शनिवार, 27 अप्रैल 2019

रविश कुमार को भविष्य मालूम है

'भारत के टुकडे' और 'अफजल को घर से घर पैदा' करने वाले कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र ही है. घटना के तीन वर्ष बाद दिल्ली पुलिस ने 14 जनवरी, 2019 को पटियाला कोर्ट में 1200 पेज के चार्जसीट दर्ज की. चार्जसीट में कुल 46 लोगों  आरोपी है. इसमें 10 लोगों को सीधे तौर पर आरोपी है, कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य और 7 कश्मीरी छात्र
शामिल है. करीब 90 लोगों की गवाही दर्ज की गई है. गवाही चश्मदीद छात्रों और सिक्योरिटी गार्ड में तैनात लोगों की है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है और नारेबाज़ी की 13 वीडियो क्लिप्स भी शामिल की है, इसकी जाँच CFSC ने सही माना है. जैसा की पहले कुछ नेताओं, पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने वीडियो फुटेज को फेंक और एडिटेड बताया था. इसके विपरीत पुलिस के हाथ लगी 13 वीडियो क्लिप्स जाँच में सही पाए गये है. इसमें देशविरोधी नारे लगाते आरोपियों की आवाज़ और चेहरा पहचाना जा सकता है. इसके अलावे सीडीआर (कॉल रिकॉर्ड) कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद और अनिर्बान भट्टाचार्य के निकली गई है| चार्जशीट में यह भी लिखा है कि घटना स्थल पर कन्हैया कुमार की मौजूदगी थी| उसके मोबाईल का लोकेशन इस वक्त जेएनयू में ही पाया गया था, इसकी भी पुष्टि चार्जशीट में की गई है|  
अब सवाल उठता है कि कन्हैया बेगुसरय से चुनाव क्यों लड़ रहे है? कारण साफ है सजा होने से बच सके या सजा की अवधी कम हो जाये| जमानत की सुविधा उपलब्ध हो, जैसे आज गाँधी परिवार के लिए है|
कांग्रेस की प्रताड़ना की शिकार  
जेएनयू के देश विरोधी नारे, भारत के टुकडे करने की घटना के ठीक बाद से अब तक कुछ अनुभवी पत्रकार इसमें रविश कुमार भी शामिल है कन्हैया को निर्दोष ऐसे साबित करने में लगे है जैसे न्यायपालिका से इनकी साठ-गाठ हो| क्या मिथ्या प्रचार करना ही रविश कुमार ने अपना धर्म मान लिया है? रविश जिस प्रकार भोपाल से बीजेपी की प्रत्याशी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के बारे में बेबाकी से  बोल रहे है वैसे ही कन्हैया के खिलाफ क्यों नहीं? जब की कन्हैया कुमार को किसी प्रकार की वर्तमान सरकार में शारीरिक या मानशिक प्रताड़ना नहीं भुगतनी पड़ी है| इसके विपरीत साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को जेल असहनीय और अकल्पनीय प्रताड़ना के गुजरना पड़ा था| बिना चार्जशीट के 9 वर्षों तक जेल में प्रताड़ित किया| उसकी रीढ़ के हड्डी तक टूटी हुई है, हजारों शारीर पर घाव के निशानी है| दो कदम ठीक से चलाना मुश्किल है इसके बड़ा प्रताड़ना का प्रमाण क्या हो सकता है भला| और प्राईम टाइम में झूठा रिपोर्ट दिखाते है जिसे कांग्रेस के शासन में मनावाधिकार ने प्रकाशित किया था| आज साध्वी प्रज्ञा  भोपाल में पुरे देश की बीच है, क्यों नहीं बोलते मानवाधिकार की रिपोर्ट गलत है? क्योंकि वो हिन्दू धर्म की साध्वी है| अगर ऐसा है तो दोगली पत्रकारिता विदेशी और आतंकी से फंडिग लेने वाले पत्रकर की भाषा ऐसे ही होती है| कन्हैया निर्दोष है और साध्वी प्रज्ञा हिन्दूआतंकी यह न्यायालय से पहले ही तय कर लिया जैसे रविश कुमार को भविष्य मालूम हो| 

जनता की अदालत 




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