शनिवार, 7 अक्टूबर 2017

GDP और राजनीति ( जितेश सिंह )



अभी हाल में ही । देश में तिमाही GDP की गणना की गई । जिसमे गिरावट आई है । यह 7.4 ' /. से घट कर 5.7 '/. बताया गया । जिसके कारण विपक्ष मोदी सरकार पर । देश  की आर्थिक स्थिति खराब करने का आरोप लगा रहा है ।
आश्चर्य तो तब होता है । जब भाजापा के ही दो नेता विपक्षीयों के सुर से सुर मिला कर बोलने लगे ।
बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार को देश की आर्थिक स्थिति तबाह करने और सबको गरीब बनने का आरोप लगाया । तो वहीं बीजेपी नेता अरुण भौरी ने नोटबंदी को सबसे बड़ी मनी लॉन्ड्रिंग स्कीम और GST को फेल बताया ।
थोड़ा सा हम कांग्रेस सरकार में GDP की चर्चा करे तो बाते स्पष्ट होगी । पिछले 6 साल में देश में 8 बार GDP 5 '/. से भी नीचे गया है । तिमाही (क्वार्टर ) में देखा जाए तो विकास दर 0.2 से 1.5 तक थी । कुछ वर्षों की तुलना वैश्विक विकास दर से की जाए । तो बाते और स्पष्ट होगी ।
वर्ष 2013-14 में देश का GDP 4.74 वैश्विक 11.54 । वर्ष 2012-13 में देश का GDP 4.47 वैश्विक 11.88 । वर्ष 1979-80 में देश का GDP -5.20 वैश्विक 9.12 । इसी तरह वर्ष 1976-77 और 1974-75 में देश का GDP 1.25 और 1.01 थी । 1972-73 में -0.35 थी । जब की मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल का GDP देखा जाए तो । आर्थिक मंदी के बावजूद 6.74 '/. अंकित किया गया । तब विपक्ष के लोग GDP मापने वाले पैरामीटर को उस समय गलत बता रहे थे । आज जब विकास दर कम बताया गया तो पैरामीटर पसंद आने लगे । ये राजनीती विडंबना ही है । जिस कांग्रेस पार्टी  देश में 60 वर्षों तक राज की । देश विकास दर  इनके शासन कल में न्यूनतम दर पर था । राजनीति, वैश्वीकरण, विदेशनीति, पाकिस्तान का तांडव, चीन की धमकियां, भ्रष्टाचार, लूट - खसोट, घोटाले, चरम सीमा पर थी । कई बार वृतिय आपातकाल भी घोसित हुआ था । फिर भी कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष राहुल गांधी 6 महीने में देश की सारी व्यवस्था सुधारने की क्षमता रखते है । भूतपूर्व प्रधानमंत्री तो बड़े अर्थशास्त्री थे । फिर भी विकास दर इतना कम क्यू था ? जवाब है इसका नहीं ना । सोनिया जी और आप राहुल गांधी जी आपने देश के प्रधानमंत्री का इस्तेमाल किया । आपकी तानाशाही इतनी थी कि , देश का प्रधामंत्री कहीं आम जनता को संबोधन तक नहीं कर सकता था ।
मोदी जी हमेशा प्रधानमंत्री पद की गरिमा को बनाए रखे । आज निस्वार्थ भाव से देश को आगे बढ़ाने में  जुटे है । आज उन्हीं के संघर्षों का परिणाम है की, भारत विश्वमंच पर टीका हुआ है । भविष्य में भारत भी दुनिया को आपनी सूझ बूझ से प्रभावित करेगा । इसके लिए हमें सशक्त प्रधानमंत्री चुनना होगा । इतिहास और वर्तमान को परखे । फिर स्वर्थहित को त्याग दे, देशहित के लिए 2019 की तैयारियां में देश को आपका साथ चाहिए । स्वंम विचार करे ।
                                  जितेश सिंह

