जितेश कुमार
इतिहासकार अर्नाल्ड जे.टायनयी ने कहा था - 'विश्व के इतिहास में अगर किसी देश के इतिहास के साथ सर्वाधिक छेड़छाड़ की गई है तो वह भारत की इतिहास ही है|' आजकल कंप्यूटरों की सहायता से अक्षरों की आवृत्ति का विश्लेषण कर माकोंव विधि से प्राचीन भाषा को पढ़ना सरल हो गया है सिंधु घाटी की लिपि जानबूझकर नहीं पढ़ा गया और ना ही इसको पढ़ने की सार्थक प्रयास किए गए भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद, इस पर पहले अंग्रेजों और फिर कम्युनिस्टों का कबजा रहा है सिंधु घाटी की लिपि को पढ़ने की कोई भी विशेष योजना नहीं चलाई.आखिर ऐसा क्या था सिंधु घाटी की लिपि में? अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकार क्यों नहीं चाहते थे कि सिंधु घाटी के लिपि को पढ़ा जाए?
1. उनको डर था कि सिंधु घाटी की लिपि को पढ़ने के बाद उस की प्राचीनता और अधिक पुरानी सिद्ध हो जाएगी. इजिप्ट, चीन, रोमन, ग्रीक, आर्मेनिक, सुमेरियन मेसोपोटामिया से भी पुरानी. जिससे पता चलेगा कि वह विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है. इससे भारत का महत्व बढ़ेगा तो अंग्रेज और कम्युनिस्ट इतिहासकारों को बर्दाश्त नहीं होगा2. अंग्रेज और कम्युनिस्टों इतिहासकारों द्वारा प्रचारित आर्य बाहर से आए हुए आक्रमणकारी जाती है और इन्होंने यहां के मूल निवासियों अर्थात सिंधु घाटी के लोगों को मार डाला व भगा दिया और उसकी महान सभ्यता नष्ट कर दी. वे लोग ही जंगलों में छुपकर दक्षिण भारतीय द्रवित बन गए शूद्र व आदिवासी बन गये, आदि आदि गलत साबित हो जाएगा.कुछ फर्जी इतिहासकार सिंधु घाटी की लिपि को सुमेरियन भाषा से जोड़कर पढ़ने का प्रयास करते रहे तो कुछ एक इजिप्शियन भाषा से, कुछ चीनी भाषा से, कुछ तो मुंडा आदिवासी की भाषा और कुछ इनको ईस्टर दीप के आदिवासी की भाषा से जोड़कर पढ़ने का प्रयास करते रहे यह सारे प्रयास असफल साबित हुए.सिंधु घाटी की लिपि को पढ़ने में निम्नलिखित समस्याएं बताई जाती है सभी लिपियों में अक्षर कम होते है. जैसे अंग्रेजो में 26 देवनागरी में 52 आदि मगध घाटी की लिपि में लगभग 400 अक्षर चिन्ह है. सिंधु घाटी की लिपि को पढ़ने में या कठिनाई आती है कि इसका काल 7000 ई.पूर्व.से 1500 ई.पूर्व. तक का है इतनी लंबी अवधि में अनेकों बड़े परिवर्तन हुए इतनी लंबी अवधि जिसमें लिपि में भी अनेक परिवर्तन हुए साथ ही लिपि में स्टाइलिस्ट वेरिएशन भी बहुत पाया जाता है. लेखक ने लोथल और कालीबंगा में सिंधु घाटी व हड़प्पा कालीन अनेक पुरातात्विक साक्ष्य का अवलोकन किया.
भारत की प्राचीनतम लिपिओं में से एक लिपि है
जिसे ब्रह्म लिपि कहा जाता है इस लिपि से ही भारत की अन्य भाषाओं की लिपि बनी है
लिपि वैदिक काल से गुप्त काल तक उत्तर पश्चिम भारत में उपयोग की जाती थी संस्कृत, पाली, प्राकृत के अनेक ग्रंथ ब्रह्म लिपि से प्राप्त होते हैं सम्राट अशोक
ने अपने धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए ब्रह्म लिपि को अपनाया. सम्राट अशोक के
स्तंभ शिलालेख ब्राह्मी लिपि में लिखे गए और संपूर्ण भारत में लगाए गए सिंधु घाटी
के लिए भी और ब्राह्मी लिपि में अनेक आश्चर्यजनक समानताएं हैं साथी ब्राह्मी और
तमिल लिपि का भी प्रारंरिक संबंध है इस आधार पर सिंधु घाटी की लिपि को पढ़ने का सार्थक प्रयास सिद्धांत काक और इरवाथम महादेवन ने किया.
