शुक्रवार, 11 जनवरी 2019

वर्फ वाली मछली खा रहे है तो हो जाए सावधान - जितेश सिंह


मछली को लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए केमिकल लगाकर वर्फ में रखा जाता है| लेकिन आज जो वर्फ वाले मछली हम खा रहे है वह कैंसर जैसे बीमारी का कारण बन सकते है| इसका कारण है कि मछली को ज्यादा लम्बे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमे फर्मलीन जैसे खतरनाक केमिकल की आवश्यकता से अधिक मात्रा इस्लेमाल में लायी जा रही है| जिससे कैंसर जैसी खरतनाक बीमारी होने कि संभावना बढ़ जाती है| ज्यादातर इस प्रकार की रासायनिक लेप युक्त मछली आंध्र प्रदेश से आयातित हो रही है| सूत्रों की माने तो बिहार सरकार इस प्रकार की मछलियों पर रोक लगाने को लेकर गंभीर है| अभी आंध्र प्रदेश से 500 मीट्रिक टन मछलियां रोज बिहार आ रही है| ऐसे में अगर मछली की मांग को देखा जाये तो आंध्र प्रदेश की मछलियों पर रोक लगाने से मछली के दाम में 50 से 70 रुपये प्रति किलो का उछाल हो सकता है| बिहार; आज की स्थिति में 1608 मीट्रिक टन मछली ही उत्पादन करने की क्षमता रखता है और खपत बहुत अधिक है| ऐसे में मछली खाने वाले के लिए पॉकेट और गर्म हो सकती है| 

इधर बिहार में मछली पालन के लिए भी सरकार काफी प्रयासरत है| केंद्र सरकार और राज्य सरकार  मछली पालको के लिए प्रशिक्षण और अनुदान दे रही है| आसानी से ऋण मछली पालको को उपलब्ध कराया जा रहा है| इससे आने वाले समय में बिहार में मछली उत्पादन 500- 700 मीट्रिक टन और बढ़ने की संभावना है| देखा जाए तो बिहार
में| मछली उत्पादन के प्रति लोगों की रूचि खासा अधिक रही है| एक समय था कि बिहार के ग्रामीण क्षेत्र में मछली पालन का जूनून इतना था कि लोग अपने घर के आँगन और दुआर को खोदवा कर पोखर बना लिए थे| मछली को बिहार में मैथली ब्राह्मण भी बड़े चाव से खाया करते है| मांसाहारी आहार में मछली सर्वाधिक लोकप्रिय है| लोग मछली खाना, मुर्गा और बकरी के मांस से ज्यादा बेहतर और अच्छा मानते है| मछली प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत भी है|

जितेश सिंह


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