गुरुवार, 7 मार्च 2019

बाल विवाह के विरुद्ध एक पहल - स्पंदन

आज शाम 4:30 से स्पंदन, एनएच-12 क्रियेटिव वूमेंस क्लब, बीएमएमएलएफ, वूमेन प्रेस क्लब और नाजिया वेलफेयर के तत्वधान में महिला दिवस कि पूर्व संध्या पर 'बाल विवाह के विरुद्ध एक पहल' संगोष्ठी का आयोजन किया गया था. इसमें कई विषय विशषज्ञों ने भाग लिया और कड़े स्वर में बाल विवाह के विरुद्ध अपनी बात रखी. इसी कड़ी में अपने विचार को साझा करते हुए डॉ. अंशुल उपाध्याय जम्मू-कश्मीर से शैन्य विज्ञान की शोधार्थी ने कहा कि ग्रामीण या पहाड़ी क्षेत्र की महिलाएं समय से जुड़ी नहीं होती है. उनका जीवन झुग्गी-झोपड़ियों से बाहर निकल ही नहीं पता है. ऐसे में
सरकार और सामाजिक संस्था को उक्त क्षेत्रों मे कार्य की अधिक जरुरत है. आर्य श्रद्धा (बाल आयोग,मप्र) ने सरकार द्वारा बाल विवाह के विरुद्ध चलाये जाने वाले मुहीम की बात कही और बताया बाल विवाह की दर में लगातार कमी आ रही है. सरकारी और गैर सरकारी संस्था की मदद से इसे जल्द जड़ से ख़त्म करना होगा. वरिष्ठ लेखक घनश्याम सक्सेना ने कहा आज भी प्रबुद्ध समाज और शिक्षित महिलाएं अपने घरों में सशक्त नहीं है, उनका भी स्वर घरों में दबाया जाता है. अगर माँ खुद निर्णय कर ले कि मेरी शांतन अभी शिक्षा ग्रहण करेंगी है तो घर में कितने भी रूढ़िवादी लोग है वो विवाह नहीं करवा सकेंगे. ऐसा प्रयास उन महिलाओं की तरफ से होनी चाहिए लेकिन उनकी
उदासीनता के कारण मुख्य रूप से जिम्मेदार वो भी है. यही टीवी रिपोर्टर श्रुति कुशवाहा ने कहा स्त्री को लेकर सामाजिक धरना को बदलना होगा. बेटी बोझ नहीं होती है. दहेज़ जैसी कुप्रथा ने बाल विवाह को बल दिया है. डॉ. कनिका शर्मा (राज्य स्वास्थ्य आयोग) ने कम उम्र में शादी के कारण होने वाले परेशानियों की  बात कही. उन्होंने आकड़ो के हवाले से बताया कि कुपोषण जैसी गंभीर समस्या का मूल बाल  विवाह ही है. कम उम्र में विवाह  के कारण नवजात शिशु भी अस्वस्थ पैदा लेते है. सुश्री सुमन त्रिपाठी वरिष्ठ पत्रकार
ने ऐसे कार्यक्रम को ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रो में करने पर जोड़  दिया. उन्होंने कहा सरकार कि योजना की तरह यह प्रयास केवल  टेबल कुर्सी तक ना सिमट कर रहे इसके की जरुरी है. सामाजिक लोग धरातल तक जाये और वहां लोगों को जागरूक करें. स्पंदन संस्था में सक्रिय रहे पेशे से वकील जी.के. छिब्बर ने कहा क़ानून से नहीं सामाजिक जागरूकता से बाल विवाह ख़त्म होगा. ब्रम्हा कुमारी ईश्वरीय विवि से सुश्री बहन बी.के. द्वारिका ने कहा पुराणों में बाल विवाह का कोई उल्लेख नहीं है. विदेशी आक्रांताओं के कारण बाल विवाह शुरू हुआ. कन्याओं को बचाने हेतु कालांतर में, ताकि कोई विदेशी उसकी अस्मत ना लुटे उसका अपहरण ना करें. इसी कारण इसकी शुरुआत हुई. अब इसे नैतिक मूल्यों का ज्ञान और शिक्षा के दूर करने की पहल होनी जरुरी है. डॉ. लक्ष्मी नारायण पाण्डेय ने कहा यह
 सामाजिक विषय है क़ानून के साथ समाज का प्रबोधन जरुरी है. डॉ. आर.एच. लता ने कहा बाल विवाह को रोकने के  लिए अब सख्ती से क़ानून का पालन जरुरी है. चिन्मथी भटनागर परिवार अपनी जिम्मेदारी समझे और उसे निभाएं. इस कार्यक्रम में राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ता भी मौजूद रहे भाजपा से नेहा बग्घा ने  कहा केंद्र की भाजपा की सरकार बाल विवाह के विरुद्ध पूरी तरह कमर कसी हुई है. विगत कुछ सालों में बाल विवाह में कमी आयी है. मोदी जी कि बेटी पढ़ाओ और बेटी बचाओ योजना इसी प्रयास को फलीभूत कर रही है. इसमें और शीघ्रता की जरुरत है. कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता सुश्री संगीता शर्मा ने कहा कि मप्र सरकार बाल विवाह के विरुद्ध सख्त क़ानून बनाएंगी ऐसी मैं हमारी सरकार  से दरख्वास्त करुँगी. कुछ इसी प्रकार के कार्यक्रम में उपस्थित हुए अन्य लोगों के विचार रहे थे. आज के  इस संगोष्ठी में अनेक मीडिया के मित्र और सामाजिक बुद्धिजीवी भी मौजूद रहे. सुश्री  बीणा श्रीवास्तव, डॉ. अनिल सौमित्र (स्पंदन संस्था), रितु शर्मा, डॉ. प्रतिभा चतुर्वेदी, उमाशंकर पटेल, गीत धीर, अभिताश कुमार जायसवाल, हरीश बरैठीया, ऋषि सिंह बघेल, डॉ. ऋतु यादव, बी.के. किरण बहन, सिद्धांत यादव, जितेश कुमार अन्य रहे.


कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान

भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ |  इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है |  तो मुझे भी संविधान के धारा  19  क...