बुधवार, 4 अक्टूबर 2017

गर्व से कहो हम हिन्दू हैं ! -------- जितेश सिंह

विवेकानन्द क्यू शक्तिशाली बनाने की बात करते थे ? क्या हमने कभी सोच ? आधुनिक काल में हमारी स्मरण शक्ति मंद हो गई । इसी कारण हम स्वंम ही अपने आंतरिक शक्ति को एक दिशा नहीं दे पा रहे है । विदेशी रीति रिवाज में स्व भुल गए ।

आज हमारे देश की आवश्यकता है लोहे की मांसपेशियाँ और फौलाद के स्नायु तंत्र, ऐसी प्रचण्ड इच्छाशक्ति जिसे कोई न रोक सके, जो समस्त विश्व के रहस्यों की गहराई में जाकर अपने उद्देश्यों को सभी प्रकार से प्राप्त कर सके। इस हेतु समुद्र के तल तक क्यों न जाना पड़े या मृत्यु का ही सामना क्यों न करना पड़े।’’

-स्वामी विवेकानन्द

श्री रामकृष्ण परमहंस के प्रमुख शिष्य, स्वामी विवेकानन्द आधुनिक समय के प्रथम धर्म-प्रचारक थे जिन्होने विदेश जाकर विश्व के सम्मूख सनातन धर्म के सर्वासमावेशक, वैश्विक संदेश को पुनःप्रतिपादित किया। ऐसा संदेश जो सब को स्वीकार करता है किसी भी मत, सम्प्रदाय को नकारता नहीं। विदेशी शासन से विदीर्ण शक्ति, परास्त मन व आत्मग्लानी से परिपूर्ण राष्ट्र के पुनर्निमाण हेतु राष्ट्रवादी पुनर्जारण को प्रज्वलित करनेवाले पुरोधा स्वामी विवेकानन्द ही थे। भारत को उसकी आत्मा हिन्दू धर्म के प्रति सजग कर उन्हांने इस पुनर्जागरण की नीव रखी थी।
                                                 जितेश हिन्दू

मंगलवार, 3 अक्टूबर 2017

वर्षों से मां गंगा के गोद का भिखारी रहा हूं । ( गणिनाथ साहनी )

गणिनाथ जी शायद हमारे बीच अपरिचित हो । परंतु हिन्दू दर्शन वेबसाइट के माध्यम से इनकी कुछ कविताएं  हमलोगों ने जरूर पढ़ी होगी।

गणिनाथ जी मूलरूप से बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित रेवा ग्राम के निवासी है । एक सुयोग्य एवं कर्मठ शिक्षक / कवि । आपके कविताओं में ग्राम-गीत का मर्म छिपा होता है । आपने हास्य, व्यंग, धार्मिक, राष्ट्रवादी तथा गंगा मां के संबंधित अनेकों कविताएं लिखी है । ग्रामीण जीवन पद्धति ही प्रेम एवं वास्तविक जीवन है । आपने प्रत्येक कविताओं के माध्यम से ग्रामीण जीवन की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया है । ग्रामीण जन जागरण के लिए आपकी कविताएं अनमोल हैं ।
स्मरणीय है !

कहते हैं -  " गंगा किनारे वह पवन सा मंदिर ।
                  वर्षों से मै इसका सेवक रहा हूं ।
   
                 नहीं चाहिए मुझे धन और दौलत ।
               मैं वर्षों से मां गंगा के गोद का भिखारी रहा हूं । "


लाल बहादुर शास्त्री के बारे में आपने क्या खूब लिखा है  ?    
विरले ही सौभाग्य जागता है धरती का
विरले ही नियति वैसी प्रतिमा गढ़ती है,

विरले ही आता है कोई दीदावर जग में
जिसको दुनिया लालबहादुर कहती है।

धन्य है भारत की भूमि
जिस पर ऐसे रत्न उपजते है,

जो राष्ट्रहित के लिए समर्पित हो
अपना सबकुछ ही तजते हैं ।
























मेरा बचपन लौट आया ! ( गणिनाथ साहनी )

मेरा बचपन लौट आया !
           *****

मेरा बचपन लौट आया !
यह कहते हुए उनकी आँखे भर आई,
अनायास एक वाक्य निकला
बड़ी लम्बी जुदाई।

