन्दू को आतंकी घोषित करने के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को शारीरिक और मानशिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा| हाथ पैर और रीढ़ की हड्डी तक पिटते-पिटते तोड़ गए और देश मीडिया मुंह बंद किये इस घोर अपराध की दोषी बनी रही| द्रोपदी को तो नुयुद्ध सभा में केवल बाल पकडे के घसीटा गया था| लेकिन साध्वी को उससे भी अधिक प्रताड़ित किया गया| इस प्रकार के कुकृत का ना तो इतिहास में कोई पन्ना दर्ज है ना ही वर्तमान में| किसी को आतंकी जबरन बनाने के लिए मानवता की सारी सीमा लाँघ दी गई| इतना ही नहीं मानवाधिकार की टीम भी इस षड्यंत्र में सामिल थी और उसने अपने रिपोर्ट न्यायालय को सौपी जो मीडिया में भी प्रकाशित की गई और आज-कल वायरल हो रही है| जिसमे यह साफ तौर पर लिखा गया था| साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ कोई मार-पिट नहीं की गई है| तब साध्वी प्रज्ञा जनता के के नज़रों से ओछल जेल में थी, किन्तु अब नहीं; उनके साथ की गई प्रताड़ना और उनकी स्थिति आज सब के बीच है| आपको यह मालूम हो कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के दो-दो बार ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट किये गए पर साध्वी सभी वैज्ञानिक जांचों में बेदाग निकल गई थी| और एएनआई ने उन्हें क्लीन चिट सौफ दी है| 
साध्वी प्रज्ञा ने ‘आप की आदालत’ रजत शर्मा की टीवी शो में यह खुलासा किया कि उनसे एक दिन जेल में मिलाने स्वामी अग्निवेश आये थे| और उन्हें जुर्म अपने माथे पर लेने की बात कही और दिलासा दिलाया कि जेल में कोई आपको परेशानी नहीं होगी| हमारी लड़ाई आरएसएस से है| एक बार ऐसा पिटाई अग्निवेश की जाये तो मीडिया की स्थिति क्या होगी? सोच कर ही तरस आती है| मीडिया हमेशा से पैसा और बुकाऊ रही है इसका प्रमाण भी है, कुछ दिन पहले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक टीवी डिबेट में थी और उनसे सवाल किया गया मानवाधिकार की रिपोर्ट के अनुसार आपके साथ कोई मारपीट नहीं की गई| सवाल सुनते ही प्रज्ञा ठाकुर ने वही किया जो कोई भी प्रताड़ित व्यक्ति करता| डिबेट छोड़ कर उठा गई| मैं उस टीवी एंकर को बुलाता हूँ स्वयं भोपाल आये साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की शारीरिक स्थति देखे| क्युकि पेपर पर चोट नहीं दिखते है, घाव और प्रताड़ना की गवाही तो स्वयं उनका शारीर चीख चीख दे रहा है| 

कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान

भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ |  इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है |  तो मुझे भी संविधान के धारा  19  क...