गुरुवार, 1 मार्च 2018

आओ मिलकर होली मनाए! - जितेश हिन्दू

मन में रंग बसाये,               
जितेश हिन्दू
         
उमंग नया लावे|
पुर्ण हर्षित होकर,
विवेक को सप्तरंग बनावे|


होली है,
सब झंझावट भूलकर,
आओ मिलकर गुलाल उड़ाए|
केवल रंगों का हेर-फेर नहीं,
दिल को दिल से मिलाए|


सोचो!
इसिलिए तो शायद!
हमारे पूर्वजों ने होली मनाई थी|
होलिका जली थी, भक्त पहलाद
को जीवन मिला|
सक्षात् सत्य अग्नि से खेला,
तभी तो अगले दिन सबने खुशियाँ
मनाई थी|


क्यों ना,
यही परंपरा दोहराये
इस बार मन की होलीका जलाए,
अग्नि में तप कर पहलाद बने|
आओ मिलकर होलिका जलाए!
आओ मिलकर होली मनाए!

                         - जितेश हिन्दू

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