चिठ्ठी ना कोइ सन्देश, जाने वो कोन सा
देश, कहा तुम चले गये....
15 अगस्त से
ही अटल जी की स्वास्थ्य बिगड़ने की खबर आ रही थी| उस दिन देर
रात तक न्यूज देखता रहा, मोबाईल से
अपडेट लेता रहा| कल 16 अगस्त को
हौसले
और सिद्धांत हिमालय जैसे अडिग थे| जिस लोकतंत्र
की निष्पक्षरूप उन्होने सेवा की| राष्ट्र सेवा
को ईश्वरीय सेवा मानकर उसमें पुरी जिन्दगी झोक डाली हो| वैसे मनुष्य के निर्धन पर राष्ट्र ही नहीं, प्राकृति भी भाव-विभोर हो जाती है| मौसम ऐसी संदेश को प्रचारित कर रही जैसे कोई बड़ा
दुःख का पहाड़ टुट पड़ा है| अनजान और अबोध बालक भी अनुभव कर रहा, आज उसकी खुशी और खिलखिलाहट क्यू उसका साथ छोड़ रही
है?
सुबह से न्यूज देख रहा था| पल-पल की खबर पर नजर बनायें हुये था| सुबह से मेरे आंखों को भरोसा था, सब्र की घड़ी में हर पल अटल जी की कविताएं गुंजती
रही, उनके भाषण गुंजते रहे| साथ-साथ एक विश्वास भी बना रहा, इतना
विकसित मेडिकल साइंस हो गया है, उन्हें बचा लेगा| भले ही बेड पर
ICU में जीवित थे, यही बहुत बड़ी बात थी| 15 अगस्त शाम को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ने लगी| उनके बाद 16 अगस्त सुबह से ही प्रधानमंत्री के
अलावे कई अन्य दल के नेताओं का आना-जाना लगा रहा| शाम करीब 5:05 मिनट पर डॉक्टर ने उन्हे मृत घोषित कर दिया| देश पर मानो दुःख का पहाड टूट पड़ा हो| पुरा राष्ट्र स्तब्ध है, गहरे सदमें में है, क्यकि अटल जी गहरे नींद में चले ग़ये, जहां से लौट कर कोई नहीं आया| उनसे मेरा कभी किसी उद्धबोधन या कही साक्षात दर्शन
नहीं हुआ| टीवी, न्यूज इटरनेट
से कही अधिक बड़े-बुजुर्ग, शिक्षक, समाज से सबसे उस
राष्ट्रपुरूष की कहानी सुनते आया हूं| उनकी कविताएं
सुनी है|
भारतीय राजनीति में क्षितिज़ के समान विशाल और उदार चरित्र वाले
अटल जी एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे| उन्होंने जीवन
में जिस पथ को चुना, एक काली कोठरी थी, फिर भी बेदाग निकल गये। अटल जी
सिद्धांतों और कर्तव्य की अग्निपरीक्षा को तो पार गये, मगर ज़िन्दगी और नियती से
बीच शांत रह गये| आज हम सब को महानायक, हमारा यूगपुरुष छोड़ कर अनंत में विलीन हो
गया|
यह केवल राजनीति के लिए झटका नहीं, पत्रकारिता, साहित्यकार, कवि, राष्ट्रभक्त, जन-नायक, मार्गदर्शक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वमंसेवक हर रूप में महानता के शीर्ष पर रहे, एक
विराट व्यक्तित्व का निधन है| उनकी रिक्त
स्थान की भरपाई करना कई दशकों तक संभंव नहीं है| इस मृत्यु लोक
में लोखों जन्मे, लोखों की मृत्यु से आलिंगन हुआ और होता रहेगा, मगर अटल जी जैसा
व्यक्तित्व कई दशकों में जन्मते है|
जिस पथ पर उन्होंने चला, उनके विचार और
सिद्धांतों की आवश्यकता है, खासकर आज की राजनीति में| वह परम्परा जिसकी शुरूआत उन्होंने की थी आज उसको
गति देने की आवश्यकता है|
अटल जी की भाषा, शब्दावली ही
उनका हथियार और तलवार था,
किन्तु उन्होंने इससे किसी का गला नहीं कटा
और ना ही कभी अपना हाथ कटा| अटल जी का मन कोमल जरूर था मगर उनकेआजादी के बाद 16 अगस्त, 2018 की रात सबसे काली रातों में से एक है, जिसने आंधी में दीपक जलाने वाले को अपने अंधकार
में समा लिया| अटल यूग का समाप्त हो गये, विचार अमर रहेंगे| जय अटल! जय
भारत! जय हिन्दी!