४. क्रिया - जिस वाक्य में किसी कार्य के करने या होने का बोध होता हो, उसे क्रिया कहते हैं । जैसे - राम खा रहा है। मोहन खेलता है ।
क्रिया के छ: भेद होते हैं -
क. सर्कमक क्रिया - जिस वाक्य में कर्ता प्रधान हो, सर्कमक क्रिया कहते हैं । जैसे - सोनू पढ़ता हैं । , मोहन खाता है।
ख. अर्कमक क्रिया - जिस वाक्य में कर्म प्रधान हो, उसे अकर्मक क्रिया कहते मोहन बाजार जाता है। मोहन बाजार जाता है ।
ग. सहायक क्रिया - किसी वाक्य में जो शब्दांश प्रधान की सहायता करे उसे सहायक किया कहते हैं । जैसे - उसे लेकर आना ।, पढ़कर भोजन करना ।
घ. संयुक्त क्रिया - किसी वाक्य में जब एक से अधिक किया संयुक्त हो तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं जैसे मां बालक को दूध पिलाती है ।
च. प्रेरणार्थक क्रिया - किसी बात के मैं जाऊं स्वयं कोई व्यक्ति कार्य न कर किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता हो तो उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं । जैसे - मैंने राम को पिटवाया ।
छ. क्रियात्मक क्रिया - जब किसी वाक्य में क्रिया संज्ञा की तरह कार्य करें तो उसे क्रियात्मक क्रिया कहते हैं । जैसे - टहलना एक अच्छा व्यायाम है ।
क्रिया के छ: भेद होते हैं -
क. सर्कमक क्रिया - जिस वाक्य में कर्ता प्रधान हो, सर्कमक क्रिया कहते हैं । जैसे - सोनू पढ़ता हैं । , मोहन खाता है।
ख. अर्कमक क्रिया - जिस वाक्य में कर्म प्रधान हो, उसे अकर्मक क्रिया कहते मोहन बाजार जाता है। मोहन बाजार जाता है ।
ग. सहायक क्रिया - किसी वाक्य में जो शब्दांश प्रधान की सहायता करे उसे सहायक किया कहते हैं । जैसे - उसे लेकर आना ।, पढ़कर भोजन करना ।
घ. संयुक्त क्रिया - किसी वाक्य में जब एक से अधिक किया संयुक्त हो तो उसे संयुक्त क्रिया कहते हैं जैसे मां बालक को दूध पिलाती है ।
च. प्रेरणार्थक क्रिया - किसी बात के मैं जाऊं स्वयं कोई व्यक्ति कार्य न कर किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता हो तो उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं । जैसे - मैंने राम को पिटवाया ।
छ. क्रियात्मक क्रिया - जब किसी वाक्य में क्रिया संज्ञा की तरह कार्य करें तो उसे क्रियात्मक क्रिया कहते हैं । जैसे - टहलना एक अच्छा व्यायाम है ।
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