समवयस्को का दीदार
बड़ी मुद्दत पर हुआ है,
कमाया या गमाया इसका ज्ञान
बड़ी शिद्दत से हुआ है।

देखते ही हमउम्रो को
ताजी हो गई भूलि-बिसरी यादें
शायद वक्त कुछ बदल गया है,
तब होते थे हाथ मे गुल्ली-डंडे
अब उसका विस्तार होकर
वही लाठी बन गई है।

बहुत दिनों बाद आएं हैं वो गाँव में
मिडिल तक यहीं पढ़े थे पेंठिया पर के स्कूल में,
खेले थे बालमित्रो के संग दोलापाति,
कबड्डी, गुल्ली-डंडा पुराने बरगद की छाँव में।

थक गई है आँखे
देखकर दुनिया की चातुरी-चकाचौंध।
बीतगए कितने मधुमास
न सुनी कोयल की कूक
न चिड़ियों की चहचह।
सुनता रहा सायरन
गाड़ी की पों पों, पी पी की आवाज।

साथ में आया था उनका बेटा
घुमाने गाँव।
कुछ ही देर में करने लगा
लौटने की तैयारी।
वृद्धइच्छा पर युवाइच्छा पड़ी भारी।

वह बूढ़ा कुछ ही पल में
अपनी पूरी जिन्दगी जी लिया।
मन ही मन सिसकियाँ भरकर
फटे हृदय को सी लिया।

पथराई आँखे और थके पाँव
अब शहर लौटना नही चाहते।
पर ....  .... अलविदा ! अलविदा !
अपने धूल-कण पर
चलना सीखाने वाली धरती माँ।
अब शायद मिलन न हो सकेगा !

          - गणिनाथ सहनी, रेवा ( मुजफ्फरपुर, बिहार )

आतंकवादियों का मुहर्रम ! ( जितेश सिंह )

भारत ही नहीं । अपितु विश्व के इतिहास में कोई भी ऐसा इस्लामिक पर्व नहीं । जिसमें मुस्लिमों द्वारा हिंसक प्रदर्शन नहीं हुआ ।

हाल में ही नवरात्रि समाप्ति के ठीक बाद मुस्लिमों का पर्व मुहर्रम के । अवसर पर कानपुर के परम पुरवा इलाके में मुसलमानों ने दंगे शुरू कर दिए । इसमें 25 से ज्यादा लोग घायल हुए । कितने को चोट लगी । 5 से ज्यादा लोगों की अब तक मृत्यु हो चुकी है और लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रहा है । अभी स्पष्ट नहीं हुआ । परंतु यह दंगा क्यों ? कहां गए हिंदू मुस्लिम भाई-भाई कहने वाले देशद्रोही । कहां गए वो मुल्ला -मौलवी ? जो इस्लाम को शांति का मजहब बताते रहे है । आज इस हिंसक प्रदर्शन का खंडन करें । कहां गए वो स्वतंत्र मीडिया ? जिन्होंने BHU की घटना को खूब उछाला । झूठी खबरें बनाकर 'बनारस हिंदू विश्वविद्यालय' को बदनाम करने साजिश की । आखिर कब तक इस झूठे को झेलते रहे । आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता । अब इसे बदले , सत्य का स्मरण करें । आतंकवाद का एक ही धर्म होता है , वह है इस्लाम !
बौद्ध भिक्षु विराथु का कहना सही है - " कोई व्यक्ति पागल कुत्ते के साथ नहीं सो सकता बर्बरता पूर्वक वह मारा जाएगा।" इतिहास और वर्तमान दोनों साक्षी है । पूरी दुनिया में शांति को भंग करने वाला कोई धर्म है, तो वह इस्लाम है । अगर पूरे विश्व को किसी से खतरा है , तो वह इस्लाम से है । समग्र विश्व को एक मंच पर । एक साथ इसके विरुद्ध खड़े होने की आवश्यकता है । ऐसे देशद्रोहियों को पांव तले कुचले दे या देश से बहिष्कृत करें । तभी शांति की पुनर्स्थापना होगी । यही भागवत गीता का उपदेश और यही धर्म है । भय को त्यागे और अपने धर्म का पालन करे । शत्रुओं को जवाब उन्ही की भाषा में देना होगा । भारत भू के पुनर्निर्माण के लिए सामर्थ्यवान बने । शक्तिशाली बने ! आवश्यकता पड़ने पर अधर्मियों का नाश करने योग्य बने । जल्द ही एक बड़ी चुनौतीओं का सामना करना है । क्या आप तैयार हो ? आर-पार की लड़ाई होगी । धर्म की पुनर्स्थापना होगी या फिर अधर्मी नंगा नाच करेगा । कल जो घटित होगा । उसे कोई नहीं बदल सकता । आपको तय करना है । जो भी हो लड़ाई तो होगी । शांति की पुनर्स्थापना भी होगी । यह निश्चित है । आप सजग हो सशक्त बने अस्त्र को धारण करें । स्वार्थ का त्याग करे । इसी में देश और समाज का कल्याण है ।
               स्वयं विचार करें !
                                                     जितेश हिंदू




सोमवार, 2 अक्टूबर 2017

प्रदर्शन नहीं यह आतंकी साज़िश थी ( जितेश सिंह )

अब बर्दाश्त नहीं होता । आखिर कब तक हाथ पर हाथ रख कर  बैठेंगे ।
यही कहता है । ये छोटा शेर ....

मैं उन तथाकथित हिंदुओं से बोल दू । जो हिंदू होते हुए । भारत की संस्कृति, समाजिक, राजनीतिक, व्यवस्था को कोसते रहते हैं । और अपने दोगलेपन होने का हमेशा एहसास दिलाते रहते हैं । वे सभी इसका खड़न करे । BHU के परिसर में छात्राओं साथ छेड़छाड़ के बारे में हुए । हिंसक प्रदर्शन कहा तक सही है । जब वे प्रदर्शकर्ता प्रशासन से नहीं डरते । उन पर पेट्रोल बम बना कर फेंकते है । तोड़फोर कर सकते पुलिस की गाड़ियां जला सकते । इतना साहसी और प्रशिक्षित है । फिर भी कोई लड़का उन पर कॉमेंट कर देता है । ये बात हजम नहीं होती ।
प्रदर्शन के दौरान जो प्रदर्शनकर्ता थे । उसमे जेएनयू , हैदराबाद यूनिवर्सिटी , जोधपुर के छात्रों को देखा गया । आज यह भी विभिन्न मीडिया चैनल के द्वारा स्पष्ट हो गया । अब सवाल उठता है । क्या यह घटना  देशविरोधी ताकतो की चाल है ? क्या फिर से मोदी जी निशाने पर थे ? आपको पता होगा कि उसी रास्ते से मोदी जी जाने वाले थे । अंत में प्रशासन की सूझ बूझ के कारण उन्हे दूसरे रास्ते से जना पड़ा । कुछ भी मामला हो, पर प्रदर्शन का हिसंक रूप धारण करना । कई सवाल खड़े कर दिए है । इसकी जांच होने चाहिए । उग्र प्रदर्शनकर्ता एवं बाहरी छात्रों की पहचान कर । पूछताछ की जाए । गत वर्षो में हुई आतंकी घटना से सबक लेने की आवश्यकता है । इसका बचाओ और संरक्षण देने वाले नेता , मीडिया,कम्युनिस्टों , को भी पकड़ा जाए । सुरक्षा के लिए कड़े कानूनी कदम उठाने की जरुरत है । वो दिन दूर नहीं जब मुस्लिमों (अतांकवादी ) , कम्युनिस्टों तथा देशविरोधी ताकतों का नंगा नाच होगा । इतिहास और वर्तमान दोनों घटनाओं से हम भलीभांति अवगत है । ऑल आउट की आवश्यकता कश्मीर में ही नहीं, बल्कि देश के विभिन्न भागों में भी है । 50-60 तो दोगले मेरी नज़रों में भी है । कुछ तो करे सरकार !
                                                   जितेश हिन्दू

रविवार, 1 अक्टूबर 2017

मीडिया जिसे BHU का छात्र बता रही है , JNU का निकला । जितेश सिंह



मीडिया जिसे BHU का  का छात्र बात रहा था । वास्तव में वो BHU का नहीं वह तो JNU का निकला ।

  

जी हां कुछ दिनों से BHU मीडिया बंधुओ का केेंद्र  बना रहा ।परिसर के छात्रों ने BHU के कुछ छात्रों पर यह आरोप लगाया कि उनके साथ कुछ लड़के अभद्र टिप्पणी करते है ।

इसकी सत्यता की भी जांच अभी नहीं हुई है । क्या सही में ऐसी दुर्व्यवहार किया गया है या नहीं ? पर यह मामला राजनीति रूप ले लिया । तीन दिनों तक यह मामला काफी चर्चित भी रहा । इसमें कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए । NDTV इस  संद्रभित  घटना को प्रस्तुत किया । छात्रों से लाइव बाते की ।  उसमे से कोई भी छात्र BHU के नहीं थे । वाही सोशल साइट पर यह वीडियो काफी चर्चित भी रहा । 
पता नही ये मीडिया का कैसा चरित्र है ? 
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में छात्र हंगामा कर रहे है । पुलिस पर पेट्रोल बम फेंक रहे है । मतलब BHU के छात्रों को पेट्रोल बम बनाना आता है । वो इतने प्रशिक्षित है । फिर क्या  छेड़खानी करने वाले गुंडों से नहीं लड़ सकते ? पुलिस पर पेट्रोल बम फेंक सकते है । BHU में कैसे वामपंथ का खेल चलाया जा रहा है ? ये खेल कौन खेल रहा है ? जिस छात्र की तस्वीर हमने ऊपर लगाई है, जिसके चेहरे को हमने लाल घेरे से घेरा हुआ है । इसकी ये तस्वीर अख़बार में मीडिया ने छापी है, बताया जा रहा है की ये सब BHU छात्र है । चलिए मीडिया के अनुसार ये छात्र भी BHU का छात्र है । पर इस छात्र पहचान हुई , तो जनाब का नाम है, मृत्युंजय सिंह और ये BHU तो छोड़िये बनारस के भी नहीं है, वहां से 700 किलोमीटर दूर दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी के छात्र है, वामपंथी है । JNU छात्रसंघ से भी जुड़े हुए है । पर दिल्ली से 700 किलोमीटर दूर बनारस में जाकर BHU का छात्र बनकर घूम रहे है । अब अंदाजा लगाइये की नक्सलियों के स्टाइल में पुलिस पर पेट्रोल बम फेंकने वाले कौन लोग है । सिर्फ 1 मृत्युंजय सिंह ही नहीं, हैदराबाद, जाधवपुर से भी कई कई दर्जन वामपंथी काशी में घुसे हुए है । और BHU का छात्र बनकर घूम रहे है । ये है वामपंथ का खेल, जिसे मीडिया और सेक्युलर पार्टियां, सभी मिलकर चला रहे है । पुलिस पर पेट्रोल बम ये माओवादी फेंक रहे है, और बदनाम BHU और उसके छात्र हो रहे है । 
खैर जो देशविरोधी ताकते है । ये उनकी गलती ही नहीं वो अापना नजायज बाप पाकिस्तान का काम पूरे समर्पण के साथ कर रहे है । लेकिन आए दिन मोदी कि आलोचना करने वाले व्यक्ति और मीडिया या यूं कहिए स्वत्रंत मीडिया चुप क्यू है ? शायद ये घटना उनके दोहरे चरित्र को प्रदर्शित करती है । अगर वो स्वात्रंता की बात करते है । पहले इसका खंडन करे । नहीं तो आम लोगों में उनकी भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं ।
                                                          जितेश सिंह

कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान

भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ |  इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है |  तो मुझे भी संविधान के धारा  19  क...