यह फागुन भी चला गया
कुछ रंग के छिटे डाल के
हरा, बैगनी, लाल, गुलाबी
पीला रंग कमाल के।
यह फागुन भी चला गया
कुछ रंग के छिटे डाल के।
सोचा था सराबोर करेंगे
सर से लेकर पाँव तक
खूब मनेगी होली अबकी
शहर से लेकर गाँव तक।
लेकिन वो दुबके हीं रह गए
अपने घर के कोने में
और हो गई शाम तो हम भी
रंग लग गए धोने में।
शाम होते ही सन्नाटा था गाँव में
न फाग, न चैता
न डफ, न डफाली
नही गुंज ढ़ोलक-झाल के।
यह फागुन भी चला गया
कुछ रंग के छिटे डाल के।
- गणिनाथ सहनी, रेवा
कुछ रंग के छिटे डाल के
हरा, बैगनी, लाल, गुलाबी
पीला रंग कमाल के।
यह फागुन भी चला गया
कुछ रंग के छिटे डाल के।
सोचा था सराबोर करेंगे
सर से लेकर पाँव तक
खूब मनेगी होली अबकी
शहर से लेकर गाँव तक।
लेकिन वो दुबके हीं रह गए
अपने घर के कोने में
और हो गई शाम तो हम भी
रंग लग गए धोने में।
शाम होते ही सन्नाटा था गाँव में
न फाग, न चैता
न डफ, न डफाली
नही गुंज ढ़ोलक-झाल के।
यह फागुन भी चला गया
कुछ रंग के छिटे डाल के।
- गणिनाथ सहनी, रेवा

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