समुच्यवाचक - जब दो या दो से अधिक वाक्यों को या उपवाक्यों को जोड़ने के लिए वाक्यों में जिन शब्दों का प्रयोग होता हैं, उसे समुच्यवाचक कहते हैं ।
जैसे - राम और श्याम बाजार जाते हैं ।
समुच्यवाचक के दो भेद होते हैं -
क. समानाधिकरण समुच्य - जो दो वाक्यों, उपावक्यो को आपस में जोड़ता हो । जिसमें दोनों पद समान हो, उसे समानाधिकरण समुच्य कहते हैं ।
जैसे - राम और कृष्ण महान थे । , राधा और कृष्ण एक ही थे।
ख. व्यधिकरण समुच्य - जिसमें एक प्रधान पद हो और दूसरा सरल या सहायक पद को आपस में जोड़ने वाले शब्द को व्यधिकरण समुच्य कहते हैं ।
जैसे - सीता के लिए राम ने रावण को मारना पड़ा ।, मैं स्कूल जाकर पढूंगा ।
क. समानाधिकरण के चार भेद होते है -
१. संयोजन वाचक
२. वियोजन वाचक
३. विरोध वाचक
४ . परिमाण वाचक
ख. व्यधिकरण के चार भेद होते हैं -
१. कारण वाचक
२. संकेत वाचक
३. उद्देश्य वाचक
४. स्वरूप वाचक
जैसे - राम और श्याम बाजार जाते हैं ।
समुच्यवाचक के दो भेद होते हैं -
क. समानाधिकरण समुच्य - जो दो वाक्यों, उपावक्यो को आपस में जोड़ता हो । जिसमें दोनों पद समान हो, उसे समानाधिकरण समुच्य कहते हैं ।
जैसे - राम और कृष्ण महान थे । , राधा और कृष्ण एक ही थे।
ख. व्यधिकरण समुच्य - जिसमें एक प्रधान पद हो और दूसरा सरल या सहायक पद को आपस में जोड़ने वाले शब्द को व्यधिकरण समुच्य कहते हैं ।
जैसे - सीता के लिए राम ने रावण को मारना पड़ा ।, मैं स्कूल जाकर पढूंगा ।
क. समानाधिकरण के चार भेद होते है -
१. संयोजन वाचक
२. वियोजन वाचक
३. विरोध वाचक
४ . परिमाण वाचक
ख. व्यधिकरण के चार भेद होते हैं -
१. कारण वाचक
२. संकेत वाचक
३. उद्देश्य वाचक
४. स्वरूप वाचक
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