दारुल उलूम जकरिया के वरिष्ठ उस्ताद और फतवा ऑन मोबाइल सर्विस के चेयरमैन मुफ्ती अरशद फारूकी के अनुसार ईमान शब्द सिर्फ मुसलमानों के लिए ही प्रयुक्त और उपयुक्त है इसलिए इमान शब्द और ईमानदारी शब्द का प्रयोग हिंदुओं के लिए होना अप्रत्याशित और अवांछित है विकपतः निष्ठावान या नैषि्ठक शब्द का प्रयोग आपेक्षिक है |
मंगलवार, 24 अक्टूबर 2017
सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान
भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ | इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है | तो मुझे भी संविधान के धारा 19 क...
-
मनुष्य की सामाजिक और सांस्कृतिक परंपरा के स्थान परिवर्तन को समाजीकरण करते हैं. यह एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक होता है. इस में संचार की महत्व...
-
रामधारी सिंह " दिनकर " जी की कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ । ये नव वर्ष हमे स्वीकार नहीं है अपना ये त्यौहार नहीं है अपनी ये तो र...
-
कई लोगों ने व्यक्तिगत तौर पर मुझे सलाह दी कि तुम्हारे आलेख सिर्फ कांग्रेस के ही विरुद्ध प्रकाशित होते रहते है| ऐसे में तुम्हारे तथ्य प...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें