सोमवार, 13 मई 2019

राजनीति समझाता हूं 
साजिश भी जनता हूं 
शांत हूं कोई कमजोर है 
संस्कार ही कुछ ऐसा है 
अभी मैं छुट्टी पर हूं... 

जल्द कुछ नया करूँगा 
सबसे अलग चलूँगा 
मंत्र है, वही 
अखंड भारत 
एक वही साधना में व्यस्थ 
और अभी मैं छुट्टी पर हूं 

महान ध्येय के लिए 
त्याग बड़ा करूँगा 
मरता छोटी बात है 
मैं पूरा जीवन लगा दूंगा 
आज आत्म निरक्षण के लिए 
अभी मैं छुट्टी पर हूं 

ज्ञान को स्वतंत्र 
मन को बांधना है 
मार्ग दुर्गम है 
कटरिले है
नग्न पैर चलाने के लिए 
हौंसला जुटाऊंगा 
अभी मैं छुट्टी पर है

यह कोई आम छुट्टी नहीं 
जहां मनोरंजन हो 
जल्द बंधन का मोह त्याग 
मैं आता हूं, एक दर्शन सिखने..
अभी मैं छुट्टी पर हूं

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