गुरुवार, 3 जनवरी 2019

राहुल गाँधी ने राफेल पर, जनता से विश्वासघात किया है - जितेश सिंह

राहुल गाँधी पहले चिल्लाते रहते थे- "एक दिन में सुप्रीम कोर्ट यह प्रमाणित कर देगा कि राफेल में गड़बड़ी हुई है|" जब कि सुप्रीम कोर्ट ने कुछ दिन पहले कहा कि राफेल लड़ाकू विमान के खरीद में कोई गड़बड़ी नहीं हुई है| इसके बाबजूद राहुल गाँधी थमने का नाम नहीं ले रहे है| राहुल गाँधी पहले से ही देश की जनता को गुमराह कर रहे थे| सुप्रीम कोर्ट में मामला नहीं था, तब राहुल गाँधी अपने प्रत्येक सभा और भाषण में जोर देकर चिल्लाते थे "मैं साबित कर दूंगा; राफेल में घोटाला हुआ है|" ठीक वैसे ही जैसे मार्क्स कहा करते थे "किसी झूठ को सच करना है, तो उसे बार-बार और जोर-जोर से बोलो|" राहुल गाँधी भी कुछ इस तरह के फोर्मुला अपना रहे थे, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने पानी फेर दिया| देश की जनता समझ गई राहुल कितने झूठे और ### नेता है| 

