किसी के जख्म का मरहम
किसी के गम का इलाज
लोगों ने बाँट रखा है
मुझे दवा की तरह
कुछ तन्हाईयां
वेबजह नही होतीं,
कुछ दर्द आवाज़
छीन लिया करतें है
ऐ बेवफा थाम ले मुझको
मजबूर हूँ कितना,
मुझको सजा न दे
मैं बेकसूर हूँ कितना,
इस जमीन से तो हम
रिश्ता तोड़ जाएंगे,
बस यादों का
एक शहर छोड़ जाएंगे
अरमानों के रंग
बदले कई अर्से हो गए,
ऐसा लगता है तेरे लिए
हम पुराने हो गए।
मेरी क्या ख़ता है
तू मुझे सजा देदे,
क्यों तेरे अंदर इतना
दर्द है इसकी तू वजह देदे,
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