शनिवार, 18 मई 2019

जल बचाव जरूर पर फेसबुक नहीं

जितेश कुमार

बाहर निकलना मुश्किल है
लू चल रही है
लोग बेहाल है गर्मी से
शहरों में पानी की कमी है
और तुम आधे घंटे से नहा रही हैं

एक पक्षी छत पर गिरा है प्यासा
पाथिक प्यासा भटक रहा हैं
एक बूंद पानी आसमान से गिरे
इस आस में धरती जी रही..
और तुम आधे घंटे से नहा....

झरना खोले पानी बहा रही है
धरती की प्यास समझ नहीं पा रही
अनमोल जल व्यर्थ बहा रही
 फेसबुक पर जल बचाओ
अभियान चला रही हैं
 खुद आधे घंटे से नहा नहीं..

 लगता है चुनाव लड़ने जा रहे हैं
 वादे के विपरीत हैं इरादे
 तभी तो सेव वाटर चिल्ला रही
 और आधे घंटे से नहा रही..

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