बुधवार, 25 अक्टूबर 2017

घाट पर हाथी-कोशिया भरात बा। गणिनाथ साहनी

घाट पर हाथी-कोशिया भरात बा।
         *****

गाँव-गिराव में श्रद्धा उमड़ल
गंगाघाट बा सजल-धजल
निरियल, केला, ऊँख, ठेकुआ भरल दउरा से
सुरुजदेव के अर्घ पड़ल।

लईकन सभे नया पहिन के
चहलकदमी कईले बा,
बुढ़वन के भी धोती-कुरता नया बा
जवनकन लोग भी नया-नया सिअईले बा।

छठी मईया के गीत-भजन से
घर-अंगना सुहावन लागत बा,
'केरवा जे फरेला घवद से'
छठव्रती सभे गावत बा।

चारोओर सुहावन लागे
घाट पर हाथी-कोशिया भरात बा,
डूबइत-उगइत दूनो बेरिया
आदितमल के गोर लगात बा।

छठ पर्व से जीवन में
नया ऊर्जा के संचार होखेला,
सुरुजदेव के कृपा होला
सालभर दुख-दलिद्दर के
आदितमल रोकेला।

छठी मईया के कृपा अपने सब पर लगातार बनल रहे। इहे कामना के साथ-

              अपने के
      गणिनाथ सहनी, रेवा

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