सिंधु घाटी की लिपि के लगभग 400 अक्षरों के बारे में यह माना जाता है कि इसमें कुछ वर्णमाला (स्वर,व्यंजन, मात्रा संख्या), कुछ योगिक अक्षर और शेष चित्र लिपि है अर्थात या भाषा अक्षर और चित्र लिपि का संकलन समूह है विश्व में कोई भी भाषा इतनी सशक्त और समृद्ध नहीं जितनी सिंधु घाटी की भाषा. जिस प्रकार सिंधु घाटी के लिए भी पशु के मुख्य की ओर से अथवा दाएं से बाएं लिखी जाती है उसी प्रकार ब्राह्मी लिपि की दाएं से बाएं लिखी जाती है सिंधु घाटी की लिपि के लगभग 3000 टेक्स्ट प्राप्त है इसमें वैसे ही 400 अक्षर चीन है लेकिन 39 अक्षरों का प्रयोग 80% बार है और ब्राह्मी लिपि में 45 अक्षर अब हम उन 39 अक्षरों को ब्राह्मी लिपि के 45 अक्षरों के साथ समानता के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं और उसकी ध्वनि का पता लगा सकते हैं.
ब्राह्मी लिपि के आधार पर सिंधु घाटी की लिपि पड़ने पर सभी संस्कृत के शब्द आते हैं जैसे श्री अगस्त या मृत, हस्ती, वरुण, क्षमा, कामदेव, महादेव, कामधेनु मूषिका, पग, पञ्च, मशक, पितृ, अग्नि, इंद्र, मित्र आदिनिष्कर्ष या है कि - सिंधु घाटी की लिपि ब्राह्मी लिपि के पूर्वज लिपि है सिंधु घाटी के लिपि को ब्राह्मणी के आधार पर पढ़ा जा सकता है उस काल में संस्कृत भाषा थी जिसे सिंधु घाटी के लिपि में लिखा गया था सिंधु घाटी के लोग वैदिक धर्म और संस्कृति मानते थे वैदिक धर्म अत्यंत प्राचीन 7000 ईसा पूर्व से भी अधिक पुरानी, हिंदू विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है हिंदू का मूल निवास सप्त देश यानी (सिंधु सरस्वती क्षेत्र) था जिसके विस्तार में संपूर्ण भारत देश था वैदिक धर्म को मानने वाले कहीं भारत से नहीं आए थे और ना ही यह आक्रमणकारी थे आर्य और द्रविड़ जैसी कोई भी पृथक जाति नहीं थी जिसमें परस्पर पर युद्ध हुआ हो.
सन्दर्भ: पुस्तक सिन्धु घाटी की सभ्यता
सिंधु घाटी की लिपि के लगभग 400 अक्षरों के बारे में यह माना जाता है कि इसमें कुछ वर्णमाला (स्वर,व्यंजन, मात्रा संख्या), कुछ योगिक अक्षर और शेष चित्र लिपि है अर्थात या भाषा अक्षर और चित्र लिपि का संकलन समूह है विश्व में कोई भी भाषा इतनी सशक्त और समृद्ध नहीं जितनी सिंधु घाटी की भाषा. जिस प्रकार सिंधु घाटी के लिए भी पशु के मुख्य की ओर से अथवा दाएं से बाएं लिखी जाती है उसी प्रकार ब्राह्मी लिपि की दाएं से बाएं लिखी जाती है सिंधु घाटी की लिपि के लगभग 3000 टेक्स्ट प्राप्त है इसमें वैसे ही 400 अक्षर चीन है लेकिन 39 अक्षरों का प्रयोग 80% बार है और ब्राह्मी लिपि में 45 अक्षर अब हम उन 39 अक्षरों को ब्राह्मी लिपि के 45 अक्षरों के साथ समानता के आधार पर मैपिंग कर सकते हैं और उसकी ध्वनि का पता लगा सकते हैं.
ब्राह्मी लिपि के आधार पर सिंधु घाटी की लिपि पड़ने पर सभी संस्कृत के शब्द आते हैं जैसे श्री अगस्त या मृत, हस्ती, वरुण, क्षमा, कामदेव, महादेव, कामधेनु मूषिका, पग, पञ्च, मशक, पितृ, अग्नि, इंद्र, मित्र आदिनिष्कर्ष या है कि - सिंधु घाटी की लिपि ब्राह्मी लिपि के पूर्वज लिपि है सिंधु घाटी के लिपि को ब्राह्मणी के आधार पर पढ़ा जा सकता है उस काल में संस्कृत भाषा थी जिसे सिंधु घाटी के लिपि में लिखा गया था सिंधु घाटी के लोग वैदिक धर्म और संस्कृति मानते थे वैदिक धर्म अत्यंत प्राचीन 7000 ईसा पूर्व से भी अधिक पुरानी, हिंदू विश्व की सबसे प्राचीन सभ्यता है हिंदू का मूल निवास सप्त देश यानी (सिंधु सरस्वती क्षेत्र) था जिसके विस्तार में संपूर्ण भारत देश था वैदिक धर्म को मानने वाले कहीं भारत से नहीं आए थे और ना ही यह आक्रमणकारी थे आर्य और द्रविड़ जैसी कोई भी पृथक जाति नहीं थी जिसमें परस्पर पर युद्ध हुआ हो.
सन्दर्भ: पुस्तक सिन्धु घाटी की सभ्यता

कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें