१. संज्ञा - जो शब्द किसी व्यक्ति, स्थान, जाती, भाव के नाम का बोध करे, उसे संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - राम, सीता, बाघ, कौआ, बादल, पटना, हिमालय, भोपाल, इत्यादि ।
संज्ञा के पांच भेद होते हैं -
क. व्यक्तिवाचक संज्ञा - जिससे किसी व्यक्ति या स्थान के नाम का बोध हो, व्यक्तिवचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - राम, सीता, मोहन, पटना, हिमालय, भोपाल, इत्यादि ।
ख. जातिवाचक संज्ञा - जिससे किसी जाति का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - मनुष्य, पशु, पक्षी, इत्यादि ।
ग. समूहवाचक संज्ञा - जिससे किसी समूह का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - मेला, सभा, सेना, इत्यादि ।
घ. द्रव्यवाचक संज्ञा - जिससे किसी वस्तु के मापने या तौलने का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - चावल, आटा, तेल, पानी, इत्यादि ।
च. भाववाचक संज्ञा - जिससे किसी व्यक्ति का भाव ( गुण या दोष ) प्रकट हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - चोर, संत, मोटा, पतला, इत्यादि ।
२. सर्वनाम - जो शब्द किसी वाक्य में संज्ञा के बदले प्रयोग हो, सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - यह, वह, तुम, मैं ,कोन, इत्यादि ।
सर्वनाम के छ: भेद होते हैं -
क. प्रश्नवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य में प्रश्न करने का बोध हो, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
तुम कोन हो ? उसका नाम क्या हैं ? इत्यादि ।
ख. पुरुषवाचक सर्वनाम - जिससे पुरुष जाति का बोध हो, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - मैं, तुम, यह, मोहन, इत्यादि ।
पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं -
अ. प्रथमपुरुष - मैं, हम, हमलोग
ब. माध्यमपुरुष - तुम, आप, आपलोग
स. उत्तमपुरुष - यह, वह, वे लोग, ये लोग
ग. निजवचक सर्वनाम - जिससे किसी कार्य के निजता का बोध हो, उसे नीजवचक सर्वनाम कहते हैं।
जैसे - मैं स्वंम यह काम करूंगा । तुम अपना काम करो ।इत्यादि ।
घ. निश्चयवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य से निश्चयता का बोध हो, निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - वे सब लड़के है । , वे लोग छात्र हैं ।
च. अनिश्चयवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य में अनिश्चयता का बोध हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
जैसे - वहां कोन है ? कोई वहां हैं ।, इत्यादि ।
जैसे - राम, सीता, बाघ, कौआ, बादल, पटना, हिमालय, भोपाल, इत्यादि ।
संज्ञा के पांच भेद होते हैं -
क. व्यक्तिवाचक संज्ञा - जिससे किसी व्यक्ति या स्थान के नाम का बोध हो, व्यक्तिवचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - राम, सीता, मोहन, पटना, हिमालय, भोपाल, इत्यादि ।
ख. जातिवाचक संज्ञा - जिससे किसी जाति का बोध हो, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - मनुष्य, पशु, पक्षी, इत्यादि ।
ग. समूहवाचक संज्ञा - जिससे किसी समूह का बोध हो, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - मेला, सभा, सेना, इत्यादि ।
घ. द्रव्यवाचक संज्ञा - जिससे किसी वस्तु के मापने या तौलने का बोध हो, उसे द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - चावल, आटा, तेल, पानी, इत्यादि ।
च. भाववाचक संज्ञा - जिससे किसी व्यक्ति का भाव ( गुण या दोष ) प्रकट हो, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं ।
जैसे - चोर, संत, मोटा, पतला, इत्यादि ।
२. सर्वनाम - जो शब्द किसी वाक्य में संज्ञा के बदले प्रयोग हो, सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - यह, वह, तुम, मैं ,कोन, इत्यादि ।
सर्वनाम के छ: भेद होते हैं -
क. प्रश्नवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य में प्रश्न करने का बोध हो, उसे प्रश्नवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
तुम कोन हो ? उसका नाम क्या हैं ? इत्यादि ।
ख. पुरुषवाचक सर्वनाम - जिससे पुरुष जाति का बोध हो, उसे पुरुषवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - मैं, तुम, यह, मोहन, इत्यादि ।
पुरुषवाचक सर्वनाम तीन प्रकार के होते हैं -
अ. प्रथमपुरुष - मैं, हम, हमलोग
ब. माध्यमपुरुष - तुम, आप, आपलोग
स. उत्तमपुरुष - यह, वह, वे लोग, ये लोग
ग. निजवचक सर्वनाम - जिससे किसी कार्य के निजता का बोध हो, उसे नीजवचक सर्वनाम कहते हैं।
जैसे - मैं स्वंम यह काम करूंगा । तुम अपना काम करो ।इत्यादि ।
घ. निश्चयवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य से निश्चयता का बोध हो, निश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं ।
जैसे - वे सब लड़के है । , वे लोग छात्र हैं ।
च. अनिश्चयवाचक सर्वनाम - जिस वाक्य में अनिश्चयता का बोध हो, उसे अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहते हैं।
जैसे - वहां कोन है ? कोई वहां हैं ।, इत्यादि ।
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