शनिवार, 30 सितंबर 2017

और अंत मे सत्य ही जीता। !

और अंत मे सत्य ही जीता।
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और अंत में सत्य ही जीता
झूठ की हुई हार
क्रोध पर आनंद जीता
अहंकार पर विनम्रता का प्रहार।

ईर्ष्या पर स्नेह की विजय
घृणा पर प्रेम की जीत
आलस्य से स्फूर्ति आगे
वैमनस्यता से ऊपर है प्रीत।

अंधकार कुछ और नही
प्रकाश का अभाव है,
हठ करके सत्य को नकारना
यही राम-रावण का युद्ध है
और यही विजयदशमी का
सत्य सनातन त्योहार है।

इन्ही सत्य शुभकामनाओं के साथ विजय पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ।

        - गणिनाथ सहनी, (मुजफ्फरपुर , बिहार)

शुक्रवार, 29 सितंबर 2017

त्योहारों का इतिहास ! जितेश सिंह

दिपावली - दापावली मनाई जाती है क्योंकि उस दिन राम जी 14 वर्ष का वनवास काट कर अयोध्या लौटे थे ।      

 होली - भक्त पहलाद होलिका की अग्नि से बच गए थे और उन्हें भगवान नया जीवन दिया ।

दुर्गा पूजा - दुर्गा पूजा मनाई जाती है क्योंकि उस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध किया था ।

मुस्लिमों के किसी भी पर्व के पीछे की कोई कहानी या कारण जानते हो । नहीं ना ! 
क्योंकि मुस्लिम खुद भी नहीं जानते । 
आइए हम कुछ पर्वों के पीछे की कहानी जाने ।

शबे बरात- शाबे बारात मनाया जाता है क्योंकि उस दिन मोहम्मद ने अपनी 6 साल की बेटी से निकाह किया था ।

रोजा -  रोजा रखा जाता है क्योंकि मोहम्मद अपनी बेटी उर्फ पत्नी आयशा को सुहागरात के लिए राजी ना होने के कारण दंड स्वरुप उसे सिर्फ एक समय का खाना देता था । इसलिए मुस्लिम आयशा के समर्थन या साथ देने हेतु रोजा रखते हैं ।

ईद  ईद मनाई जाती है क्योंकि उस दिन 1 महीने में भूख और प्यास से बेहात आयशा आखिर अपनी पिता उर्फ पति मोहम्मद की बात मानकर सुहागरात के लिए तैयार हो गई  ।यह घटना दुज को हुई थी इसलिए मुस्लिम इसे दूज का चांद देखना अर्थात चांद का मतलब यहां आयशा से है क्योंकि आयशा बेहद खूबसूरत थी और मासूम ! बिल्कुल चांद की तरह.....
                                                   जितेश सिंह

गुरुवार, 28 सितंबर 2017

सत्य सहज प्रकृति

झूठ की खेती में
बीज, हल व शरीर का बल नही लगता
और काटने समय तक
उसमें कोई फल नही लगता।


सूर्य सत्य है, नित्य है निकलता
पर चमगादड़ व उल्लू
अंधकार में है पलता
दिन के प्रकाश में,
वो कभी नही निकलता।


बिजली की चमक टिका नही करती
चंदा की दमक फिकी नही पड़ती
सत्य अपने मुक़ाम पर अड़ा रहता है,
परिणाम जो हो वह अविचल खड़ा रहता है।

        

सर झुका रहे दरबार में !

सर झुका रहे दरबार में !
            *****

पूजता जिन्हे जहाँ सारा
छप्पन भोग की थाली से
मैं उन्हे पूज रहा केवल
अड़हुल फूल की डाली से।

यह मेरा अहं भाव नही
मेरा अकिंचनपन ही है,
और कुछ भी पास नही
अपना तो समर्पित तन-मन ही है।

तन भक्ति का साधन है,
मन में श्रद्धा उपजती है,
तन-मन दोनो के समावेश से
हृदय की प्रतिमा सजती है।

सर झुका रहे हमेशा
माँ के चरणों मे, दरबार में
श्रद्धा की चुनरी, भक्ति का पुष्प
अर्पित करता रहूँ हरबार मैं।

      

बुधवार, 27 सितंबर 2017

भगत सिंह जैसे वीरों ने, जब जीवन का बलिदान दिया : जितेश सिंह


पंजाब में शेरों के घर ,
एक शेर ने पैदा लिया ।

3 वर्ष की आयु में जो ,
बंदूक की खेती करता था
अस्त्र-शस्त्र बम बनाने के  ।
विधाओं से जो से परिचित था ।

असेंबली में बम फेंक कर जिसने
इंकलाब का नारा दिया ।
भागने के बजाए गिरफ्तार होकर
जिसने जन सैलाब का नारा दिया

