सोमवार, 7 मई 2018

जैसे-तैसे नहीं चल पायेगा हिंदी विश्वविद्यालय ? -जितेश सिंह

कल 7 मई को अ.बि.वा.हि.वि.वि., भोपाल के छात्रों ने वि.वि. के कुलपति प्रो. रामदेव भारद्वाज जी से मिले|जनवरी में हुई परीक्षा के अंक प्रपत्र को अतिशीघ्र वेबसाइट पर अपलोड करने तथा जिन विद्यार्थीयों की 
परीक्षा में एटीकेटी लगी है, उनकेे परिक्षा को जल्द से जल्द करवायी जाए| छात्रों ने कुलपति जी से यह भी कहा कि अगले सेमेस्टर की होने वाली परीक्षा की तिथि भी शीध्र घोषित हो| परीक्षा संबंधित जानकारी, प्रश्नों के नमूने को वि.वि. के वेबसाइट पर अपलोड किया जाए| वि.वि. के पुस्तकालय में पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तकों की कमी का निदान किया जाए| जिन विभागों में शिक्षकों की कमी है, अतिथि विद्वानों की सहायता से पाठ्यक्रम की तैयारी करायी जाए| हालाकि पीछले सेमेस्टर से वि.वि. के पत्रकारिता विभाग में अतिथि विद्वानों की सहायता लिया जा रहा है| परिमाणत: अधिकतर छात्रों ने सेमेस्टर परीक्षा में उत्तीर्ण हुये| प्रशासनिक सूचनातंत्र  में सुधार भी एक बड़ा मुद्दा है| छात्रों ने इसप्रकार के अनेको शिथिलता को लेकर वि.वि. के कुलपति से मिलकर उन्हें एक पत्र सौपी| अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल की बात की जाए तो यह विश्वविद्यालय मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज चौहान के सपनों का विश्वविद्यालय  कहा जाता है| म. प्र. शासन के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक इसे माना जाता है| लेकिन अब तक की व्यवस्था में कुछ ड्रीम नहीं दिखता है| वि.वि. ने अपने विद्यार्थीयों को हताशा और निराशा के अलावे आज तक कुछ नहीं दी है| ऐसे में सतत् अध्ययन और आगे की पढ़ाई हेतु कई प्रकार की संकट उपज रही है| अब तक पीछले परीक्षा में उत्तीर्ण हुये, छात्रों को अंक प्रपत्र नहीं दिये गये और नहीं उन विद्यार्थीयों की एटीकेटी की परीक्षा करवायी गई, जिनका परीक्षा में एटीकेटी लगा था| इस बार थोड़ी विलंब भी मान ले पर कैसे?  वि.वि. ने अब तक उन विद्यार्थीयों को भी अंक प्रपत्र नहीं दिया है| जो प्रथम से चौथी या पंचवी या अंतिम सेमेस्टर का परीक्षा देने वाले है, आज तक उन्हें किसी भी सेमेस्टर का अंक प्रपत्र नहीं दिया गया| यह एक बड़़ी प्रशासनिक चुक है!
जून 2017 में जिन छात्रों का नामांकन हुआ अब तक उन्हें परिचय पत्र तक नहीं दिये गये है| एक चलान रसीद के फोटो कॉपी के अलावे छात्रों के पाास कोई कागज का टुकड़ा तक नहीं जिससे उनकी पहचान विवि के छात्रों में किया जा सके| ऐसे में उन्हें बस पास, बैंक संबंधित कार्य और अनेको क्रियाकलाप में परेशानी का सामना करना पड़ता है| वि.वि. ने सौकडो़ विभाग और पाठ्यक्रम तो खोल रखी है| लेकिन छात्रों कमी साफ देखी जा सकती है| किसी में चार तो किसी में पांच छात्र अध्ययनशील है, परन्तु विषय छात्रों की कमी नहीं, व्यवस्था की है| अगर छात्रों की संख्या कम है तो पढ़ाई और परीक्षा, अादि कागजी काम-काज ससमय हो ताकि व्यवस्था और स्पष्टता से नये विद्यार्थीयों को आकर्षित किया जा सके| मगर ऐसा कुछ दिख नहीं रहा| मानों शासन ने रोजगार के दृष्टि इसे चालू किया हो| जहां पढ़े-लिखे लोग कुछ फाइल बना कर और कुछ हस्ताक्षर कर अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सके| डिजिटलकरण के नाम पर ठेंगा के अलावे कुछ भी नहीं! विश्वविद्यालय संबंधित गतिविधियों को अपडेट भी किये महिनों बीत गए होंगे| पुस्तकालय में पाठ्यक्रम से संबंधित पुस्तके अप्रयाप्त है| अादि अनेको समस्याएं के कारण वि.वि. की स्थिति दैयनीय बनी हुई है| यही कारण था कि कल 7 मई को विवि के आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं और कुछ सक्रिय छात्रों ने कुलपति जी को लिखित पत्र सौंपी| यह पहली बार नहीं जब आ.भा.वि.प. के छात्रों ने कुलपति से मिले हो| पीछली बार भी जब विश्वविद्यालय ने अभियांत्रिकी (इंंजीनियरिंग) विभाग को एकाएक बंद करने के निर्देश दिये तो आ.भा.वि.पा. के कार्यकर्ताओं ने उन छात्रों के साथ अन्याय नहीं होने दिया| विवि के प्रशासनिक ईकाई पर जोर देकर उन छात्रों के नामांकन को दुसरे विश्वविद्यालय में करवाने का प्रयत्न किया था| 
यही नहीं जब पर्यटन विभाग ने अवैध रूप से पुराणी विधानसभा स्थित विवि के कैंपस को नुकसान पहुंचाने की कोशिश  तो विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने विश्वविद्यालय  छात्रों के साथ मिलकर पर्यटन विभाग  के  विरुद्ध प्रदर्शन की| जिसका परिमाण यह हुआ कि पर्यटन विभाग को झुकना पड़ा तथा उनके अधिकारियों को यह आश्वासन देना पड़ा कि जब तक विश्वविद्यालय को कोई दूसरा स्थान सुनिश्चित ना कर दिया जाए, तब तक वि.वि. के कैंपस में कोई कार्य नहीं होगें| विवि के सक्रिय छात्रों और आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कार्यकर्ताओं ने हमेशा से विवि के प्रति अपनी निष्ठा को प्रकट की है|कल 7 मई  को छात्रहित और विवि के व्यवस्था में शिथिलता को लेकर विवि के कुलपति से मिलना| उन्हें विभिन्न असुविधाओं को लेकर लिखित पत्र सौंपना सराहनीय है| विवि की प्रशासनिक विभाग भी अवगत समस्याओं के जल्द निपटने का प्रयास करे| ताकि अगामी वर्ष नामांकन की संख्या में उछाल आए|
              

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