सोमवार, 2 जुलाई 2018

वित्तीय संकट छात्रावास बंदी से खत्म होगी - हिंदी विश्वविद्यालय!

इन दिनों वित्तीय समस्याओं से घिरा विवि अजीबो-गरीबों फैसले लेकर समस्या का समाधान कर रहा| इस पर एक पुरानी कहावत मुझे याद आ गयी - " ना रहे बांस ना बाजे बासुरी!" बहुत दु:खी मन से कुछ आलोचना करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ|

जितेश कुमार 

 अ.बि.वा.हि.वि.वि.

इसके लिए मैं अटल बिहारी वाजपेयी हिन्दी विश्वविद्यालय, भोपाल के प्रशासनिक इकाई का ऋणी रहूंगा| फिल्मों में बहुत देखा था किस प्रकार पैसा के आभाव में| या किसी अन्य कारण से किराया नहीं देने पर कुछ बुद्धिमान लोग निवेदन करते है| बाईज्जत अहिंसक रूप से मार-पीट किया जाता है| घर के बरतन-बासन, अन्य सामग्री को सावधानीपूर्वक घर से बाहर फेका दिया जाता है| जिसके बाद बेवस व्यक्ति दुखित स्वर में बड़ा सा घर, जिससे उसे निकाला नहीं जा सकता| उस तरफ इशारा करता है, आकाश और भूमी! और फूटफाट पर गुजर बसर करता है|
मगर किराया अगर एडवांस मिला हो फिर भी उसे विशेष परिस्थिति में इसप्रकार के प्रयास झलने को मिलता है| उस समय मालिक कोई बड़ा होटल या कल-कारखाने के उद्देश्य से अहिंसक रूप से डरा-धमा कर, मार-पीट कर घरेलू सामग्री को सावधानीपूर्वक तोड़ कर, फूटफाट पर रहने को मजबूर करता है| खास बात है कि इन प्रकिया में हिंसकरूप से मकान  खाली करने के कुछ समय दिये जाते है, लेकिन जब हिंसात्मक रूप से मकान तय समय पर नहीं खाली हुआ तो उपयुक्त शांतिप्रिय प्रकियां की जाती है| जिसके लिए के समाननीय नागरिक बुलाये जाते है, जिनका यही कार्य होता है| अब्बू जल्लेला, अहमद़ मियां, झंकार भाई, करतार भाई जैसे नामचीन व्यक्ति आते है और मकान चन घंटो में खाली! लेकिन तय समय से पहले ऐसा नहीं होता! आज जिस प्रकार विवि ने  छात्रावास को खाली किया| ऐसा तो फिल्मों में भी नहीं देखा| सभी छात्र तैयार और प्रतिबन्ध थे| हमें विवि के तरफ से 30 जून का समय दिया गया था| लेकिन 22-23 जून से ही विवि के प्रशासनिक इकाई ने छात्रावास खाली करने लिए प्रेेसर बनाने लगे| यहां के गार्ड साहब हमें जल्द खाली करने के लिए फरमान देने लगे| 25 जून को ही छात्रावास खाली करने के बारे में सुनकर स्वमं मेरी बात विवि के कुलपति जी हुई उनके आश्वासन से लगा की 30 जून तक कोई संकट नहीं होगा| मगर कल 29 जून को ही जब मैं स्वयं विवि में था तो छात्रावास खाली करने की पुरी व्यवस्था के साथ विवि द्वारा निर्देशित व्यक्ति पहूंच गये| जिसके बाद मेरी बात कुलसचिव और बाद में कुलपति जी से भी हुई| मगर क्या फायदा जब इसतरह ही निकालनी थी तो 25 को निकाल देते| उस समय छात्रावास में था| अपना समान तो व्यवस्थित कर लेते| 

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