जितेश कुमार
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर पर लगे आरोप का खंडन भी होगा| पहले मानवाधिकार की रिपोर्ट कितना सच है और कितना झूठ? कुछ पत्रकारों ने मानवाधिकार की रिपोर्ट के सहारे यह सवाल उठाये है कि साध्वी प्रज्ञा के साथ कोई मारपीट नहीं की गई| ऐसे प्रश्न पूछने वाले
पत्रकारों को ईश्वर ने आँख दिया है तो भोपाल आकर आखों देखा साक्षात्कार करों| क्यों की पेपर पर चोट के निशान नहीं, शारीर पर होते है| फिर कांग्रेस की सरकार और देश की न्यायपालिका के पूछो किस आरोप और कौन से साबुत के आधार पर साध्वी प्रज्ञा को 9 वर्ष तक जेल ही नहीं बल्कि अमानवीयता के सभी हद टूट जाये ऐसा कुकृत किया गया| क्यों? मीडिया को पता है फिर भी मौन है| यह स्थति ऐसी है, जैसे माँ दुश्मनों के बीच घिरी हो और बेटा दुश्मन की ताकत के घबराकर दुबक गया हो|
सनातन (हिन्दू धर्म) का 5000 वर्ष के ज्ञात इतिहास में पहली बार साल 2008 में कांगेस की सरकार में हुए मालेगांव विस्फोट के पीछे हिंदू आतंकवाद है, शब्द बोलने का दुस्साहस किया| इससे पहले देश-दुनिया में हुए आतंकी हमला में जब एक विशेष धर्म संप्रदाय के लोग पकड़े जाते रहे थे और अभी भी पकड़े जाते है| भारत में ही कई मुस्लिम धर्म के आरोपियों को हमले करने के जुर्म में फंसी तक की सजा मिली है कसाब, अफजल और याकूब मेमन जैसे मुस्लिम आतंकी| किन्तु सरकार मीडिया या किसी जाँच एजेंसी ने इसे मुस्लिम आतंकवाद का नाम दिया| उलटे आतंकी को भटके हुए और इसप्रकार के घटना को हमारे बीच ऐसा परोसा की जैसे दोषी जनता ही है|
गौर करने की बात यह है कि जिस मालेगांव विस्फोट में साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को दोषी ठहराया जा रहा है, वह पहली घटना नहीं है| इससे पहले भी 2006 में माले गांव की मस्जिद के बाहर विस्फोट हुआ था| जिसमें कई लोग मारे गए थे| इस विस्फोट की जांच भी महाराष्ट्र पुलिस ने ही की थी| लेकिन उनकी जांच पर जब सवालिया निशान लगाए गए तो सीबीआई को सौंप दी गई| यह वही स्पेशल टास्क फोर्स है, जिसने 1993 के मुंबई बम धमाकों की जांच की थी और इसी जांच के आधार पर इसके लिए लगभग 117 आरोपियों की मुंबई की विशेष अदालत ने सजा सुनाई थी| तमाम छानबीन के बाबजूद ना तो साध्वी प्रज्ञा के खिलाफ कोई साबुत मिले; ना ही हिन्दू आतंकवाद के खिलाफ| लेकिन सीबीआई कहना था कि जांच से यह जरूर पता चला है कि इस विस्फोट के पीछे भी उन्हीं लोगों का हाथ है जिन्होंने हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत देश के विभिन्न शहरों में विस्फोट को अंजाम दिया है| एक बात और जिस समय मालेगांव में विस्फोट हुआ उसी समय गुजरात के मोडासा में भी विस्फोट हुआ था| खुफिया एजेंसी का तब कहना था कि इन दोनों विस्फोट के पीछे एक ही आतंकवादी संगठन का हाथ है| ऐसा इसलिए कि दोनों हमले एक दिन के अंतर पर हुए थे| दोनों धमाके रात में लगभग 9:30 के आप-पास हुए थे| और दोनों धमाके में विस्फोटक मोटरसाईकिल में छुपाया गया था| लेकिन एनआईए की टीम ने प्रज्ञा सिंह ठाकुर और अन्य आरोपियों से पूछताछ के बाद साफ कर दिया कि मोडासा विस्फोट में प्रज्ञा ठाकुर और अभिनव भारत संगठन का कोई हाथ नहीं है| एनआईए के रिपोर्ट के अनुसार कुछ तथ्य जरुर सामने आये जो इस जाँच की दिशा मोड़ दी| रिपोर्ट में एनआईए ने कहा है कि उनके पास किसी को आरोपी बनाने लायक सबूत नहीं हैं। ब्लास्ट के लिए जिस हीरो होंडा बाइक का उपयोग किया गया था, उसके चेसिस नंबर के सिर्फ दो ही अंक मिले। अधिकारियों ने हीरो होंडा के गुड़गांव वाले प्लांट में संपर्क किया तो पता चला कि 71 बाइक्स में ये दो अंक मिलते हैं। अधिकारियों ने 70 बाइक मालिकों से पूछताछ की, लेकिन 71वां नहीं मिला और ना नहीं कभी एनआईए ने उस बाईक मालिक के नाम साझा किये। एनआईए ने 117 गवाहों की जांच की, लेकिन कोई सुराग हिन्दू आतंकवाद का नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक मोडासा ब्लास्ट में यूज हुई बाइक पर '786' नंबर का स्टिकर लगा था। अब मामला साफ था कि हैदराबाद की मक्का मस्जिद समेत देश के विभिन्न शहरों में विस्फोट करने वाले हिन्दू नहीं इस्लामिक आतंकी है| कांग्रेस की सरकार के इशारे पर गुजरात में हुए बम धमाके में इस्तेमाल बाईक के मालिक का नाम तो एएनआई ने छुपा ली| किन्तु देश की नज़रों उस बाईक पर लगा 786 नंबर का स्टिकर छुपा नहीं पायी और वह वायरल हो गया| फिर भी किसी प्रकार से कांग्रेस की सरकार जिसमें दिग्विजय सिंह की भूमिका रही है ने हिन्दू को आतंकी घोषित करने के लिए साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को शारीरिक और मानशिक रूप से प्रताड़ित करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ा| हाथ पैर और रीढ़ की हड्डी तक पिटते-पिटते तोड़ गए और देश मीडिया मुंह बंद किये इस घोर अपराध की दोषी बनी रही| द्रोपदी को तो नुयुद्ध सभा में केवल बाल पकडे के घसीटा गया था| लेकिन साध्वी को उससे भी अधिक प्रताड़ित किया गया| इस प्रकार के कुकृत का ना तो इतिहास में कोई पन्ना दर्ज है ना ही वर्तमान में| किसी को आतंकी जबरन बनाने के लिए मानवता की सारी सीमा लाँघ दी गई| इतना ही नहीं मानवाधिकार की टीम भी इस षड्यंत्र में सामिल थी और उसने अपने रिपोर्ट न्यायालय को सौपी जो मीडिया में भी प्रकाशित की गई और आज-कल वायरल हो रही है| जिसमे यह साफ तौर पर लिखा गया था| साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के साथ कोई मार-पिट नहीं की गई है| तब साध्वी प्रज्ञा जनता के के नज़रों से ओछल जेल में थी, किन्तु अब नहीं; उनके साथ की गई प्रताड़ना और उनकी स्थिति आज सब के बीच है| आपको यह मालूम हो कि साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के दो-दो बार ब्रेन मैपिंग और नार्को टेस्ट किये गए पर साध्वी सभी वैज्ञानिक जांचों में बेदाग निकल गई थी| और एएनआई ने उन्हें क्लीन चिट सौफ दी है|
साध्वी प्रज्ञा ने ‘आप की आदालत’ रजत शर्मा की टीवी शो में यह खुलासा किया कि उनसे एक दिन जेल में मिलाने स्वामी अग्निवेश आये थे| और उन्हें जुर्म अपने माथे पर लेने की बात कही और दिलासा दिलाया कि जेल में कोई आपको परेशानी नहीं होगी| हमारी लड़ाई आरएसएस से है| एक बार ऐसा पिटाई अग्निवेश की जाये तो मीडिया की स्थिति क्या होगी? सोच कर ही तरस आती है| मीडिया हमेशा से पैसा और बुकाऊ रही है इसका प्रमाण भी है, कुछ दिन पहले साध्वी प्रज्ञा ठाकुर एक टीवी डिबेट में थी और उनसे सवाल किया गया मानवाधिकार की रिपोर्ट के अनुसार आपके साथ कोई मारपीट नहीं की गई| सवाल सुनते ही प्रज्ञा ठाकुर ने वही किया जो कोई भी प्रताड़ित व्यक्ति करता| डिबेट छोड़ कर उठा गई| मैं उस टीवी एंकर को बुलाता हूँ स्वयं भोपाल आये साध्वी प्रज्ञा ठाकुर की शारीरिक स्थति देखे| क्युकि पेपर पर चोट नहीं दिखते है, घाव और प्रताड़ना की गवाही तो स्वयं उनका शारीर चीख चीख दे रहा है|

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