52 दिन भूख हड़ताल कर
जिसने अंग्रेजो के होश उड़ा डाले
फांसी के फंदे को जिसने
चूमकर स्वीकार किया

रंग दे बसंती चोला कि
जिसने आजीवन गुणगान किया ।

अहिंसा से आजादी नहीं मिली ।

जब भगत सिंह जैसे वीरों ने ,
जीवन का बलिदान दिया ।

मां भारती के भी धन्य हो गई
इस वीर पुत्र को जन्म देकर

आइए हम सभी भी
हृदय से उनका नमन करें ।।

भगत सिंह के जन्म दिवस पर उनको सत-सत नमन !
                             जितेश सिंह

फिर रावण मारा जाएगा। - गणिनाथ सहनी

फिर रावण मारा जाएगा।
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फिर इस दशहरा में
रावण मारा जाएगा।
मंदोदरी विलाप करेगी
राज विभीषण पाएगा।

सीता कैद से मुक्त होएगी
श्री राम-लखन मुस्काएंगे।
महावीरजी जय श्री राम का
नारा खूब लगाएंगे।

सभी अयोध्या लौट आएंगे
श्री राम राजा बन जाएंगे।
हरि अनंत हरि कथा अनंता
संत-मुनिश्वर गाएंगे।

पर राज सभा में कोई पूछेगा -
प्रभु ! क्या सचमुच रावण को मारे थे ?
या नींद में सुलाकर
उसके वंश को तारे थे।

इस पर प्रभु कुछ पल मौन रहेंगे
सभा में सन्नाटा छा जाएगा।
प्रभु के चेहरे पर मंद मुस्कान खिलेगी
पर लक्ष्मण को क्रोध आ जाएगा।

फिर अनुज को शांत कराकर प्रभु
एक राज की बात बताएंगे।
ऐसे गूढ़ प्रश्न का उत्तर
देने में कुछ सकुचाएंगे।

पुनः कहेंगे सुनो सभी
सचमुच रावण मरा नही है,
वह अचेत है, पड़ा रहेगा
जब-जब धर्म की हानि होगी
वह सचेत हो खड़ा रहेगा।

कहा प्रश्न पूछने वाला -
समझ गया प्रभु आपकी लीला।
सत्य-धर्म हृदय को जो धेरेगा
वह सभी काल में निर्भय हो पाएगा।
वह सदा आनंदित होगा
जो श्री राम को
हृदय के सिंहासन पर बिठाएगा।

       जय श्री राम।


मंगलवार, 26 सितंबर 2017

भारत फिर गुलाम नहीं होगा ! (जितेश सिंह)


यह शंखनाद है , भारत के पुनरुत्थान का ।।

तलवार, बंदूक हमारा क्या उखाड़ लेगी ?
जब तुम्हारी तोप चलते हो तो,
हम अपनी कलम उठाते है । ।
अरे ! आज भी हम बीच सड़क पर ।
'भारत माता की जयकार' और,
 वंदे मातरम'  का नारा लगाते हैं । ।
हौंसले इतने बुलंद है हमारे ।
अभी तो हमने कलम ही पकड़ी
और क्रांति की आंधी बहाने लगी ।  ।
वह दिन दूर नही जब ।
पूरा भारत भगवामय हो जाएगा ।।

देश के गद्दार बेमौत मारे जाएंगे ।
उन्हें समग्र विश्व में कहीं नहीं शरण  मिलेगा । ।
अभी तो हमने कलम उठाई है ।
भारत की लड़ाई अभी बाकी है !
कश्मीर का इंतकाम अभी बाकी है !
केरल की लड़ाई अभी बाकी है !
बंगाल की लड़ाई अभी बाकी है !
बाकी है ! तमाम देशद्रोहियों से बदला लेना ।  
ओवैसी से राष्ट्रगान गवाना अभी बाकी है !
तमाम मौलवियों से भारत मां की जयकार लगवाना अभी बाकी है !
गौ माता के हत्यारों को सजा देना अभी बाकी है । ।

अभी तो हमने उठाई है कलम ।
तलवार उठाना अभी बाकी है ।।
जिस दिन हम संकल्पित हो गए ।
लाखों अर्जुन खड़े हो जाएंगे । ।
पूरा भारत कुरुक्षेत्र बन जाएगा ,
देशद्रोहियों का विध्वंस, विनाश इस कदर होगा ।
1000 सालों तक देशद्रोही पैदा नहीं लेंगे ।
भारत फिर कभी गुलाम नहीं  होगा । ।

                                                 जितेश सिंह

कांग्रेस की निफ्टी और सेंसेक्स दोनों में भारी गिरावट के पूर्वानुमान

भविष्य में क्या होंगी, मैं नहीं जनता हूँ |  इस दौर में बहुत लोग अभिव्यक्ति की आजादी का अलाप जप रहे है |  तो मुझे भी संविधान के धारा  19  क...