मेधावी और समर्पिता राजकुमारी देवी को आज पूरा देश किसान चाची के नाम से जनता है| एक नजर किसान चाची के जीवन संधर्ष पर डाले तो राजकुमारी देवी से किसान चाची का सफर आसान नहीं था| आज से लगभग ४० साल पहले एक नई-नवेली दुल्हन राजकुमारी देवी की आनन्दपुर में शादी हुई| मुजफ्फरपुर, सरैया प्रखड के निकट बसा आनन्दपुर भले ही किसान चाची के लिए ससुराल था, लेकिन
उन्होंने इसे अपनी कर्मभूमि बनाया| जहाँ आज भी देश के ग्रामीण क्षेत्र में बहू घूँघट तक नहीं उठाती है| उन्हेंको घर के रसोई के अलावे कुछ भी करना मना ही होता है| ऐसे में आज से ४० वर्ष पहले किसान चाची के सामने भी कुछ इसी प्रकार की चुनैतियाँ थी| इसके बावजूद उन्होंने समाज के बीच अपनी अलग पहचान बनाई| कहते है ना - 'जो लोग धारा के विपरीत चलते है, वही इतिहास रचते है|' जीवन के रोजमर्रा में आने वाली तमाम अफवाहों की प्रवाह किये बिना किसान चाची अपने हौसले और अदम्य साहस के बल पर बढाती रही | उनसे बातचीत में मालूम पड़ा कि उस समय बाज़ार तो दूर बहू घर के बाहर या दरवाजा के चौखट पर पांव रखे तो राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है| ऐसे में सांस और बहू के बीच भारत -पाकिस्तान सीमा बिवाद छिड़ जाता था| वो आनंदपुर से बाहर बाजार में साईकिल चला कर सब्जी और घर के सामान लाने जाती थी| खेतीबाड़ी में नुपूर्ण और कई प्रकार के आचार को बनाने के कला की शौखिन राजकुमारी देवी अपने प्रयासों से लोगों के बीच सराहे जाने लगी| उन्होंने अपने पीहर के खेतीबाड़ी का भी भार अपने सर लिया और कृषि में जुट गयी| यही से शुरू हुआ राजकुमारी देवी से किसान चाची का नाम| किसान चाची आस-पास के तमाम महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गयी| ऐसे में राज्य और भारत सरकार की भी नजर उन पर पड़ी| उन्हें उनके अदम्य साहस और महिलाओं को उन्होंने जो स्व-विकास के रास्ते दिखाए है, उसके लिए कई बार पुरस्कृत किया गया है| बिहार सरकार ने उन्हे जहाँ किसान श्री से पुरस्कृत किया वही हाल में भारत सरकार ने किसान चाची को पद्म श्री के लिए नामित किया है| किसान चाची रजत शर्मा की पॉपुलर शो आप की अदालत में भी पहुंची| कौन बनेगा करोड़पति शो में भी अमता बच्चन ने उनकी खूब प्रशंसा की| देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी उनका आह्वान किया| आज देश दुनिया में बिहार के तमाम महिलाओं के उत्प्रेरक के रूप में पद्म श्री से सम्मानित राजकुमारी देवी सबकी किसान चाची है| जिन्होंने ने अँधेरा से लड़ा नहीं, कुप्रथा से कोई लड़ाई और युद्ध नहीं की; बस एक सकारात्मकता की दीपक जला कर समाज को प्रकाशित किया है| देश और बिहार को हमारी किसान चाची पर गर्व है|
उन्होंने इसे अपनी कर्मभूमि बनाया| जहाँ आज भी देश के ग्रामीण क्षेत्र में बहू घूँघट तक नहीं उठाती है| उन्हेंको घर के रसोई के अलावे कुछ भी करना मना ही होता है| ऐसे में आज से ४० वर्ष पहले किसान चाची के सामने भी कुछ इसी प्रकार की चुनैतियाँ थी| इसके बावजूद उन्होंने समाज के बीच अपनी अलग पहचान बनाई| कहते है ना - 'जो लोग धारा के विपरीत चलते है, वही इतिहास रचते है|' जीवन के रोजमर्रा में आने वाली तमाम अफवाहों की प्रवाह किये बिना किसान चाची अपने हौसले और अदम्य साहस के बल पर बढाती रही | उनसे बातचीत में मालूम पड़ा कि उस समय बाज़ार तो दूर बहू घर के बाहर या दरवाजा के चौखट पर पांव रखे तो राष्ट्रीय मुद्दा बन जाता है| ऐसे में सांस और बहू के बीच भारत -पाकिस्तान सीमा बिवाद छिड़ जाता था| वो आनंदपुर से बाहर बाजार में साईकिल चला कर सब्जी और घर के सामान लाने जाती थी| खेतीबाड़ी में नुपूर्ण और कई प्रकार के आचार को बनाने के कला की शौखिन राजकुमारी देवी अपने प्रयासों से लोगों के बीच सराहे जाने लगी| उन्होंने अपने पीहर के खेतीबाड़ी का भी भार अपने सर लिया और कृषि में जुट गयी| यही से शुरू हुआ राजकुमारी देवी से किसान चाची का नाम| किसान चाची आस-पास के तमाम महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन गयी| ऐसे में राज्य और भारत सरकार की भी नजर उन पर पड़ी| उन्हें उनके अदम्य साहस और महिलाओं को उन्होंने जो स्व-विकास के रास्ते दिखाए है, उसके लिए कई बार पुरस्कृत किया गया है| बिहार सरकार ने उन्हे जहाँ किसान श्री से पुरस्कृत किया वही हाल में भारत सरकार ने किसान चाची को पद्म श्री के लिए नामित किया है| किसान चाची रजत शर्मा की पॉपुलर शो आप की अदालत में भी पहुंची| कौन बनेगा करोड़पति शो में भी अमता बच्चन ने उनकी खूब प्रशंसा की| देश के लोकप्रिय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी उनका आह्वान किया| आज देश दुनिया में बिहार के तमाम महिलाओं के उत्प्रेरक के रूप में पद्म श्री से सम्मानित राजकुमारी देवी सबकी किसान चाची है| जिन्होंने ने अँधेरा से लड़ा नहीं, कुप्रथा से कोई लड़ाई और युद्ध नहीं की; बस एक सकारात्मकता की दीपक जला कर समाज को प्रकाशित किया है| देश और बिहार को हमारी किसान चाची पर गर्व है|

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