जीन्स छोड़ के पहिन साड़ी, न त वोटवा ख़राब हो जाई, ये बहिन लगाव माथे पर चंदनवा न त बीजेपी के दुबारा सरकार बन जाई|
कुछ स्वतंत्र विचार वाले लोग मुझे पर संदेह करने लगे है, कही मैं राष्ट्र्वादी और भारत माता की जय कहने वाला अपराधी तो नहीं| कपिल सिब्बल के बयान को ढाल बनाकर मैं अपनी निष्पक्षता को आपके बीच रखता हूँ| जिस बयान में सिब्बल कांग्रेस पर लगे परिवारवाद के सबसे बड़े आरोप को ख़ारिज करता है कहता कि संघ (RSS) परिवारवाद का सबसे बड़ा आरोपी है| सिब्बल ने कहा कि किसी भी राज्य में बीजेपी जीते इनके अनुसार ही मुख्यमंत्री तय होता है| सिब्बल जैसे बड़े राजनेता को भी संघ के प्रचारकों का अविवाहित रहकर, हिन्दू समाज को संगठित करना ही एकमात्र ध्येय है पता है| इसके बावजूद परिवारवाद का यह मिथ्या आरोप क्यों? किसी मीडिया संस्था के लोगों ने नहीं पूछा और जिस मीडिया मंच से यह बेतुका बयान दिया जा रहा था वह भी इस बयान पर स्पष्टीकरण नहीं मांगी| किस आधार पर यह आरोप आप लगा रहे है? जबकि नेहरू से राहुल तक के परिवारवाद देश के सामने है|
परिवारवाद के आरोपों से तिलमिलाहट ने सिब्बल जैसे चतुर चाटुकार को असहज कर दिया, तभी परिवारवाद का आरोपी संघ को बता रहा है| संघ राजनीति में सीधे रूप से सक्रीय नहीं है, जब कि संघ में वह काबलियत है कि देश की राजनीतिक बागडोर संभाल सकता है| संघ के सरसंघचालक (संघ प्रमुख) मोहन भागवत ने अपने एक व्याख्यान में कहा था कि सभी प्रकार से श्रेष्ठ और नेतृत्त्व में निपुण होने के बावजूद हम राजनीति नहीं करते है, क्योंकि हमारा उद्देश्य राजनीति सत्ता पर काबिज होना नहीं, बल्कि भारतीय समाज (हिन्दू समाज) को संगठित करना, संस्कृति की उत्थान और भारत को परम वैभव बनाना है| एकमात्र इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु देश भर में संघ हजारों प्रचारक और करोड़ों स्वयंसेवक की अनवरत साधना से दिन रात कड़ी से कड़ी संघर्षों और आलोचनाओं के बावजूद सतत समाज के बीच कार्यरत है|
इसके बावजूद संघ को राजनीति में घसीटा जाता है| कांग्रेसी और वामपंथी संघ की आलोचना करते थकते नहीं है| क्योकि संघ भारत को केवल राजनीतिक लाभ बनाने वाले पार्टियों के लिए संघ एक चुनौती है, यही कारण है कि संघ को राजनीति में घसीटे जाता है| इतिहास के तहखाने को कुदेरेंगे तो सामने आयेगा कि नेहरू, संघ के घोर विरोधी थे और समाजवाद के पुजारी| हिन्द-चीन भाई-भाई का अलाप जपने वाले इस मुर्ख प्रधानमंत्री का भ्रम 1962 के युद्ध में टूट गया| उस वक्त मुसीबत की घरी में वामपंथी दल (सीपीएम) जिस पर नेहरू को आँख मुंद कर भरोसा था ने चीनी सैनिको को खून देने के लिए देश में प्रचार-प्रसार किया और भारतीय सैनिकों को खून मिले इसके विरुद्ध भी सभाएं और लोगों को बहकाने का कार्य किया था| इसके बाद नेहरु भी 'संघम शरणम् गच्छामि' संघ के पास