राहुल गाँधी ने जिस तरह देश के रक्षा सौंदा के साथ बेहूदा मजाक किया है; अपने राजनीति उल्लू सीधा करने के लिए बहुत ही क्षुब्ध है| राहुल गाँधी ने 27 जुलाई, 2018, शनिवार को दिल्ली में आयोजित प्रेसवार्ता में मोदी और सीतारमण पर घोटाले का आरोप लगाया गया था| जिस प्रेसवार्ता में राहुल ने अंबानी पर 1 लाख करोड़ के
घोटाले के आरोप लगाए थे और राफेल सौदे को 'ग्रैंड मदर ऑफ़ ऑल द करप्शन' बताया| इसके साथ ही रक्षामंत्री सीतारमण पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया था| इसके बाद से राहुल जहां गये राफेल सौद को लेकर मोदी-अंबानी पर निशाना साधते रहे| चाहे वो दिल्ली में हो, पिकनिक पर विदेश में हो। हाल में ही बीते 5 राज्यों के चुनाव प्रचार के दौरान राफेल-राफेल-राफेल, मोदी-मोदी-मोदी करना नहीं भूले| 22 सितम्बर, 2018, शनिवार को कोंग्रस मुख्यालय में विशेष रूप से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री को चोर और भ्र्ष्ट घोषित कर दिया| राहुल गाँधी यही चुप नहीं बैठे; राफेल सौदे को लेकर मोदी और अंबानी का विरोध करते हुए बोले "भारतीय रक्षा बलों का मोदी और अंबानी ने 130,000 करोड़ रूपए की सर्जिकल स्ट्राइक की है|"   
25 सितम्बर,2018 को राहुल गाँधी अपने संसदीय क्षेत्र अमेठी गए तो वहां भी राफेल को मुद्दा बनाया| मोदी पर निशाना साधा| हाँ उन्होंने ने राफेल सौदे में अंबानी पर 30 हजार करोड़ के घोटाले के आरोप लगाए थे; जो 27 जुलाई, 2018 वाले आकड़े से 70 हजार करोड़ कम और 22 सितम्बर,2018 वाले आकड़े से 1 लाख करोड़ कम थे| इसके एक दिन बाद 26 सितम्बर,2018 को राफेल डील पर वायुसेना के उप प्रमुख ने एक निजी चैनल
के साक्षात्कार में बताया कि "मेरा मानना है कि लोगों को गलत जानकारी दी जा रही है, ऐसा कुछ नहीं है कि एक पक्ष को 30,000 करोड़ रुपये जा रहे है|" लेकिन राहुल गाँधी दोनों कान बंद किये हुए राफेल-राफेल और मोदी-मोदी जपते रहे| इसी बीच ज्योतिरादित्य भी अपने तीन दिवसीय चुनावी दौरे में शिवपुरी पहुंचे जहाँ सिंधिया ने मोदी पर निशाना साधते हुए कहा "राफेल डील में राष्ट्र के साथ प्रधानमंत्री मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने विश्वासघात किया है|" इसके बाद राहुल गाँधी जयपुर में युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं से कहा कि वे राफेल सौदे में भ्रष्टाचार को गाँव-गाँव तक लेकर जाएं और लोगों के सामने केंद्र सरकार के भ्रष्टाचार को उजागर करें| जब की 26 सितम्बर,2018 को फ़्रांस के राष्टपति मैक्रों ने कहा कि 'सरकार से सरकार' के बीच हुई थी राफेल डील और राफेल सौदे को लेकर मोदी की तारीफे की| उन्होंने कहा कि 'मेरा मानना है कि यह सौदा सामरिक दृष्टि से बेहद मत्वपूर्ण है| 
एक देहाती कहावत है "जमाना एक तरफ, जोरू का भाई एक तरफ|" राहुल भी राफेल सौदे पर जो रट पकड़ी उसे छोड़ने का नाम ही नहीं लेते है| जैसे की उन्होंने कहा था " सुप्रीम कोर्ट एक दिन में राफेल सौदे में भष्टचार को पकड़ लेगा| जब कि इसके विपरीत सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि क़ानूनी दायरे में रहते हुए राफेल लड़ाकू विमान का सौदा हुआ है, इसमें कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ है|" राहुल गाँधी को कौन समझाये; आखिर वो किसकी बात सुनते है? राफेल पर प्रधानमंत्री मोदी, रक्षामंत्री सीतारमण, वित्तमंत्री अरुण जेटली, कानूनमंत्री रविशंकर प्रसाद, देश के वायु सेना प्रमुख, एचएएल कंपनी, दसाल्ट के सीईओ और अब सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि राफेल सौदे में कोई घोटाला नहीं हुआ है| इसके बाद भी राहुल गाँधी अपने बेतुके बात पर डेट हुए है तो उन्हें जवाब देना होगा कि जब घोटाले की जानकारी है उनके पास, तो सुप्रीम कोर्ट को क्यों नहीं सौपी? 
इसके साफ़ है राहुल गाँधी ने राफेल पर देश की जनता के साथ विश्वासघात किया है| राफेल सौदे में अकारण बाधा उत्पन्न इसलिए की ताकि चुनावी मुद्दा बनाकर; केंद्र सरकार को घेर सके| 
राहुल गांधी राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बवजुद झूठी अफवाह फ़ैला रहे है| जेपीसी जाँच की मांग कर रहे है; उससे पहले राहुल गाँधी बताये की अब तक हुए 5 जेपीसी के क्या परिणाम निकले है? उनको पता होना चाहिए की उन्हीं के सरकार में देश में 5 बार जेपीसी का सदन में गठन किया गया| जिसके परिणाम नहीं निकले क्यों? 
जेपीसी यानी जॉइंट पार्लियामेंटरी कमिटी| यह 30 सदस्य की कमिटी होती है, जिसमें सभी दलों के सदस्यों के अनुपात में 30 सदस्य को मनोनीत किया जाता है| जो कुछ महीने तक विषय की जाँच करने के बाद अपनी रिपोर्ट सदन में सौपते है| अब तक सदन में 5 बार जेपीसी लाया गया है जिसके कोई परिणाम नहीं निकले है| ऐसे में राहुल गाँधी सिर्फ समय बर्बाद कर डील को रद्द करवाने की मंशा के काम कर रहे है| देश की सुरक्षा के साथ राजनीति कर रहे है| जो किसी की परिस्थिति में निंदनीय है| 
सदन के कब-कब लाये गये जेपीसी-  
1. बोफोर्स तोप सौदे की जांच : 1987 में जेपीसी का गठन किया गया। बाद में रिपोर्ट तैयार होने से पहले ही विपक्ष ने इसका बॉयकॉट कर दिया।
2. हर्षद मेहता स्टाक मार्केट घोटाला : 1992 में जेपीसी का गठन। इस जेपीसी की सिफारिशें पूरी तरह से लागू नहीं हो सकीं।
3. केतन पारेख शेयर मार्केट घोटाला : 2001 में जेपीसी का गठन। इस जेपीसी ने स्टॉक मार्केट रेगुलेशन में बदलाव की सिफारिश की।
4. सॉफ्ट ड्रिंक पेस्टिसाइड मामला : 2003 में जेपीसी का गठन किया गया।
5. टू जी स्पेक्ट्रम घोटाला : 2011 में जेपीसी का गठन। 30 सदस्यों वाली इस कमिटी को लेकर फिलहाल विवाद चल रहा है।
6. वीवीआईपी हेलिकॉप्टर घोटाला : इस मामले पर भी जेपीसी के गठन पर तैयारी चल रही है।

संदर्भ :- सुबह सवेरे, नया इंडिया, सत्ता सुधार, लोकदेश खबर, राष्ट्रीय हिन्दी मेल, 

जितेश सिंह

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