बुधवार, 9 अक्टूबर 2019

सुपौल में बत्ती गुल की समस्या से परेशान आम जनता, मौन राजनेता

जितेश कुमार

सुपौल में घंटों बिजली गायब रहने से नगरवासी परेशान है। बीते कुछ महीनों से सुपौल शहरी क्षेत्र में अचानक कई घंटों तक बिजली गुल रहती है। सुबह जब बिजली की लोगों को अधिक आवश्यकता पड़ती है, भोजन बनाने, पानी भरने, कपड़ा साफ करने में ऐसे समय में बिजली आचानक गुल हो जाती है। और पूरे दिन दर्शन नहीं देती है। शाम में जब बच्चे को पढ़ना होता है, घंटों तक बिजली नहीं आती है। शहरी क्षेत्र की हम बात करें
तो गर्मी से राहत के लिए हो या प्रकाश के लिए लोगों के पास एक ही व्यवस्था होती है बिजली।  इनवर्टर भी होता है लेकिन बड़े लोगों के घर में शहरी झुग्गी झोपड़ी से लिए तो बिजली ही सब कुछ है। इसको  छोड़कर कोई दूसरा विकल्प नहीं है। अब तो बिजली विभाग के इस रवैये से इन्वर्टर भी ठप हो गई है। ऐसे में विभाग के प्रति लोगों में आक्रोश है, व्यवस्था को लेकर लोगों में निराशा है, असंतोष है। साथ ही कभी- कभी बिना पूर्व सूचना के पूरा पूरा दिन बिजली गायब रहता है ऐसे में भोजन, पानी, नहाना, स्कूल, दफ्तर सभी कामों में देरी होने स्वाभाविक ही है। बच्चे समय से तैयार होकर स्कूल नहीं पहुंचते तो कर्मचारी दफ्तर नहीं पहुंचते है। लोगों का कहना है कि बिजली ही काटनी है तो उसकी पूर्व सूचना उनको होनी चाहिए। साथ ही सुबह-सुबह बिजली नहीं गुल होनी चाहिए। किसी हेतु बिजली भी काटना है तो दस बजे के बाद कटनी चाहिए। ताकि उनका प्रमुख और दैनिक कार्य अवरोध नहीं हो। विभाग के बड़े-बड़े अधिकारियों की मनमानी के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।  यहां के स्थानीय विधायक व सांसद महोदय भी इस गंभीर विषय पर अब तक तो मौन ही है। और होंगे भी उनको तो किसी प्रकार की दिक्कत नहीं होती है, जरनैटर होता है बिजली जाते ही जरनेटर स्टार्ट हो जाता है। ए.सी. में रहते हैं। ऐसे में गरीबों के मसीहा बनने वाले नेताओं को भी सोचना चाहिए कि पिछले कई महीनों से सुपौल में बिजली की समस्या से लोग जूझ रहे हैं। जनता के प्रतिनिधि होने के कारण उनको भी इस विषय पर आवाज उठाने का अधिकार है किंतु अब तक उनके तरफ से ऐसा कुछ भी प्रतिक्रिया नहीं आया है क्योंकि शायद अभी चुनाव का टाइम नहीं आया है।

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