पहुंचे| उस समय गुरुजी सरसंघचालक (संध प्रमुख) थे| इनके एक आह्वान पर देश भर के स्वयंसेवक सुबह कतार में खड़े होकर रक्तदान के लिए ऐसे पंक्ति में लगे थे, जैसे मुफ्त में सरकारी राहत बांटी जा रही हो| इतना ही नहीं युद्ध के दौरान कई शहर के ट्राफिक पुलिस का भी कार्य स्वयंसेवकों ने संभला था| 1947 में पकिस्तान ने आचानक कश्मीर पर चढ़ाई की थी| उस वक्त भी संघ ने एयरपोर्ट जमे बर्फ हटाने का कार्य किया| सैनिकों के लिए भोजन और हथियार भी युद्ध के दौरान पहुंचाने का कार्य किया था| उस समय कांग्रस की सरकार थी, जब-जब देश संकट में पड़ा, संघ ने सरकार की मदद की| नेहरु संघ के राष्ट्रवादी विचार से इतना प्रभावित हुए ही 1962 के गणतंत्र दिवस के परेड में सामिल होने का निमंत्रण भेजा था| अंत समय में नेहरू को सद्बुद्धि मिली और वह संघ के शरण में पहुंचा|
आज की कांग्रस क्या संघ के राष्ट्रवाद को समझती है, नहीं| क्योकि कांग्रेस की राजनीति लम्बे समय तक ऐसे व्यक्ति के हाथ में था जो भारतीय ही नहीं, यही एकमात्र कारण है की कांग्रेस अपना आत्मविश्वास खो चुकी है| ऐन-केन पराकेन सत्ता पाने के लिए अंग्रेजों की निति 'फुट-डालो, राज करो' की भावना से कार्य कर रही है| यंहा तक की 9 फरवरी 2016 को JNU में कन्हैया कुमार, उमर ख़ालिद, अनिर्बान भट्टाचार्य के अगुवाई में देशविरोधी नारे और प्रदर्शन किये गये थे| 9 फ़रवरी का दिन इन देशद्रोहियों के द्वारा इसलिए तय गया था कि इसी दिन देश के सर्वाच्च सदन पर हमला करने वाले अफ़जल गुरु आतंकी को देश की सर्वाच्च अदालत ने फांसी की सजा दी थी. आतंकी अफ़जल की बरसी के दिन आयोजन करना ही अपने आप में देशद्रोह का बहुत बड़ा सबूत है|इसके बावजूद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल, (माफ़ कीजिएगा मैं राहुल गाँधी नहीं बोलता हूँ गाँधी उपनाम केवल देश को भ्रमित करने के लिए इन्होने लगाया है| मीडिया यह उपनाम चाटुकारितावश या चर्चित है इसके कारण प्रयोग करती हो) जेएनयू गया और यही प्रमाण था कि राजनीति लाभ के लिए राहुल किसी भी हद तक जा सकता है| अय्यर और नवजीत सिंह सिद्धू जैसे पाकिस्तान परस्त नेता| जिसे लात मार कर पार्टी से हटाना चाहिए, इसके हाँ में हाँ भरते रहा है केवल मुस्लिम तुष्टिकरण के लिए| आने वाले लोकसभा चुनाव 2019 के धोषणा पत्र में देशद्रोही कानून धारा 124 को हटाने और सैन्य शक्ति को कमजोर करके कांग्रेस ने यह आह्वान सीधे तौर पर दिया है, 'भारत के टुकड़ें' करने के इरादे से चुनाव में समूचे देशद्रोही दल-बल कांग्रेस के हाथ को थामे| वही हिन्दुओं को भ्रमित करने के लिए कल तक जीन्स पहनने वाली प्रियंका वाड्रा आज माथे पर चन्दन और साड़ी पहने पूर्ण भारतीय बने धूम रही है| दोगली पात्रता रखने वाले गाँधी फैमली किस जाति धर्म के है? जरा सोचे!
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