गणिनाथ जी शायद हमारे बीच अपरिचित हो । परंतु हिन्दू दर्शन वेबसाइट के माध्यम से इनकी कुछ कविताएं हमलोगों ने जरूर पढ़ी होगी।
गणिनाथ जी मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित रेवा ग्राम के निवासी है । एक सुयोग्य एवं कर्मठ शिक्षक / कवि । आपके कविताओं में ग्राम-गीत का मर्म छिपा होता है । आपने हास्य, व्यंग, धार्मिक, राष्ट्रवादी तथा गंगा मां के संबंधित अनेकों कविताएं लिखी है । ग्रामीण जीवन पद्धति ही प्रेम एवं वास्तविक जीवन है । आपने प्रत्येक कविताओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया है । ग्रामीण जन जागरण के लिए आपकी कविताएं अनमोल हैं ।
स्मरणीय है !
कहते हैं - " गंगा किनारे वह पवन सा मंदिर ।
वर्षों से मै इसका सेवक रहा हूं ।
नहीं चाहिए मुझे धन और दौलत ।
मैं वर्षों से मां गंगा के गोद का भिखारी रहा हूं । "
लाल बहादुर शास्त्री के बारे में आपने क्या खूब लिखा है ?
विरले ही सौभाग्य जागता है धरती का
विरले ही नियति वैसी प्रतिमा गढ़ती है,
विरले ही आता है कोई दीदावर जग में
जिसको दुनिया लालबहादुर कहती है।
धन्य है भारत की भूमि
जिस पर ऐसे रत्न उपजते है,
जो राष्ट्रहित के लिए समर्पित हो
अपना सबकुछ ही तजते हैं ।
गणिनाथ जी मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित रेवा ग्राम के निवासी है । एक सुयोग्य एवं कर्मठ शिक्षक / कवि । आपके कविताओं में ग्राम-गीत का मर्म छिपा होता है । आपने हास्य, व्यंग, धार्मिक, राष्ट्रवादी तथा गंगा मां के संबंधित अनेकों कविताएं लिखी है । ग्रामीण जीवन पद्धति ही प्रेम एवं वास्तविक जीवन है । आपने प्रत्येक कविताओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया है । ग्रामीण जन जागरण के लिए आपकी कविताएं अनमोल हैं ।
स्मरणीय है !
कहते हैं - " गंगा किनारे वह पवन सा मंदिर ।
वर्षों से मै इसका सेवक रहा हूं ।
नहीं चाहिए मुझे धन और दौलत ।
मैं वर्षों से मां गंगा के गोद का भिखारी रहा हूं । "
लाल बहादुर शास्त्री के बारे में आपने क्या खूब लिखा है ?
विरले ही सौभाग्य जागता है धरती का
विरले ही नियति वैसी प्रतिमा गढ़ती है,
विरले ही आता है कोई दीदावर जग में
जिसको दुनिया लालबहादुर कहती है।
धन्य है भारत की भूमि
जिस पर ऐसे रत्न उपजते है,
जो राष्ट्रहित के लिए समर्पित हो
अपना सबकुछ ही तजते हैं ।

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