आज बहुत दिन बाद उसे देखा और देखते रहा| बहुत से पुराने ख्याल का
बवंडर सुनामी की तरह शरीर में हलचल मचा रही थी| फिर भी मेरी सहिष्णुता ही थी जो मुझे अडिग शांत की हुई थी| शायद उसके मिलाने की खिलखिल्लाहट से ज्यादा प्रबल मेरी शांति थी| शायद अब बड़े हो गए है; नहीं तो अंदर जो तूफान है उसके बारे में क्या बताऊ? इतना ही बताऊँगा 'दिल तो अभी बच्चा है', मैं तो सायना हूँ ना| 18-19 साल की उम्र में दिल की सब बात मान लिया जाये ये जरुरी तो नहीं है लेकिन मैं दिल की सब बात सुनाता जरूर हूँ| कोई व्यावसायिक की तरह जब कैरियर और तुझमे प्रॉफिट-लॉस की दूरगामी परिणाम को खोजता हूँ तो ऐसा प्रतीत होता है, मैं आज सच्चा खरीदा हूँ तेरी मुहब्बत का| लोग तो ऐसा ही समझते है पर मैं जनता हूँ; इश्क के मार्केट में मैं इक्लौता व्यापारी
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