शनिवार, 1 सितंबर 2018

राहुल गांधी शिव भक्त या चीन भक्त? - जितेश सिंह

कैलाश मानसरोवर यात्रा में उलझते जा रहे राहुल गांधी| भक्ति मार्ग बड़ा कठिन होता है,  राहुल गांधी का राजनीति व भक्ति दोनों हमेशा विवादों से घिरा रहा है| चाहे वो गुजरात चुनाव के दौरान सोमनाथ मंदिर में गैर-हिन्दू डायरी में हस्ताक्षर करने का मामला हो या हाल फिलहाल में कैलाश मानसरोवर का|
वैसे भी बच्चों की तरह बयानबाजी और भाषण देते है, राहुल गांधी| बोलने वाले तो यहां तक बोलते है कि राहुल गांधी अभी राजनीति पाठशाला में पढ़ने वाले विद्यार्थी है और राजनीति विश्वविद्यालय के कुलपति बनने की ईच्छा रखते है| उनको राजनीति सीखने की आवश्यकता है| एक जिद्दी बालक की तरह नहीं, सभ्य बालक की तरह वरिष्ठ, अनुभवी, भारतीय राजनीति की समझायिस रखने वाले पार्टी के अन्य किसी कार्यकर्ता को अवसर देना चाहिए| इससे कांग्रेस पर परिवारवाद और वंशवाद का विरोध भी थम जायेगा| राहुल गांधी जब अपने भाषण में यह बात स्वीकार करते आये है कि उनमें अनुभव की कमी है,  सहनशीलता, सहजता से बात करना, चिंतन और मंथन करना,राष्ट्रभक्ति, समरसता और हिन्दूत्व की विचारधारा की समझ भाजपा, मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सीख रहे है| यह एक बचकाना वाला भाषण था| इसका हस्य जितना सोशल मीडिया पर हुआ, उतना ही कड़ी आलोचना राजनीति विशेषज्ञों ने की| उन्होंने कहा इस प्रकार का भाषण लोकसभा बोलना कांग्रेस नेता की अपरिपक्वता को बतलाता है| राजशाही व्यवस्था में शासक का पुत्र युवराज और राजा बन जाये यह उतना आसान नहीं, सबसे बड़े लोकतांत्रिक राष्ट्र का प्रधानमंत्री बनने की बात है| जिसमें बच्चकाना हरकते नहीं गंभीरता हो| अनुभव की समझ होनी चाहिए, जिसे ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी क्षेत्रों की जानकारी होनी चाहिए| जिसे आम जन जीवन की जानकारी हो| जो राजपथ से राजपथ पर रहने वाला नहीं, जनपथ से राजपथ वाला हो| जो बिना जानकारी के लिखे गये भाषण को पढ़कर समोहन करने वाला नहीं,  गरीबी और बेरोजगारी की परिभाषा याद करने वाला नहीं, उससे साक्षात्कार करने वाला हो| भाषण याद करके समोहित करने का कोई पैतरा काम नहीं आयेगा|
कांग्रेस विवश है, ऐसा लगता है जैसे कूटनीति हो या राजनीति सभी गांधी परिवार को समर्पित कर दिये है|
कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर राहुल गांधी निकल चुके है| सुत्रों की माने तो 12 सितम्बर को वो वापस लौटेंगे| वैसे यह यात्रा भी वाद-विवादो के घिरे में है| जहां भाजपा ने राहुल गांधी के यात्रा पर एक के बाद एक सवाल दागे वही उनके बचाव में भी कई बयान सामने आये| भाजपा ने कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान एयरपोर्ट पर चीनी प्रतिनिधित्व के मिलना गलत बताया तो वही राहुल को चाईनिज गांधी बता दिया| इसके साथ ही पूर्व के कई गांधी परिवार के संबंध पर भी बयानबाजी हुई| डोकलाम विवाद के समय चीनी आधिकारी से राहुल गांधी का मिलना,  2008 में ओलिंपिक के् दौरान चीन के निमंत्रण पर गांधी परिवार का चीन जाना और अंत में नेहरू की 'हिन्दी- चीनी भाई' की नीति को भी केन्द्रबिन्दु बनाकर भाजपा ने

राहुल और कांग्रेस को घेरना चाहा तो जवाब में यही आया शिव और भक्त के बीच जो आया भस्म हो गया| वही यह मुद्दा सोशल मीडिया पर तुल पकड़ा तो कई लोग की पोस्ट "राहुल गांधी शिव भक्त नहीं, चीन के भक्त है|" अब ये तो राहुल गांधी ही बतायेंगे वो किसके भक्त है?  लेकिन धर्म की राजनीति से सत्ता मिल जाए, यह भारत से लिए कोई नयी बात नहीं है|

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