मन में रंग बसाये,
उमंग नया लावे|
पुर्ण हर्षित होकर,
विवेक को सप्तरंग बनावे|
होली है,
सब झंझावट भूलकर,
आओ मिलकर गुलाल उड़ाए|
केवल रंगों का हेर-फेर नहीं,
दिल को दिल से मिलाए|
सोचो!
इसिलिए तो शायद!
हमारे पूर्वजों ने होली मनाई थी|
होलिका जली थी, भक्त पहलाद
को जीवन मिला|
सक्षात् सत्य अग्नि से खेला,
तभी तो अगले दिन सबने खुशियाँ
मनाई थी|
क्यों ना,
यही परंपरा दोहराये
इस बार मन की होलीका जलाए,
अग्नि में तप कर पहलाद बने|
आओ मिलकर होलिका जलाए!
आओ मिलकर होली मनाए!
- जितेश हिन्दू
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| जितेश हिन्दू |
उमंग नया लावे|
पुर्ण हर्षित होकर,
विवेक को सप्तरंग बनावे|
होली है,
सब झंझावट भूलकर,
आओ मिलकर गुलाल उड़ाए|
केवल रंगों का हेर-फेर नहीं,
दिल को दिल से मिलाए|
सोचो!
इसिलिए तो शायद!
हमारे पूर्वजों ने होली मनाई थी|
होलिका जली थी, भक्त पहलाद
को जीवन मिला|
सक्षात् सत्य अग्नि से खेला,
तभी तो अगले दिन सबने खुशियाँ
मनाई थी|
क्यों ना,
यही परंपरा दोहराये
इस बार मन की होलीका जलाए,
अग्नि में तप कर पहलाद बने|
आओ मिलकर होलिका जलाए!
आओ मिलकर होली मनाए!
- जितेश हिन्दू

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